ॐ श्री मार्कंडेय महादेवाय नमः

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्यवेत्।
सब सुखी हों । सभी निरोग हों । सब कल्याण को देखें । किसी को लेसमात्र दुःख न हो ।

Pandit Uday Prakash
Astrologer, Vastu Consultant, Spiritual & Alternative Healers
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शुक्रवार, 8 मई 2026

Vastu Ka Sabse Bada Satya । वास्तु का सबसे बड़ा सत्य — ऊर्जा कहाँ से आती है और कहाँ टिकती है?

 

वास्तु का सबसे बड़ा सत्य — ऊर्जा कहाँ से आती है और कहाँ टिकती है?

“ईशान कोण आकाश का द्वार है…और नैऋत्य पृथ्वी का आधार। इन दोनों के संतुलन का नाम ही वास्तु है।”

जब पृथ्वी एक मटका है — वास्तु का अद्भुत रहस्य


उत्तर-पूर्व से ऊर्जा का प्रवेश और दक्षिण-पश्चिम की स्थिरता का गूढ़ रहस्य

वास्तुशास्त्र को अक्सर लोग केवल दिशाओं, कमरों और निर्माण के नियमों तक सीमित समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक गहरी है। वास्तु केवल भवन निर्माण की पद्धति नहीं, बल्कि पृथ्वी, प्रकृति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व यह अनुभव किया था कि पृथ्वी पर बहने वाली सूक्ष्म ऊर्जाएँ मनुष्य के जीवन, मानसिकता, स्वास्थ्य, संबंध और समृद्धि को प्रभावित करती हैं। इन्हीं ऊर्जाओं को संतुलित करने के लिए वास्तुशास्त्र की रचना हुई।

यदि वास्तु को बहुत ही सरल और प्रतीकात्मक रूप में समझना हो, तो “मटका” उसका सबसे अद्भुत उदाहरण बन सकता है।

कल्पना कीजिए कि पूरी पृथ्वी एक मटके के समान है। मटके का निचला भाग — उसकी पेंदी — वह आधार है जिस पर पूरा मटका टिका रहता है। यही भाग मटके को स्थिरता देता है। यदि पेंदी कमजोर हो जाए, टूट जाए या उसमें छेद हो जाए, तो मटका चाहे कितना भी सुंदर क्यों न हो, उसमें रखा जल कभी सुरक्षित नहीं रह सकता। वास्तुशास्त्र में यही सिद्धांत दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य दिशा, S/W पर लागू होता है।

दक्षिण-पश्चिम — स्थिरता और पृथ्वी तत्व का केंद्र

वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा पृथ्वी तत्व की दिशा मानी गई है। यह घर की स्थिरता, सुरक्षा, परिपक्वता, नियंत्रण, अनुभव और धन की मजबूती का प्रतीक है। जिस प्रकार मटके का भार उसकी पेंदी पर होता है, उसी प्रकार घर की संपूर्ण ऊर्जा का भार नैऋत्य दिशा पर टिका होता है।

इसी कारण वास्तु में दक्षिण-पश्चिम को भारी, ऊँचा और स्थिर रखने की सलाह दी जाती है। इस दिशा में मास्टर बेडरूम, भारी निर्माण, मजबूत दीवारें या स्थिर तत्व शुभ माने जाते हैं। यदि यह दिशा संतुलित होती है, तो परिवार में स्थायित्व, आर्थिक मजबूती और मानसिक संतुलन बना रहता है।

लेकिन यदि इसी दिशा में कटाव, गड्ढा, अत्यधिक खुलापन, पानी या मुख्य द्वार बना दिया जाए, तो घर की ऊर्जा अस्थिर होने लगती है। धन आता है लेकिन टिकता नहीं, रिश्तों में स्थायित्व नहीं रहता, मानसिक तनाव बढ़ता है और जीवन में निर्णय क्षमता कमजोर होने लगती है। क्योंकि जिस दिशा का कार्य ऊर्जा को संभालना था, वहीं से ऊर्जा का रिसाव प्रारंभ हो जाता है।

उत्तर-पूर्व — ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवेश द्वार

अब मटके के ऊपरी भाग को देखिए। मटके का मुख ऊपर की ओर खुला होता है, जहां से वर्षा का जल उसमें प्रवेश करता है। यही प्रतीक वास्तु में उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण का है।

ईशान कोण जल तत्व, दिव्यता, ज्ञान, आध्यात्मिकता, प्रेरणा और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का क्षेत्र माना गया है। सूर्योदय की पहली किरणें, पृथ्वी का चुंबकीय प्रवाह और सूक्ष्म सकारात्मक ऊर्जा उत्तर और पूर्व दिशाओं से अधिक प्रभावी रूप में प्रवेश करती हैं। इसलिए वास्तु में उत्तर-पूर्व को खुला, स्वच्छ, हल्का और पवित्र रखने का विशेष महत्व बताया गया है।

जब घर का ईशान कोण संतुलित होता है, तब घर में सकारात्मकता, मानसिक शांति, अवसर, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यही कारण है कि मंदिर, ध्यान स्थान या जल तत्व उत्तर-पूर्व में शुभ माने जाते हैं।


north east south west vastu Stability Chart


क्यों उत्तर और पूर्व दिशा शुभ मानी जाती हैं?

वास्तु में उत्तर और पूर्व दिशा को शुभ इसलिए नहीं कहा गया क्योंकि यह केवल परंपरा है, बल्कि इसलिए क्योंकि यही दिशाएँ ऊर्जा के प्रवेश का माध्यम हैं।

यदि मटके का मुख सही दिशा में खुला हो, तो उसमें अमृत समान जल भरता रहेगा। लेकिन यदि वही मटका नीचे से टूटा हो, तो चाहे ऊपर से कितना भी जल डाला जाए, वह टिक नहीं पाएगा। यही कारण है कि वास्तु में केवल ऊर्जा को बुलाना पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि उसे स्थिर रखना भी उतना ही आवश्यक बताया गया है।

उत्तर और पूर्व दिशा ऊर्जा को ग्रहण करती हैं, जबकि दक्षिण और पश्चिम दिशा उस ऊर्जा को धारण करती हैं। और इन सबके बीच दक्षिण-पश्चिम पूरे भवन की “ऊर्जा नींव” के रूप में कार्य करता है।

वास्तु का वास्तविक विज्ञान

आज आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि पृथ्वी पर चुंबकीय तरंगें, गुरुत्वीय प्रभाव और कॉस्मिक रेडिएशन लगातार कार्य कर रहे हैं। हमारे प्राचीन वास्तु ऋषियों ने इन्हीं शक्तियों को अनुभव करके भवन निर्माण के नियम बनाए थे। इसलिए वास्तु केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति और ऊर्जा के नियमों के साथ सामंजस्य स्थापित करने का विज्ञान है।

जब किसी घर का उत्तर-पूर्व खुला और शुद्ध होता है तथा दक्षिण-पश्चिम मजबूत और स्थिर होता है, तब वह भवन केवल रहने का स्थान नहीं रह जाता, बल्कि वह सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और मानसिक संतुलन का केंद्र बन जाता है।

निष्कर्ष

धरती स्वयं एक विशाल ऊर्जा-पात्र है।
घर उसी धरती का एक छोटा रूप है।
और वास्तु उस ऊर्जा को सही दिशा से ग्रहण कर सही स्थान पर स्थिर करने की कला है।

यदि घर का ईशान कोण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का द्वार है, तो नैऋत्य उस ऊर्जा की सुरक्षा का आधार है।
यही संतुलन घर को केवल “मकान” से “सुख और समृद्धि के केंद्र” में परिवर्तित करता है।

प्रिय मित्रों मै आप का वास्तुमित्र आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा, मैने इस पोस्ट में संलग्न चित्र को केवल प्रतीकात्मक रूप में आप के सामने रखा है, जो सिर्फ उदाहरण के लिए यह दिखाता है कि किस प्रकार पृथ्वी पर ब्रह्मांड से आने वाली ईशान्य दिशा की ऊर्जा S/W दिशा मे रखे एक मटके रूपी पात्र मे संचित होती है, अतः इस चित्र से यह विषय सरलता से समझने हेतु हि प्रयोग करें, इसे साइंस के मापदंडों पे न परखें।

प्रिय मित्रों मैने इस पोस्ट को निरंतर अध्ययन-अध्यापन, व अपने कार्य अनुभवों के आधार पर तैयार किया है, हम सभी जानते हैं कि वास्तुशास्त्र में बहुत मत-मतांतर हैं, अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, अपने व्यवहार में उतारें। कुतर्क और बिना मतलब की बहस न करें। यह मेरी अपनी इच्छा है कि वास्तु विषय को जिस सरल अंदाज से मै समझने का प्रयास करता हूं उसी सरल अंदाज में समाज से साझा करूँ, जिससे लोग वास्तु को लेकर भ्रम और डर में न पड़कर खुद अपने घर को सुधार सकें। अगर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने हेतु आप का धन्यवाद।  

मित्रों अगर आप को मेरी यह पोस्ट पसंद आई हो तो एक लाइक के साथ एक प्यारा सा कमेंट जरूर करें जिससे मुझे इसी प्रकार की और वास्तु की पोस्ट लिखने की प्रेरणा प्राप्त हो। 

सोमवार, 4 मई 2026

Vastushastra aur Surya ka Sambandh वास्तुशास्त्र और सूर्य का संबंध क्या है?

वास्तुशास्त्र और सूर्य का संबंध क्या है?


 हर दिन सूर्य आपके घर से दिखता है सवाल ये है कि क्या वो आपके घर या जीवन में प्रवेश कर पा रहा है? 

vastu me surya ka mahatva


आइए जानते हैं.. 
जब हम किसी घर या प्लॉट को केवल ईंट-पत्थर का ढांचा मानते हैं, तब हम उसकी वास्तविक शक्ति को नजर अंदाज कर देते हैं। वास्तव में, घर एक जीवंत ऊर्जा का केंद्र होता है और इस ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य का दैनिक भ्रमण हि है। वास्तुशास्त्र इसी प्राकृतिक ऊर्जा प्रवाह को समझकर जीवन को संतुलित करने की एक गहन प्रणाली प्रस्तुत करता है। यदि एक प्लॉट को केंद्र में रखा जाए और उसमें रहने वाले व्यक्ति की ऊर्जा लगभग (उदाहरण- के लिए मान लें तो) 6.300 हर्ट्ज मानी जाए, तो सूर्य की दिनभर की गति केवल आकाशीय परिवर्तन नहीं बल्कि ऊर्जा के क्रमिक उतार-चढ़ाव का एक वैज्ञानिक आधार बन जाती है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य पूर्व दिशा (East) मे होता है

प्रातःकाल जब सूर्य पूर्व (East) दिशा में उदित होता है, उस समय उसकी ऊर्जा लगभग 4.100 हर्ट्ज होती है, जो मनुष्य की ऊर्जा से कम होती है। यही कारण है कि सुबह 6 am से 8 am के बीच सूर्य की किरणें कोमल, शांत और जीवनदायिनी प्रतीत होती हैं। इस समय व्यक्ति सूर्य को खुली आंखों से देख सकता है और उसकी ऊर्जा को सहज रूप से अनुभव कर सकता है। यह काल मानसिक शुद्धि, ध्यान और प्राणायाम के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। वास्तुशास्त्र में भी पूर्व दिशा को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख द्वार है। इसी लिए वास्तु में पूर्व दिशा को हल्का, साफ-सुथरा और मुख्य द्वार बहुत शुभ माना गया है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य अग्नि कोण (S/E) मे होता है

आगे जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से दक्षिण-पूर्व (S/E) अर्थात अग्नि कोण की ओर बढ़ता है, उसकी ऊर्जा में वृद्धि होने लगती है और वह अल्ट्रावायलेट किरणों के रूप में परिवर्तित होकर लगभग 6.300 हर्ट्ज तक पहुंच जाती है , जो मनुष्य की ऊर्जा के समांतर हो जाती है। यह समय 9 am से 11 am तक का होता है, इसी समय में व्यक्ति पूरी तरह सक्रिय, चुस्त-दुरुस्त, ताजगी से भरपूर होकर हर कार्य के लिए तैयार रहता है। सामान्यतः लोग इस समय में अपने दैनिक कार्यों की शुरुआत करते हैं, अपने ऑफिस अथवा व्यापार के लिए निकलते हैं, और जीवन में उत्साह तथा उत्पादकता का अनुभव करते हैं। वास्तु के अनुसार अग्नि कोण को ऊर्जा और क्रियाशीलता का क्षेत्र माना गया है, इसलिए इस दिशा में रसोई या अग्नि से संबंधित कार्यों का स्थान होना शुभ माना जाता है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य दक्षिण दिशा (South) मे होता है

दोपहर के समय 12 से 2 pm के बीच जब सूर्य दक्षिण दिशा में पहुंचता है, तब उसकी ऊर्जा अपने चरम पर होती है और लगभग 7.100 हर्ट्ज तक पहुंच जाती है, जो मनुष्य की ऊर्जा से बहुत अधिक होती है। यह अवस्था सूर्य के प्रचंड और प्रभावशाली रूप को दर्शाती है, और यह आसमान में एकदम से हमारे सर के ऊपर होता है, इसे हम एक पिता के समान गरिमापूर्ण, अनुशासनात्मक और प्रभाव शक्ति का प्रतीक मान सकते है। विशेषकर गर्मियों में इस तीव्र ऊर्जा के कारण लोग प्रचंड धूप से बचने का प्रयास करते है और अधिकतर समय घर के भीतर या छाँव मे रहना पसंद करते हैं। वास्तु के अनुसार शायद इसलिए ही दक्षिण दिशा को स्थिर और भारी और ऊंचा रखने के लिए कहा गया है, और दक्षिण दिशा मे ऊंचे पेड़ लगाने की बात वास्तु मे की जाती है, जिससे घर में सूर्य की इस प्रबल ऊर्जा को संतुलित किया जा सके।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य नैऋत्य दिशा (S/W) मे होता है

इसके पश्चात सूर्य 3 pm से 5 pm के मध्य, धीरे-धीरे नैऋत्य दिशा S/W, की ओर अग्रसर होता है, जहां उसकी ऊर्जा इन्फ्रारेड किरणों में परिवर्तित हो जाती है। जहां ताप वैसे ही रहता है पर प्रकाश धीरे धीरे कम हो रहा होता है, इस अवस्था में ऊर्जा की तीव्रता कम होकर स्थिरता की ओर बढ़ती है और इसका प्रभाव व्यक्ति के शरीर और मन पर थकान के रूप में दिखाई देता है। यह वही समय होता है जब व्यक्ति अपने दिनभर के कार्यों से निवृत्त होकर घर लौटने की तरफ और विश्राम की ओर अग्रसर होता है। वास्तुशास्त्र में नैऋत्य दिशा को स्थिरता, सुरक्षा और नियंत्रण का स्थान माना गया है, इसलिए यहां मास्टर बेडरूम का होना उपयुक्त समझा जाता है। इस दिशा को जितना अधिक भारी और ऊंचा किया जाता है, घर या अन्य निर्माण इस प्रकार की व्यवस्था की वजह से बहुत लाभ प्राप्त करता है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य पश्चिम दिशा (West) मे होता है

अब जब 6 बजे के आस-पास सूर्यास्त हो जाता है ( गर्मियों को छोड़कर क्योंकि अक्सर गर्मियों में सात या साढ़ेसात बजे तक सूर्यास्त होता है ) सो 7/8 बजे के बाद रात्रि होते ही धरती पर चंद्रमा की ऊर्जा सक्रिय हो जाती है, जो शीतल और शांत होती है, यह ऊर्जा मन और तन की शक्ति को पुनर्जीवित करने वाली होती है। अतः रात्रि में शयन के पश्चात यह शरीर और मन को पुनः संतुलित करने का अवसर प्रदान करती है, जिससे व्यक्ति अगले दिन सुबह फिर से ऊर्जावान होकर अपने कार्य-व्यापार में नई ताजगी के साथ पुनः प्रवेश करने के लिए तैयार हो सके। वास्तु के अनुसार शयनकक्ष की सही दिशा और व्यवस्था इस प्राकृतिक ऊर्जा को प्रभावी ढंग से ग्रहण करने में सहायक होती है।

इस प्रकार सूर्य का दैनिक भ्रमण यह स्पष्ट करता है कि वास्तुशास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं बल्कि ऊर्जा के संतुलन का विज्ञान है। जब घर या प्लॉट को इस प्राकृतिक ऊर्जा प्रवाह के अनुरूप बनाया जाता है, तब व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बना रहता है। यही वास्तु का मूल सिद्धांत है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके जीवन को अधिक संतुलित, स्वस्थ और समृद्ध बनाया जा सकता है।

प्रिय मित्रों मै आप का वास्तुमित्र आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा, मैने इस पोस्ट में संलग्न चित्र को केवल प्रतीकात्मक रूप में आप के सामने रखा है, जो सिर्फ यह दिखाता है कि किस प्रकार सूर्य अपने भ्रमण पथ से पृथ्वी पर अपना असर डालता है, अतः इस चित्र से यह विषय सरलता से समझने हेतु हि प्रयोग करें, इसे साइंस के मापदंडों पे न परखें।

प्रिय मित्रों मैने इस पोस्ट को निरंतर अध्ययन-अध्यापन, व अपने कार्य अनुभवों के आधार पर तैयार किया है, हम सभी जानते हैं कि वास्तुशास्त्र में बहुत मत-मतांतर हैं, अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, अपने व्यवहार में उतारें। कुतर्क और बिना मतलब की बहस न करें। यह मेरी अपनी इच्छा है कि वास्तु विषय को जिस सरल अंदाज से मै समझने का प्रयास करता हूं उसी सरल अंदाज में समाज से साझा करूँ, जिससे लोग वास्तु को लेकर भ्रम और डर में न पड़कर खुद अपने घर को सुधार सकें। अगर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने हेतु आप का धन्यवाद।  

मित्रों अगर आप को मेरी यह पोस्ट पसंद आई हो तो एक लाइक के साथ एक प्यारा सा कमेंट जरूर करें जिससे मुझे इसी प्रकार की और वास्तु की पोस्ट लिखने की प्रेरणा प्राप्त हो। 

रविवार, 10 जनवरी 2021

toilet ki disha vastu ke anusar । वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा

 toilet ki disha vastu ke anusar । वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा 

​"लाख कोशिशों के बाद भी घर में पैसा नहीं टिक रहा या कोई न कोई बीमार रहता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, इसका कारण आपके शौचालय की गलत स्थिति हो सकती है। जानिए कौन सी दिशा आपके लिए वरदान है और कौन सी अभिशाप।"

आज के समय में बन रहे ज्यादातर घरों में स्थान की कमी अथवा शहरी संस्कृति और शास्त्रों की अनभिज्ञता के कारण शौचालय का निर्माण गलत दिशा में हो जाता है जिससे उस घर मे रहने वाले परिवार को स्वास्थ्य और धन संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अतः जब भी घर में शौचालय का निर्माण कराया जाए तो उसे वास्तु के अनुसार ही करना चाहिए, नहीं तो ये घर में यही शौचालय negative energy नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का कारण बनते हैं। इनकी गलत दिशा के कारण परिवार के लोगों का स्वास्थ्य खराब बना रह सकता है। तो आइए मित्रों जानते हैं कि शौचालय निर्माण में किन मुख्य बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है?


शौचालय के उपयुक्त दिशा 

सर्वप्रथम वस्तुशात्र के अनुसार घर में शौचालय के लिए सबसे अच्छा स्थान SSW अथवा WNW एवं ESE का होता है। घर के मध्य में शौचालय नहीं बनाया जाना चाहिए यह घर (भवन) का ब्रह्म स्थल होता है यहां वास्तु पुरुष की नाभि होती है, यहां बना शौचालय स्वास्थ्य के साथ जीवन में संघर्ष की शक्ति को समाप्त करता है। ईशान अथवा नैऋत्य कोण में शौचालय का निर्माण निषिद्ध किया गया है। ईशान कोण में शौचालय होने से गृह-क्लेश में वृद्धि होती है साथ ही कैंसर जैसा भयंकर रोग होने कि संभावना रहिती है, घर के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, नए और शुभ विचार नहीं आते, घर को आर्थिक संकटों का सामना निरंतर करना पड़ता है तथा सारे घर में negative energy अपवित्रता का वातावरण हमेशा बना रहता है। वहीं नैऋत्य कोण में शौचालय बनाने से मानसिक अस्थिरता, संबंधों में खटास, प्रगति में बाधा, नजर दोष तथा शारीरिक कष्टों में वृद्धि होती है।

शौचालय के अंदर की व्यवस्था 

यदि शौचालय कमरे के साथ ही बनाना हो तो इसे कमरे के वायव्य कोण में बनाना चाहिए। नैऋत्य कोण में शौचालय निर्माण सर्वथा निषिद्ध है। शौचालय में ताजी हवा तथा प्रकाश के आगमन की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। शौचालय का दरवाजा पूर्व अथवा अग्नि कोण में होना चाहिए तथा टॉयलेट सीट इस प्रकार फिट होनी चाहिए कि सीट पर बैठते समय व्यक्ति का मुख दक्षिण अथवा उत्तर दिशा की ओर रहे, भूलकर भी मुख पूर्व अथवा पश्चिम दिशा की ओर नहीं करना चाहिए।

शौचालय में पानी की व्यवस्था पूर्व अथवा उत्तर दिशा में होनी चाहिए, अगर वाशबेसिन भी शौचालय में लगाए जाने हैं तो वह भी पूर्व अथवा उत्तर दिशा में ही लगाने चाहिए। वैसे शौचालय में दर्पण का प्रयोग वर्जित है फिर भी अगर लगाना है तो उसे भी उत्तरी और पूर्वी दीवाल पर ही लगाएं। 

वेंटिलेशन, एग्जॉस्ट एवं ड्रेनेज की व्यवस्था 

शौचालय में शुद्ध वायु के आवागमन के लिए खिड़की या वेंटिलेशन उत्तर या पूर्व दिशा में होना उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इन दिशाओं से प्राकृतिक प्रकाश एवं शुद्ध वायु का प्रवेश होता है।

एग्जॉस्ट फैन लगाने के लिए वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि यह दिशा वायु तत्व की होती है और दूषित वायु को बाहर निकालने में सहायक होती है। वैकल्पिक रूप में, यदि वायव्य कोण उपलब्ध न हो, तो एग्जॉस्ट फैन उत्तर या पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है।

जल निकासी (ड्रेनेज) का ढाल इस प्रकार रखा जाए कि पानी का प्रवाह उत्तर, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रहे। इससे जल का उचित प्रवाह बना रहता है तथा स्थान स्वच्छ बना रहता है।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश 

शौचालय कभी भी रसोई घर के सामने ना बनाएं अगर शौचालय एवं स्नानघर इकट्ठा बनाना है तो यह पश्चिम वायव्य अथवा पूर्व आग्नेय दिशा में होना चाहिए इसमें लगे शावर व नल आदि ईशान कोण में तथा टॉयलेट की सीट वायव्य कोण में होनी चाहिए यह पश्चिम दिशा में भी सुविधा अनुसार रखी जा सकती है वाशबेसिन की स्थिति पश्चिम में होनी चाहिए।

शौचालय के लिए वास्तु टिप्स toilet vastu remedies

अगर किसी कारण वश शौचालय का निर्माण गलत हुआ है तो निम्नलिखित कुछ उपाय करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा को आने से रोका जा सकता है।

*अगर पूर्व दिशा और दक्षिण दिशा के मध्य स्थान तक शौचालय की खिड़की खुलती हो तो उस खिड़की में 3 क्रिस्टल की बॉल लाल रिबन में बांधकर लटका दें जब सूर्य की रश्मियां उस क्रिस्टल बॉल से टकराकर शौचालय में पड़ेंगी तो वहां की नकारात्मक ऊर्जा जल जाएगी।

* शौचालय की दुर्गंध घर में बिल्कुल न फैले इसका विशेष ध्यान रखें, इसके लिए सुगंधित चीजों का छिड़काव आदि करें।

* शौचालय में किसी सूखे स्थान पर समुद्री नमक किसी कांच की कटोरी आदि में भरकर रखे और सप्ताह में एक बार उसी कमोड में डालकर फ्लश कर दें तथा वापस नया नमक रख दें।

नोट- इस तरह के कुछ उपाय करने से बहोत हद तक सकारात्मक लाभ उठाया जा सकता है, अधिक जानकारी के लिए अपने वास्तु सलाहकार की मदत लें।


मित्रों यह निरंतर कार्य अनुभव के आधार पर लिखा आलेख है, वास्तु को लेकर बहुत मत-मतांतर हैं अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, कुतर्क और बिना मतलब की बहस ना करें। मेरा यह प्रयास, समाज को वास्तु विषय कि सरल जानकारी साझा करना है, जिससे लोग वास्तु को लेकर भ्रम और डर से बाहर आकर खुद अपने घर को सुधार सकें। अगर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद 

नोट — उक्त उपाय करने से बहुत हद तक सकारात्मक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए अपने वास्तु सलाहकार का मार्गदर्शन प्राप्त करें।

शनिवार, 2 मई 2020

uday prakash sharma । आचार्य उदय प्रकाश शर्मा

uday prakash sharma । उदय प्रकाश शर्मा

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रिसर्च एस्ट्रो इंडिया के सौजन्यसे 


वैदिक वास्तु एवं ज्योतिष के क्षेत्र में आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा ने अपने अनुभव और ज्ञान से देश भर मे अपनी एक अलग पहचान बनाई है। करीब 17 वर्षों से भी ज्यादा अनुभव रखने वाले उदय प्रकाश शर्मा को ज्योतिष एवं वास्तु शात्र का ज्ञान विरासत में अपने पिता पं. श्री राम कृपाल शर्मा से प्राप्त हुआ। आगे चलकर अपनी  शिक्षा पूरी करने के बाद आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा ने ज्योतिष एवं वास्तुशात्र  के दुर्लभ एवं गूढ़ रहस्य अपने पूज्य गुरुदेव डॉक्टर नागेन्द्र पांडे जी ( पूर्व. कुलपति संपूर्णानद संस्कृत विश्वविद्यालय / अध्यक्ष. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास/ अध्यक्ष.  ज्योतिष विज्ञान समिति वाराणसी ) से प्राप्त किया, आप को गुरुदेव की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त रहा। साथ ही आप ने  आध्यात्मिक-चक्र,  मेडीटेशन एवं प्राणिक हीलिंग की शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही गुरु के सानिध्य मे उनका प्रयोगात्मक ज्ञान भी ग्रहण कीया। 


आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा के उपलब्धियों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। क्यूँ की आप ने मुंबई महाराष्ट्र मे अपने जीवन का  बहुत समय बिताया हैं, अतः आप ने गुरुदेव की कृपा और आशीर्वाद से मुंबई घाटकोपर महाराष्ट्र राज्य में स्थित के. जे सोमैया कॉलेज ऑफआर्ट्स एंड कॉमर्स मे कला एवं संस्कृत विभाग से ज्योतिष पाठ्यक्रम एवं पारंपरिक व वैदिक वास्तु शात्र की शिक्षा ली तथा वहा भी इन विषयो का गहन अध्ययन किया। साथ ही विश्व प्रसिद्ध GEO VASTU के संस्थापक एवं इंडस्ट्रियल वास्तु मे महारत रखने वाले, वास्तुविद. डॉ. राजेन्द्र के. जैन द्वारा वास्तु मे भूमि एनर्जी, भूगर्भ विज्ञान, जिओपैथिक ऊर्जा, एवं औरा स्कैन व डाउजिग का आधुनिक ज्ञान प्राप्त किया, व उनके साथ लंबे समय तक वास्तु विजिट एवं वास्तु समाधान के अंतर्गत  कार्य करके आधुनिक वास्तु की प्रयोगात्मक विधि का अनुभव भी प्राप्त किया। 


साथ ही आप ने लंबे समय तक मुंबई महारष्ट्र के ही एक प्रसिद्ध ज्योतिष शिक्षण संस्थान (ब्रह्मांड ज्योतिष संस्थान) मे भी इन्ही विषयों की शिक्षा ली और और अपने वरिष्ठ आचार्यों द्वारा प्रेरित करने पर ईसी  संस्थान  में लंबे समय तक ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के विद्यार्थियों को ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की शिक्षा भी प्रदान की। आप ज्योतिष, वास्तुशास्त्र  एवं आध्यात्मिक चक्र और मेडीटेशन के विषय पर निरंतर शोध परख आलेख लिखते रहते हैं। जो देश की कई प्रमुख  पत्र-पत्रिकओं में छपते रहते हैं। आप अपने आलेख/ब्लॉग udayvastu.com पे प्रकाशित भी करते रहते  है।


आचार्य उदय प्रकाश जी कहते हैं कि आज विज्ञान के  युग में  भी वास्तु और ज्योतिष शास्त्र का हमारे जीवन पर बहुत ही गहरा और महत्वपूर्ण प्रभाव है। ये दोनों शास्त्र हमें जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने के लिए हर क्षण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह पृथ्वी के मूलभूत पञ्चतत्व, सूर्य रश्मि, पृथ्वी के  घूर्णन बल और गति, तथा ग्रह पिंडों के पड़ने वाले प्रभाव का क्या असर मनुष्य एवं जड़-चेतन पर पड़ता है उसको दर्शाते हैं, और किस तरह से मनुष्य इन प्रकृतिक ऊर्जाओं के साथ समन्वय स्थापित कर के अपना जीवन सरल बनाए उसको प्रतिपादित करते हैं। 


अगर हम वास्तु शास्त्र की बात करें तो यह  शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो हमें बताता है कि कैसे हमारे आसपास के वातावरण को संतुलित और सकारात्मक बनाया जा सकता है। यह शास्त्र हमें प्लॉट, घर, ऑफिस, फैक्ट्री, दुकान अथवा किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जिससे हमें सुख, समृद्धि और शांति मिल सके।  वहीं अगर हम ज्योतिष शास्त्र को जाने तो यह भी एक  प्राचीन ज्ञान है जो हमें ग्रह, नक्षत्रों और तारों की चाल के माध्यम से जीवन को दिशा देने का प्रयास करता है। यह शास्त्र हमें हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि शिक्षा, कैरियर, संबंध, स्वास्थ्य और धन, के बारे में जानकारी प्रदान करता है। अतः हमारे लिए इन दोनों शास्त्रों का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने जीवन को पूरी तरह से इनके अनुसार चलाना चाहिए। हमें इन शास्त्रों को एक मार्गदर्शक के रूप में लेना चाहिए और अपने जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने के लिए इनका उपयोग करना चाहिए। 


जब आवश्यक लगे तब अपनी जन्म कुंडली  अपने घर, प्लॉट/फैक्ट्री/ऑफिस/दुकान आदि की किसी कुशल आचार्य (जो इन विषयों को ठीक से जाननने  वाला और अनुभवी  हो) से जांच करवाकर उनके निर्देश अनुसार बदलाव करना चाहिए, जैसे कि घर के मुख्य द्वार की दिशा को जानकर उसका वास्तुसम्मत ध्यान रखना, घर में पौधे लगाना, रगों द्वारा ऊर्जा को बढ़ाना, निर्माण से पूर्व भूमि/प्लॉट की जिओपैथिक ऊर्जा की जांच करवाना, जन्मकुंडली के अनुसार अपने ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने हेतु रत्न-रुद्राक्ष  और क्रिस्टल का प्रयोग करना , भूमि की ऊर्जा बढ़ाने के लिए ब्रह्मनाभी का निर्माण करना, पूजा-मंत्र-जप एवं हवन करके अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध एवं साफ रखना, हमें बहुत ही सकारात्मक परिणाम दे सकता हैं ।


आज देश-विदेश से हजारों लोग आचार्य उदय प्रकाश शर्मा जी द्वारा बताये गए ज्योतिषीय एवं वास्तु उपायों से लाभवंतित हो रहे हैं। इनकी साधारण भाषाशैली की वजह से लोग इनकी बाते आसानी से समझ पाते हैं। यही वजह है कि आज विश्व भर से हजारों लोग,जो अपनी जिन्दगी से निराश हो चुके है, वो उदय प्रकाश शर्मा जी से संपर्क करते हैं, और उनके परामर्श द्वारा अपने जीवन में खुशहाली ला रहे हैं। लोगो की सेवाओं को लेकर आचार्य जी ज़्यादातर देश के कई शहरो के भ्रमण/विजिट  पर रहते हैं। फोन के माध्यम से देश-विदेश के लोग भी आचार्य जी से अपनी जिज्ञासा का समाधान जानते रहते हैं। आप का मोबाईल नंबर +91 9867909898 है। आचार्य उदय प्रकाश शर्मा से आप विभिन्न सेवाओ के लिये विशेष रूप से संपर्क कर सकते है-


वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली का अध्ययन, घर/ऑफिस/फैक्ट्री/दुकान/शोरूम/प्लॉट-भूमि आदि के लिए वास्तु सलाह, प्रश्नकुंडली , मुहूर्त-विचार, वर-वधु कुंडली मेलापक, रुद्राक्ष एवं रत्न सलाह, चक्र एवं प्रणिक उपचार।

आप को औद्योगिक इकाइयों अर्थात इंडस्ट्रीयल वास्तु मे विशेष महारत प्राप्त है




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Proficient Vedic Architectural Science, Gemstone and Crystal Advisor, Trainer for Aura Scanning, Healing and Balancing Chakras, Meditational Spiritual & Alternative Healers, Vastu Urja, Vastu Enargy, Vastu Consultant, Best Vastu Consultant In India, Best Vastu Consultant In Varanasi Uttar Pradesh, Best Vastu Consultant In Mumbai Maharashtra 


आप ने चक्र साधना के ऊपर एक ई-बुक भी लिखी है । जिसे देखने के लिए आप इस लिक पे जाये 
सात चक्रों का रहस्य एक परिचय

Uday Prakash Sharma


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उदय प्रकाश शर्मा 

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