ॐ श्री मार्कंडेय महादेवाय नमः

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्यवेत्।
सब सुखी हों । सभी निरोग हों । सब कल्याण को देखें । किसी को लेसमात्र दुःख न हो ।

Pandit Uday Prakash
Astrologer, Vastu Consultant, Spiritual & Alternative Healers
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गुरुवार, 7 जनवरी 2021

mangalwar ko janme log । मंगलवार को जन्मे लोग

 mangalwar ko janme log । मंगलवार को जन्मे लोग 


अक्सर मुझे ऐसे लोग मिलते हैं जो कहते हैं पंडित जी मेरा फलां दिन का जन्म हुआ है मेरे बारे में कुछ बताइए, मुझे मेरी जन्म तिथि, दिनांक, सन, समय कुछ भी ज्ञात नहीं बस यही दिन पता है कि मेरा जन्म मंगलवार को हुआ है । तो यह आर्टिकल उन्हीं लोगों के लिए  है।


मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव । Tuesday Birth

मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति गर्म होती है। यह पराक्रमी, वीर, साहसी एवं संग्राम में  विजय प्राप्त करने वाले  होते है। इसकी बुद्धि विशेष अच्छी नहीं होती, इसी से यह बौद्धिक  कार्यों से अलग रहना पसंद करते है, परन्तु वीरता के कार्यों में आगे बढ़-चढ़ कर भाग लेने वाले होते है। प्रायः यह सांवले रंग के होते हैं पर इनमे आकर्षण शक्ति बहुत गजब की होती है जिसकी वजह से विपरीत लिंगी इनकी तरफ बहुत जल्दी आकर्षित होते हैं । 

यह लोग अपने शरीर को ही सब कुछ समझते हैं जैसे आज के समय में फ़िल्म अभिनेता, अभिनेत्री, जिम्नास्टिक आदि जो अपने शरीर को ही अपने कर्म का साधन बना लेते हैं, यह लोग रक्षा विभाग, पुलिस, आर्मी,  डाक्टरी शल्य चिकित्सा (surgery), खेल -कूद आदि में भी अग्रणी होते हैं। अपनी वाक्पटुता से यह लोगों को  सहज ही आकर्षित कर लेते हैं। इनको रक्त संबंधी रिश्तों जैसे- चाचा, बुआ, बहन आदि से विशेष सहयोग प्राप्त होता है। यह दुश्मनी, कर्जा, बीमारी, बदला आदि  को ज्यादा महत्त्व देते हैं और इनसे सामना करने हेतु अधिक धन इकठ्ठा करते हैं।

जमीनी संपत्ति भी यह लोग खड़ी करते हैं। यह अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं। यह स्कूल आदि में पुस्तकों से सिखने के बजाय जीवन में कार्य कर के सिखने में अधिक विश्वास  करते हैं। यह जवानी के दिनों में कामुक भी बहुत होते हैं, इनके लिए प्रायः प्यार-मुहब्बत करना अक्सर मुसीबत बन जाता है, यह शंकालु भी बहोत होते हैं, यह अपनी पत्नी का लोगों से ज्यादा मिलना जुलना पसंद नहीं करते, इनमे असुरक्षा की भावना भी अधिक होती है।

इन्हें  2, 32 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 74 वर्ष की होती है।

मंगलवार के दिन जन्म लेने वालों के लिए उपाय 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी मंगल होते हैं अतः अपने चहुमुखी कल्याण हेतु मंगल देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा संकट मोचन हनुमान जी व भगवान कार्तिकेय की पूजा-आराधना इन्हें करनी चाहिए साथ ही अपने छोटे भाई बहनों का उचित मार्गदर्शन, सहयोग व उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। उनके उदंडता पे क्रोधित न होकर छमाशीलता अपनाना चाहिए।

बुधवार, 6 जनवरी 2021

vrishabh lagn ke liye ratna । वृषभ लग्न के लिए रत्न

vrishabh lagn ke liye ratna । वृषभ लग्न के लिए रत्न 

vrishabh lagn ke liye ratna । वृषभ लग्न के लिए रत्न
vrishabh lagna gem stone वृषभ लग्न के लिए रत्न 


रत्न का चुनाव सामान्यतः जन्मकुण्डली में “भाग्य भाव” जिसे कुंडली में नवम भाव भी कहते हैं, का स्वामी भाग्येश कहलाता है । भगयेश का रत्न पहनने से भाग्य प्रबल होता है । यदि भाग्येश के साथ केंद्र ( 1, 4, 7, 10 ) तथा त्रिकोण का स्वामी शुभ योग बनाकर कुंडली में बलि स्थिति में हो तो, ऐसे व्यक्ति के लिए भाग्य के स्वामी ग्रह का रत्न धारण करना उच्च स्तरीय सफलता दिलाता है। यदि भाग्य का स्वामी निर्बल हो तथा उसका जन्मकुंडली के अन्य शुभ एवं योगकारक ग्रहों से कोई सम्बन्ध नहीं हो, तो ऐसे व्यक्ति को भाग्येश का रत्न उतनी सफलता नहीं देता । ऐसी स्थिति में लग्नेश या पंचमेश ग्रह का उनकी स्थिति के अनुसार पहनने से जीवन में सफलता मिलती है। 

रत्न विज्ञान ज्योतिष


रत्नों का चुनाव करने में लग्न की स्थिति विशेष महत्वपूर्ण होती है। विभिन्न लग्नो के लिए कौन- कौन से रत्न शुभ या अशुभ होते हैं । जानने के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। पं. उदय प्रकाश शर्मा

शुभ रत्न का चुनाव करते समय यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए की जिस ग्रह के रत्न को आप धारण करने वाले है, वह जन्मकुण्डली में शुभ भावों का स्वामी हो, यदि कोई ग्रह अशुभ भावों का स्वामी होकर आप को पीड़ित कर रहा हो, तो उसकी शांति हेतु मन्त्र जप, पूजा-अनुष्ठान आदि करवाना लाभप्रद होता है।


वृषभ लग्न में रत्न का चुनाव 

which stone is suitable for vrishabha rashi and lagna


यह सत्य है की लग्न ही व्यक्तित्व का परिचायक होता है, प्रायः वृषभ लग्न के जातक विश्वसनीय और व्यवहारिक होते है जिसके कारण यह अपने नौकरी/व्यवसाय में अच्छी तरह से सफल होते हैं। साथ ही यह कामुक व्यक्ति भी  होते है तथा हर क्षेत्र में भौतिक सुख के लिए प्रयत्नशील रहते हैं, यह बहुत उद्यमी भी होते है और अपने कार्यों को अपने अनुसार निश्चित समय में पूरा करते है। इस लग्न के लोग अपने मूल्य और सिद्धांत के प्रति काफी अडिग रहते हैं जिससे इनके दृष्टिकोण को बदलना आसान बिलकुल नहीं होता है। आइये जानते हैं कि इस लग्न के जातकों को कौन कौन सा रत्न धारण करना चाहिए और कौन से रत्न से परहेज करना चाहिए?


वृषभ लग्न में सूर्य रत्न माणिक्य  Ruby

वृषभ लग्न की कुंडली में सूर्य चतुर्थ भाव का स्वामी होता है। अतः सूर्य के निर्बल होने के कारण भूमि-संपत्ति, गाड़ी, मकान आदि के मामले में कमी रहेगी इस लिए सूर्य रत्न माणिक्य धारण करना लाभप्रद होगा पर इसे तभी धारण करें जब सूर्य कुंडली में 1, 2, 4, 5, 10, 11,  स्थानों में स्थित हो, पर हाँ अपने ज्योतिषी से परामर्श अवश्य ले लें। अगर सूर्य 3, 6, 7, 8, 9 स्थान में हो तो माणिक्य बिलकुल भी धारण न करें। कुंडली के बारहवें भाव में यह उच्च का होता है ऐसे में माणिक्य धारण करने से खर्चे बढ़ जायेंगे पर सुविधाएँ भी ऊँचे दर्जे की मिलेंगी।


वृषभ लग्न में चन्द्र रत्न मोती Pearl

वृषभ लग्न में चन्द्रमा तीसरे भाव का स्वामी हो जाता है और साथ ही यह इस लग्न के स्वामी शुक्र का शत्रु भी है अतः वृषभ लग्न में मोती धारण करना कुछ खास लाभदायक नहीं होता। हाँ अगर चन्द्रमा की महादशा- अन्तर्दशा चल रही हो और यह कुंडली में 1, 3, 9, 11 स्थानों में हो तो मोती धारण किया जा सकता है पर अपने ज्योतिषी से परामर्श अवश्य ले लें । इसके अतिरिक्त चंद्रमा अन्य भावों में स्थित हो तो मोती बिल्कुल भी धारण न करें बल्कि इसकी पूजा करें।


वृषभ लग्न में मंगल रत्न मूंगा Coral

इस लग्न में मंगल सातवें  एवं बारहवें भाव का स्वामी होता है, ज्योतिष में बारहवें भाव का स्वामी अपनी दूसरी राशी का फल देता है ऐसा ऋषि परासर ने कहा है अतः मंगल यहाँ सातवें भाव का फल करेगा, पर इसे केंद्राधिपति दोष भी लग जायेगा, अतः यह वृषभ लग्न के लिए तटस्थ हो जायेगा अर्थात यह न अधिक बुरा होगा न अधिक शुभ,अगर इसकी दशा अन्तर्दशा चल रही हो और यह कुंडली के 1,7, 9, 10, 11 वें भाव में स्थित हो तो अपने ज्योतिषी से सलाह लेकर मूंगा रत्न धारण कर सकते हैं अन्यथा इस लग्न वाले जातक मूंगा धारण न करें तो उचित है।


वृषभ लग्न में बुध रत्न पन्ना Emerald

इस लग्न में बुध लग्नेश शुक्र का मित्र होता है तथा कुंडली के दो शुभ भावों दुसरे एवं पांचवें का स्वामी होकर धनेश और त्रिकोणपति भी बनता है अगर वृषभ लग्न में बुध रत्न पन्ना धारण किया जाये तो  यह खूब धन-धान्य, संतान, कुटुंब, विद्या-बुद्धि, उच्च शिक्षा, प्रभावशाली वाणी, मंत्री पद आदि देने में जातक की सहायता करता है। अतः जब यह कुंडली के 1, 2,5, 9, 10, भावों में हो तो पन्ना रत्न धारण करना शुभ होता है। अगर बुध 3,4, 6,7,8,11, 12 वें भाव में हो पन्ना धारण न करें, ऐसी स्थिति में अपने ज्योतिषी से सलाह अवस्य लें ।


वृषभ लग्न में गुरु रत्न पुखराज  Yello Topaz

इस लग्न में देवगुरु वृहस्पति दो अशुभ भाव आठवें एवं ग्यारहवें के स्वामी होते हैं, ज्योतिष अनुभव के आधार पर इस लग्न के लिए गुरु शुभ नहीं होते, यह वृषभ लग्न के स्वामी शुक्र के शत्रु भी हैं, फिर भी अगर वृहस्पति की महादशा अन्तर्दशा हो और यह कुंडली के 2, 4, 5, 9 भाव में स्थित हों तो अपने ज्योतिषी से सलाह लेकर ऐसा पुखराज धारण करें जिसमे पीलापन न के बराबर हो। अन्य भावों में स्थित होने पर पुखराज धारण नहीं करना चाहिए । 


वृषभ लग्न में शुक्र रत्न हिरा Daimond अथवा ओपल Opal

इस लग्न में शुक्र लग्न और छठे भाव के स्वामी हो जाते हैं और इनकी मूल त्रिकोण राशी तुला छठे भाव में अति है ऐसे में शुक्र अपनी मूल त्रिकोण राशी का फल अधिक करेंगे जो बीमारी, शत्रुता, चोट, कर्जा आदि की हो जाएगी ऐसे में हिरा पहनने से पहले बहुत सावधानी बरतें व अपने ज्योतिषी से सलाह अवश्य ले लें, अगर शुक्र की दशा-अन्तर्दशा हो और शुक्र कुंडली के 1, 2, 4, 7, 9, 10, 11, भावों में हो तभी हिरा अथवा ओपल रत्न धारण करें अन्य भावों में होने पर इसकी पूजा करें रत्न न धारण करें। 


वृषभ लग्न में शनि रत्न नीलम  Blue Sapphire

इस लग्न में शनि राजयोग कारक होते हैं, इनकी दोनों राशियाँ  नवम भाव एवं दशम भाव में आती हैं, यह दोनों भाव अत्यंत शुभ हैं, ज्योतिष में शनि को धर्म, कर्म  एवं न्याय का ग्रह कहा गया है अतः यह यहाँ स्वयं धर्मेश एवं कर्मेश होकर अत्यंत शुभ हो जातें हैं, अतः जब भी शनि कुंडली के 1, 2, 5, 9, 10, 11 भाव में स्थित हों तब नीलम अवश्य धारण करना चाहिए विशेषकर जब इनकी महादशा एवं अन्तर्दशा हो।


वृषभ लग्न में राहु रत्न गोमेद Onyx

इस लग्न में राहु का फल मिला जुला होता है, यह लग्नेश शुक्र के मित्र भी हैं, गोमेद धारण करें से कुछ शुभ फल मिलता है तो अशुभ फल अधिक मिलता है,  अगर कुंडली के अनुसार राहु की दशा-अन्तर्दशा चल रही हो तब गोमेद धारण करने से पहले अपने ज्योतिषी से सलाह अवश्य हि लें, मेरे ( पं. उदय प्रकाश शर्मा )  के अपने अनुभव के अनुसार राहु जब कुंडली के 1, 2, 5, 9, 10, 11 वें  भाव में बैठा हो तब इसे बुध रत्न पन्ना के साथ धारण करें, अन्यथा गोमेद को धारण करने से बचें बल्कि इसकी पूजा और मन्त्र जप श्रेष्ठ रहेगा। 


वृषभ लग्न में केतु रत्न लहसुनियाँ  Cat.s Eye

इस लग्न में राहु की तरह केतु को भी समझें और केतु कुंडली के 1, 2, 5, 11 में हो तब ही लहसुनियाँ रत्न धारण करें पर धारण करने से पहले अपनी कुंडली का अपने ज्योतिष से परामर्श अवश्य कर लेवें । अन्य भावों में स्थित होने पर केतु की पूजा करें।



मित्रों यह निरंतर कार्य अनुभव के आधार पर लिखा आलेख है,ज्योतिष और रत्नों  को लेकर समाज मे बहुत मत-मतांतर हैं, कोई ज्योतिषी जातक को नीच के ग्रहों के रत्न को धारण करवाता कोई शुभ ग्रहों के रत्न अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, कुतर्क और बिना मतलब की बहस न करें। अगर इस विषय को लेकर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद।

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

vashuki kalsarp yog। वासुकि कालसर्प योग और उपाय

 वासुकि कालसर्प योग और उपाय । vashuki kalsarp yog


जन्मकुण्डली में जब राहु तीसरे घर में और केतु नवम भाव में और इनके बीच सारे ग्रह स्थित हों तो वासुकी नामक कालसर्प योग बनता है।
vashuki kalsarp yog। वासुकि कालसर्प योग और उपाय


फल स्वरूप जातक को प्रायः अपने पारिवारिक सदस्यों और छोटे भाई-बहनो के कारण अनेक कष्ट और तनाव झेलने पड़ते हैं। रिश्तेदार एवं मित्रगण उसे प्राय: धोखा देते रहते हैं। घर में सुख-शांति का अभाव रहता है। जातक को समय-समय पर व्याधि ग्रसित करती रहती हैं जिसमें अधिक धन खर्च हो जाने के कारण उसकी आर्थिक स्थिति भी असामान्य हो जाती है। अर्थोपार्जन के लिए जातक को विशेष संघर्ष करना पड़ता है, फिर भी उसमें सफलता संदिग्धा रहती है। चंद्रमा के पीड़ित होने के कारण उसका जीवन मानसिक रूप से उद्विग्न रहता है। इस योग के कारण जातक को कानूनी मामलों में विशेष रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। राज्यपक्ष से प्रतिकूलता रहती है। पूजा-पाठ, धर्म-कर्म में रूचि नहीं होती। जातक को नौकरी या व्यवसाय आदि के क्षेत्रा में निलम्बन या नुकसान उठाना पड़ता है। यदि जातक अपने जन्म स्थान से दूर जाकर कार्य करें तो अधिक सफलता मिलती है। लेकिन सब कुछ होने के बाद भी जातक अपने जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करता है। विलम्ब से उत्ताम भाग्य का निर्माण भी होता है।

वाशुकी कालसर्प योग का उपाय 

* 7 बुधवार या शनिवार को एक पानी वाला नारियल बहते पानी में बहाएं।
* नव नाग स्तोत्रा का एक वर्ष तक प्रतिदिन पाठ करें।
* प्रत्येक बुधवार को काले वस्त्रों में उड़द या मूंग एक मुट्ठी डालकर, राहु का मंत्र जप कर भिक्षाटन करने वाले को दे दें। यदि दान लेने वाला कोई नहीं मिले तो बहते पानी में उस अन्न हो प्रवाहित करें। 72 बुधवार तक करने से अवश्य लाभ मिलता है।
* महामृत्युंजय मंत्रों का जाप प्रतिदिन 11 माला रोज करें, जब तक राहु केतु की दशा-अंर्तदशा रहे और हर शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें और मंगलवार को हनुमान जी को चोला चढ़ायें।
* किसी शुभ मुहूर्त में नाग यंत्र को अभिमंत्रित कर धारण करें।


कालसर्प को लेकर पं. उदय प्रकाश शर्मा की अपनी बात 


मुझे कुछ पाठकों ने मैसेज में लिखा की गुरु जी यह कालसर्प योग तो होता ही नहीं, इसका किसी शास्त्र में उल्लेख नहीं मिलता तो उन्हें मै इतना ही कहना चाहूँगा कि काफी समय से कालसर्प योग की सत्यता को लेकर गुरुजनों में मतभेद चल रहा है. कोई इसकी सत्यता पर ही सवाल उठा रहा है,कोई इसके पक्ष में खड़ा है.वास्तव में यह सही है की हमारे प्राचीन शास्त्रों में ऐसे किसी योग का उल्लेख नहीं मिलता, किन्तु ऐसे कई तथ्य हैं की जिन चीजों की जानकारी हमें पहले नहीं थी तथा उनकी खोज बाद में हुई, अब आप उन तथ्यों को यह कहकर नकार नहीं सकते की पहले के ग्रंथों में इनका उल्लेख नहीं मिलता, अब जैसे ब्लॉग पहले नहीं होता था, ईमेल पहले नहीं होती थी, लैपटॉप का पहले कहीं जिक्र नहीं मिलता,  मगर आज यह मौजूद हैं उसी तरह युग युगांतर से हर विषय में शोध कार्य होता रहता है और जीवन में जो अनुभव में आता है, वह प्रतिपादित भी होता है तो उसे अपने अनुभव की कसौटी पर परखने के बाद हमें स्वीकार्य करना ही  पड़ता है।

कहने का तात्पर्य यह है की यदि विद्वान् गुरुजनों ने किसी तथ्य की खोज बाद के काल में की है तो उस पर पूर्ण अध्ययन किये बिना उसे नकार देना हठधर्मिता ही कही जाएगी। कालसर्प योग पर अधिक ध्यान दिया जाना आवश्यक है. कई अवस्थाओं में यह योग कुंडली में मौजूद होते हुए भी निष्क्रिय होता है, कई बार इसके दुष्परिणाम भी दिखाई पड़ते हैं । इसे एकदम से नकार देना भी उचित न होगा। 

यदि कालसर्प योग का प्रभाव किसी जातक के लिए अनिष्टकारी हो तो उसे दूर करने के उपाय भी किये जा सकते हैं। हमारे ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई उपायों का उल्लेख है, जिनके माध्यम से हर प्रकार की ग्रह-बाधाएं व पूर्वकृत अशुभ कर्मों का प्रायश्चित किया जा सकता है। यहाँ हम यह कहना चाहेंगे कि अपने जीवन में मिलने वाले सारे अच्छे या बुरे फल अपने निजकृत कर्मो के आधार पर ही है, इसलिए ग्रहों को इसका दोष नहीं देना चाहिए बल्कि अपने शुभ कर्मों को बढ़ाना चाहिये व अशुभ कर्मों में सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए तथा इश्वर पे भरोषा कर, हमेशा आशावान रहना चाहिये।  

।। इति शुभम् ।।


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सोमवार, 21 दिसंबर 2020

somvar ko janme log । सोमवार को जन्मे लोग

somvar ko janme log । सोमवार को जन्मे लोग  

somvar ko janme log । सोमवार को जन्मे लोग

अक्सर मुझे ऐसे लोग मिलते हैं जो कहते हैं 
पंडित जी मेरा फलां दिन का जन्म हुआ है मेरे बारे में कुछ बताइए, मुझे मेरी जन्म तिथि, दिनांक, सन, समय कुछ भी ज्ञात नहीं बस यही दिन पता है कि मेरा जन्म सोमवार को हुआ है । तो यह आर्टिकल उन्हीं लोगों के लिए  है।

सोमवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव । Monday Birth

सोमवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति शांत होती है पर साथ ही इनका मन परिवर्तनशील भी बहुत होता हैं।यह सुख-दुःख दोनों में सामान भाव से रहने वाले और सुन्दर होते हैं। प्रायः इस दिन जन्म लेने वाले स्त्री पुरुष सामान रूप से सौन्दय युक्त होते हैं मेरे अनुभव में मैंने देखा है कि ज्यादातर सुन्दर व्यक्ति का जन्म सोमवार को ही हुआ रहता है। इनिकी वाणी भी प्रायः मीठी होती है और यह अपने बोलने और व्यवहार कुशलता के लिए भी जाने जाते हैं। इनका तकनिकी ज्ञान बहुत उच्च स्तर का होता हैं। यह प्रायः बचपन में सर्दी-कफ से संबंधित बिमारियों से घिरे रहते हैं। वैसे यह अपने घर में बड़े होते ही होते हैं अगर ऐसा नहीं है तो भी यह अपने कर्मों द्वारा बड़े जैसा ही सम्मान पाते हैं। 

इन्हें फैशन की अच्छी समझ होती है और यह कपड़ों से संबंधित कार्य करना भी पसंद करते है। यह बैंक आदि में भी रूचि रखते हैं और धन कमाने के नए नए तरीको  को जानने वाले होते हैं। 

क्यूँ की इनमे संवेदना अधिक होती है जिससे यह प्यार में जल्दी पड जाते हैं अगर प्यार मिल गया तो अच्छा अगर नहीं मिला तो यह उस प्यार को लेकर दुखी हुआ करते हैं, प्रायः इनको जीवन साथी भी अहम् वाला ही मिलता है जिसकी वजह से वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण रहता है। इन्हें अपने घर को खूबसूरती से सजाकर रखना बहोत पसंद होता है प्रायः खुबसूरत और अच्छी डिजाईन वाले घरों के यह मालिक होते हैं। यह चतुर, बुद्धिमान तथा धैर्यवान होते है। प्रायः यह राजकीय नौकरी करने वाले होते है अर्थात राज्य कर्मचारी होते है।

इन्हें 8,11 वें महीने तथा 16, 27 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 84 वर्ष की होती है।

सोमवार के दिन जन्म लेने वालों के लिए उपाय


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी चन्द्रमा होते हैं अतः अपने चहुमुखी कल्याण हेतु इन्हें चन्द्र देवता के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवान शिव की अभिषेक के साथ पूजा करनी चाहिए और साथ ही अपनी माता और माता तुल्य स्त्रियों की सेवा कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

।। इति शुभम् ।।


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गुरुवार, 14 मई 2020

vrishabha rashi । वृषभ राशी और जीवन का फल

vrishabha rashi । वृषभ राशी और जीवन का फल 


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वृषभ राशि भचक्र की दूसरी राशि होती है। भचक्र पर इसका विस्तार 30 से 60 अंशों तक होता है, इस राशि के अंतर्गत कृतिका नक्षत्र के आखरी तीन चरण, रोहिणी नक्षत्र के चारो चरण तथा मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम दो चरण आते हैं।इसके नामाक्षर- इ,  उ,  ए,  ओ,  वा,  वि,  वु,  वे,  वो  हैं।

इस राशि का प्रतीक चिन्ह बैल होता है। बैल स्वभाव से ही बहोत अधिक परिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है, साधारणतः वह शांत रहता है किंतु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है। कुछ-कुछ यही स्वभाव आप की राशि का पाया जाता है। पर आप अपनी जिम्मेदारियों का भली प्रकार निर्वहन करने वाले होते हैं। आप की राशि का स्वामी ग्रह शुक्र होता है।

आप सुन्दर, मनमौजी, हंसमुख होते हैं। आप पितृ-धन और पैतृक जायदाद का उपभोग करने वाले, स्त्री समाज के प्रेमी और भक्त होते हैं एवं विलासी वस्तुओं के शौकीन होते हैं। आप की आदत दोनों हांथों से खुला खर्च करने की होती है। आप के स्वभाव में सामान्य तौर पर व्यपारियों जैसा भरपूर गुण विद्दमान होता है। आप के जीवन का सभी शुभाशुभत्व परिश्रम और आप की अपनी कर्म शक्ति पर ही निर्भर करता है। आप अनेक विषयों का मर्म एवं रहस्य गहराई से जानने के इच्छुक होंगे, और उनका उपयोग अपने जीवन में भी करने का प्रयत्न करेंगे। आप की आवाज तर्कपूर्ण, तथ्यपूर्ण व वास्तविक होगी, विनम्रता से आप सारा जग जित सकते हैं। अधिक राग-द्वेष, स्वार्थ आडम्बर और बनावट से आप को बचना चाहिए। वाकपटुता आप की विशेषता है। पर सुख के समय आप अक्सर सारी बातें भूल जाते हैं।

आपमेे नेतृत्व के सभी गुण होने पर भी कुछ अवगुण विद्यमान रहते हैं। सभी सुख सुविधाओं की ललक होती है। परिश्रम व काफी अंश तक इमानदारी को लक्ष्य बनाकर अपने जीवन में सफल हो सकते  हैं। अलग-अलग ढंग से सभी गुप्त लेखा-जोखा रखने में चतुर होंगे। आपके हृदय में विशेष संवेदना रहेगी। अनेक प्रयत्नों के उपरांत भी आपके कई कार्य अपूर्ण ही रहेंगे। प्रशासन के क्षेत्र में रूचि होने पर आप तभी सफल हो सकेंगे जब स्वयं अनुशासित रहकर अनुशासन प्रेमी और नियमित बनेगें। आपकी पत्नी पति सेवा में निपुण तो होगी किंतु पति सेवा में पति देव की आज्ञा को प्रथम महत्व नहीं दे पाएगी इसलिए आप पति-पत्नी का पूर्णतः सुखी व सफल दाम्पत्य जीवन नहीं कहा जा सकता। आपके स्वभाव में मिलनसारिता, तीव्रता, कुशलता, सौम्यता व सही समय पर समझौता करने की पहचान शक्ति होगी । ऊँची कल्पना, उड़ान स्वार्थ तत्परता, भौतिकता के प्रति अधिक झुकाव व दुनिया की हर तकनीक में थोड़ा बहुत ज्ञान रखना भी आपके स्वभाव का अंग है।

वृषभ राशी और आप की शारीरिक संरचना

आप सुन्दर व आकर्षक शरीर वाले, चेहरे का आकार अण्डाकार होता है। खुला हुआ गौर-रक्त, या गेहुआँ वर्ण, मोहक व चमकदार चेहरा, मजबूत मध्यम ऊँचा शरीर, आप कैसे दिख रहे हैं इस पर बहोत ध्यान देते हैं और आप कपड़ों की पसंद पर भी बहोत ध्यान देने वाले होते हैं जिससे कपड़ों का चुनाव बेहतर होता है । जिसकी वजह से आप एक सलीकेदार एवं सुरुचिपूर्ण व्यक्तित्व के मालिक होते है।

वृषभ राशी और आप का तत्व

आप पृथ्वी तत्व प्रधान होते हैं। जिसकी वजह से आप व्यवहारिकता के लिए जाने जाते हैं । आप अपने लोगों के बीच इस लिए मशहूर होते हैं कि आप हर परिस्थिति में अडिग रहने वाले व्यक्ति हैं। आप हर परिस्थिति में हर हाल में खड़े रहते हैं। जिससे आप अपने साथ के भावुक लोगों के लिए एक सम्बल बनते हैं।

वृषभ राशी और आप के गुण

आप का जीवन के प्रति सदा व्यवहारिक दृष्टिकोण ही आप का प्रधान गुण हैं, आप में हर प्रकार के नेतृत्व का गुण विद्दमान होता है। हर विद्या को जल्दी सिख जाने की मेधा शक्ति आप में होती है।आप सबको साथ लेकर चलने के हिमायती हैं। आप जिस भी कार्य को हाँथ में लेते हैं लबे समय तक उसमे लगे रहकर उसे पूर्ण करने का प्रयास करते रहते हैं। हारना आप जानते नहीं। पृथ्वी तत्व होने की वजह से आप स्पर्श की भावना समझते हैं।

वृषभ राशी और आप की कमजोरियां

आप सोक, चिंता, पश्चयताप से कभी भी दूर नहीं रह सकते, आप बहोत हद तक जिद्दी भी हो सकते हैं। आप में जरुरत से ज्यादा अधिकार जताने की भी बुराई जुडी हुई है खासकर जब प्यार के मामले सामिल हों, प्रयः छोटी-मोटी बातों पे भी कुछ समय तक आपसी बातचीत बंद कर देते हैं। आप जिद पे अड़ जाते हैं तो किसी की भी बात जल्दी नहीं मानते

वृषभ राशी और आप का स्वास्थ्य

आप एक मजबूत शारीरिक छमता वाले व्यक्ति हैं। आप की रोगप्रतिरोधक छमता अच्छी होती है जिसकी वजह से आप के बाल्यावस्था से ही आप को स्वास्थ्य की जल्दी कोई समस्या नहीं होती। पर उम्र के साथ-साथ खान-पान पे ध्यान न दे पाने की वजह से आप में मोटापा भी जल्दी आता है। आप के शरीर में कंठ और समीपवर्ती स्थान कभी-कभी कम या ज्यादा रोगग्रस्त रहेगा, शुगर की कमी या अधिकता, शीतज्वर, गुप्तेन्द्रिय रोग और खाने-पीने में स्वादहीनता से भी कभी कभार परेसान रहेंगे।

वृषभ राशी और आप का प्यार

आप समर्पित प्रेमी हो सकते हैं। अपने प्यार को प्रदर्शित करने के लिए आप उपहारों आदि का सहारा लेते हैं जिसके चक्कर में आप अपने प्यार की गहराई को अपने साथी के सामने नहीं ला पाते। प्रायः आप अपने साथी को कितना टूटकर चाहते हैं उस को ठीक से नहीं बता पाते जिसकी वजह से आप के साथी को खालीपन का एहसास भी हो सकता है। आप प्यार में बच्चे बन जाते हैं और चाहते हैं कि आप का साथी आप की भावनाओं को स्वतः समझे, आप प्यार में धोका मिलने पर एकदम से टूट जाते हैं। आप चाहते हैं की कोई आप के कंधे पर हाँथ रख कर आप से अपनेपन का एहसास दिलाये।

वृषभ राशी और आप के लिए उपयुक्त कैरियर

आप के लिए सबसे उपयुक्त व्यवसायों में से है बैंकिंग, प्रदर्शन कला, या ऐसा कैरियर जिसमे एकल दिमाकी निर्णय की आवश्यक्ता हो। आप किसी भी कार्य को कलात्मक ढंग से करने के शौक़ीन होते हैं। आप के लिए होटल, संगीत, तेल व्यवसाय, गायन, नृत्य, कलाकार, अभिनेता, मॉडलिंग,  शिल्पकारी से संबंधित वस्तुएं, रेडिमेड वस्त्र व्यवसाय  टेलरिंग, फिल्म व्यवसाय, फैशन डिजाइनर, विज्ञापन एजेंसी आदि के कार्यों में अपना कैरिअर बनाना लाभप्रद होता है। नौकरी में आप सामान्य प्रदर्शन ही कर पाते हैं, प्रायः आप का गुस्सा नौकरी में प्रगति हेतु बाधक बनता है।

वृषभ राशी के इष्ट देवता और मन्त्र 

वृषभ राशी के इष्ट देवता भगवान विष्णु  और माता दुर्गा हैं । मन्त्र  ॐ नमो भगवते वाशुदेवय या ॐ नमो नारायणाय अथवा ॐ दुर्गाय नमः है । आप को अपने चहुमुखी कल्याण के लिए इन मन्त्रों का अधिक से अधिक जप या भगवान विष्णु माता दुर्गा की पूजा आराधना करनी चाहिए।

।।इति शुभम्।।

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janam din aur swbhav । जन्म दिन और स्वभाव

janam din aur swbhav । जन्म दिन और स्वभाव  

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janam din aur swbhav

अक्सर मुझे ऐसे लोग मिलते हैं जो कहते हैं पंडित जी मेरा फलां दिन का जन्म हुआ है मेरे बारे में कुछ बताइए, मुझे मेरी जन्म तिथि, दिनांक, सन, समय कुछ भी ज्ञात नहीं बस यही दिन पता है। तो ऐसे ही लोगों के लिए ही मैंने यह आर्टिकल लिखा है कि किस दिन को जन्म लेने वाले जातक का क्या स्वभाव, गुण, आदतें आदि होंगी।

रविवार  के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव  Sunday

रविवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति तेज होती है, इनमे थोड़ी बहुत अहम की भवना होती है, यह दिखावा करना भी पसंद करते हैं, यह अपने पिता के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले होते हैं, अपनी माता से इनकी थोड़ी कम बनती है, यह भाई बहनों के प्रति पिता तुल्य जोम्मेदारी समझते हैं, यह सरकरी नौकरी पाने के लिए प्रयत्नशील होते हैं। वैसे यह स्वतंत्र विचारों के होते हैं इसलिए यह किसी का दबाव बर्दास्त नहीं कर पाते हैं जिससे नौकरी में परेसनी भी बनी रहती है। यह ठेकेदारी से जुड़े कामों में अधिक सफल होते हैं। यह राज सत्ता के करीब रहने वाले और मान-सम्मान प्राप्त करने वाले होते हैं, पर पीठ पीछे इनके कार्यों की बुराई भी होती है, इन्हें आलोचनाओं को सहने की आदत रखनी चाहिए, सफल होने के लिए इन्हें जनता के बिच रहना पड़ता है सायद इसी लिए यह एक अच्छे राजनीतिज्ञ भी होते हैं। यह परिवार में बहन, बेटी तथा बुआ के लाडले होते हैं, वैसे तो यह किसी से डरते नहीं पर अपनी जीवन साथी से ही कुछ डर महसूस करते हैं और इनको जीवन में अपनी स्त्री को लेकर परेसान भी होना पड़ता है। यह लोगों की अपेक्षा पे खरे उतरने वाले चतुर, दान करने वाले, समूह का नेतृत्व करने वाले आदेशात्मक वाणी बोलने वाले होते है।
इन्हें प्रायः पित्त की बीमारी के रोग लगते है। इन्हें 1, 6 महीने में तथा 13, 23 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 50 वर्ष व उससे अधिक होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी सूर्य हैं- अतः इन्हें भगवान सूर्य देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिये इससे इनके चहुमुखी कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है तथा साथ ही  पिता और गुरुजन की सेवा और आज्ञा पालन से उतम सुख मिलता है।
सूर्य ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं अचूक उपाय

सोमवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव  Monday

सोमवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति शांत होती है पर साथ ही इनका मन परिवर्तनशील भी बहुत होता हैं।यह सुख-दुःख दोनों में सामान भाव से रहने वाले और सुन्दर होते हैं। प्रायः इस दिन जन्म लेने वाले स्त्री पुरुष सामान रूप से सौन्दय युक्त होते हैं मेरे अनुभव में मैंने देखा है कि ज्यादातर सुन्दर व्यक्ति का जन्म सोमवार को ही हुआ रहता है। इनिकी वाणी भी प्रायः मीठी होती है और यह अपने बोलने और व्यवहार कुशलता के लिए भी जाने जाते हैं। इनका तकनिकी ज्ञान बहुत उच्च स्तर का होता हैं। यह प्रायः बचपन में सर्दी-कफ से संबंधित बिमारियों से घिरे रहते हैं। वैसे यह अपने घर में बड़े होते ही होते हैं अगर ऐसा नहीं है तो भी यह अपने कर्मों द्वारा बड़े जैसा ही सम्मान पाते हैं। इन्हें फैशन की अच्छी समझ होती है और यह कपड़ों से संबंधित कार्य करना भी पसंद करते है। यह बैंक आदि में भी रूचि रखते हैं और धन कमाने के नए नए तरीको  को जानने वाले होते हैं। क्यूँ की इनमे संवेदना अधिक होती है जिससे यह प्यार में जल्दी पड जाते हैं अगर प्यार मिल गया तो अच्छा अगर नहीं मिला तो यह उस प्यार को लेकर दुखी हुआ करते हैं, प्रायः इनको जीवन साथी भी अहम् वाला ही मिलता है जिसकी वजह से वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण रहता है। इन्हें अपने घर को खूबसूरती से सजाकर रखना बहोत पसंद होता है प्रायः खुबसूरत और अच्छी डिजाईन वाले घरों के यह मालिक होते हैं। यह चतुर, बुद्धिमान तथा धैर्यवान होते है। प्रायः यह राजकीय नौकरी करने वाले होते है अर्थात राज्य कर्मचारी होते है।
इन्हें 8,11 वें महीने तथा 16, 27 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 84 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी चन्द्रमा होते हैं अतः अपने चहुमुखी कल्याण हेतु इन्हें चन्द्र देवता के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवान शिव की अभिषेक के साथ पूजा करनी चाहिए और साथ ही अपनी माता और माता तुल्य स्त्रियों की सेवा कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
चन्द्र ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं अचूक उपाय

मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव   Tuesday

मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति गर्म होती है। यह पराक्रमी, वीर, साहसी एवं संग्राम में  विजय प्राप्त करने वाले  होते है। इसकी बुद्धि विशेष अच्छी नहीं होती, इसी से यह बौद्धिक  कार्यों से अलग रहना पसंद करते है, परन्तु वीरता के कार्यों में आगे बढ़-चढ़ कर भाग लेने वाले होते है। प्रायः यह सांवले रंग के होते हैं पर इनमे आकर्षण शक्ति बहुत गजब की होती है जिसकी वजह से विपरीत लिंगी इनकी तरफ बहुत जल्दी आकर्षित होते हैं । यह लोग अपने शरीर को ही सब कुछ समझते हैं जैसे आज के समय में फ़िल्म अभिनेता, अभिनेत्री, जिम्नास्टिक आदि जो अपने शरीर को ही अपने कर्म का साधन बना लेते हैं, यह लोग रक्षा विभाग, पुलिस, आर्मी,  डाक्टरी शल्य चिकित्सा (surgery), खेल -कूद आदि में भी अग्रणी होते हैं। अपनी वाक्पटुता से यह लोगों को  सहज ही आकर्षित कर लेते हैं। इनको रक्त संबंधी रिश्तों जैसे- चाचा, बुआ, बहन आदि से विशेष सहयोग प्राप्त होता है। यह दुश्मनी, कर्जा, बीमारी, बदला आदि  को ज्यादा महत्त्व देते हैं और इनसे सामना करने हेतु अधिक धन इकठ्ठा करते हैं, जमीनी संपत्ति भी यह लोग खड़ी करते हैं। यह अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं। यह स्कूल आदि में पुस्तकों से सिखने के बजाय जीवन में कार्य कर के सिखने में अधिक विश्वास  करते हैं । यह जवानी के दिनों में कामुक भी बहुत होते हैं, इनके लिए प्रायः प्यार-मुहब्बत करना अक्सर मुसीबत बन जाता है, यह शंकालु भी बहोत होते हैं, यह अपनी पत्नी का लोगों से ज्यादा मिलना जुलना पसंद नहीं करते, इनमे असुरक्षा की भावना भी अधिक होती है।
इन्हें  2, 32 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 74 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी मंगल होते हैं अतः अपने चहुमुखी कल्याण हेतु मंगल देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा संकट मोचन हनुमान जी व भगवान कार्तिकेय की पूजा-आराधना इन्हें करनी चाहिए साथ ही अपने छोटे भाई बहनों का उचित मार्गदर्शन, सहयोग व उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। उनके उदंडता पे क्रोधित न होकर छमाशीलता अपनाना चाहिए।
मंगल ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं उपाय 

बुधवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव   Wednesday

बुधवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति शांत होती है इनमे स्त्रियोचित गुण भी पाए जाते हैं। यह मीठा और ज्यादा बोलने वाले, ज्योतिषी, पंडित, धनी, बौद्धिक कार्य करने वाले, लेखक, कवि संपादक होते है, इनके पास किसी विषय विशेष के बारे में लिखने की अद्भुत कला होती है, यह अच्छे स्क्रिफ्ट राईटर, एडिटर, संवाद लेखक होते हैं। यह ज्यादा बोलने के साथ ही बिना मागी सलाह देने में ज्यादा आगे रहते हैं। यह लोगों को जल्दी ही अपना मित्र बना लेते हैं और उनसे काम होने के बाद उन्हें भूल भी जाते हैं। यह हर मुद्दे को व्यापारिक दृष्टिकोण से दखने वाले, हमेसा अपना फायदा सोचने वाले, कई भाषाओँ के जानकर होते हैं। यह भौतिक सुख साधनों का अत्यधिक शौक रखने वाले व वाहनादि का प्रदर्शन करने वाले होते हैं। यह बहुत मजाकिया स्वभाव व  मनोरंजन में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं जिससे इनको जानने वाले अधिक होते है जिनसे यह प्रायः अपना कार्य निकलवाते रहते हैं। यह शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहते हैं, आज के युग में कम्पूटर के अच्छे जानकर, साफ्वेयर, हार्डवेयर, एनिमेसन, डिजाईन, प्रिंट मिडिया, चित्रकारीता में भी अद्भुत गुण भी रखते हैं। कौन सा कार्य किस तरह करना है यह भली प्रकार जानते हैं, यह अच्छे सेल्समैन हो सकते हैं क्यूँ की लोगों को सीसे में उतरना इन्हें अच्छी तरह आता है। इन्हें जनता के बिच कार्य करने में विशेष रूचि होती है । यह जितने नरम स्वभाव के होते हैं उतने ही कठोर भी होते हैं, यह किसी भी बात को लम्बा खीचते हैं तथा नाराज भी जल्दी होते हैं पर इनकी नाराजगी टिकाऊ नहीं होती, इन्हीं कारणों से इनका पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है। यह प्रायः स्वस्थय होते हैं पर कभी कोई छोटी सी बामारी हुई नहीं की उसे मानसिक रूप ज्यादा सोचकर बड़ा बना लेते हैं। नीरस और बोझिल वातावरण इन्हें पसंद नहीं होता।
इन्हें 8 वे महीने या 8 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 64 वर्ष होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी बुध होते हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी कल्याण के लिए बुध ग्रह के मन्त्रों का जप करना चाहए तथा भगवती माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना करनी चाहिए  साथ ही बहन, बेटी, बुआ को सम्मान देना चाहिए व उन्हें उपहार देकर उन्हें खुश करना चाहिये।
बुध ग्रह के संपूर्ण मन्त्र एवं अचूक उपाय

गुरुवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव     Thursday

गुरुवार के दिन जन्म लेने वाला जातक शांत प्रकृति का होता है। यह चतुर, विद्वान, राजा का मंत्री या मंत्री का सलाहकार, प्रतिष्ठित नेता, वकील, जज एवं ग्रन्थ-लेखक होता है। यह भगवान को मानाने वाले धार्मिक प्रवित्ति के होते हैं, इनमे ज्ञान की अधिकता होती है, इनकी शिक्षा-दीक्षा कैसी भी हो पर इनमे ज्ञान की कमी नहीं होती पर साथ ही अपने ज्ञान को लेकर इनमे अहम् भी होता है, इनमे तर्क भी भरपूर होता है यह किसी भी बात को शास्त्रोक्त व तर्कपूर्ण  ढंग से ही लोगों के सामने रखते हैं, यह एक अच्छे कथाकार, अच्छे सलाहकार साबित होते हैं इनका परामर्श उच्च कोटि का होता है जीससे इनसे परामर्श पाने वाला लाभवन्तित होता है।  इनका माथा गोल और चौड़ा होता और शरीर पतला होता है तथा सर के बल जल्दी झड जाते हैं।  इन्हें सर्दी बहोत लगती है अर्थात यह शीत से जल्दी प्रभावित होते हैं जिससे यह सर्दी के मौसम में प्रायः कफ जनित बिमारियों से ग्रसित रहते हैं। यह रिश्तों में ससुराल पक्ष से बहोत प्रभावित रहते हैं, ससुराल से इन्हें सहायता भी प्राप्त होती है। यह वैसे तो सात्विक भोजन ही पसंद करते हैं पर अगर  संगत का असर हुआ तो यह तामसिक भोजन भी जल्द अपना लेते हैं और नशे की तरफ भी आकर्षित हो जाते हैं मेरे अनुभव के अनुसार इनका अच्छा समय तभी रहता है जब यह सात्विक होते हैं, जैसे ही यह अपने अंदर व्यसन को आने देते हैं इनके सभी कार्य बिगड़ने लगते हैं साथ ही मान-हानि के भी योग उठ खड़े होते हैं।
 इन्हें 7 वें महीने में तथा 13 व 16 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 84 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी  कल्याण के लिए देवगुरु वृहस्पति के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवन विष्णु की पूजा करनी चाहिए, साथ ही माता-पिता गुरुजनों की सेवा कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
वृहस्पति ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं उपाय 

शुक्रवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव    Friday

शुक्रवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति कुछ गरम होती है। यह देवताओं में कम श्रद्धा रखने वाले, क्रोधी, चंचल चित्त वाले, बुद्धिमान, रूपवान तथा खेल में मस्त रहने वाले सौन्दय प्रेमी होते है। इसकी बोलने की शक्ति अच्छी होती है जिससे समाज में आदर प्राप्त करते है। यह स्वदिष्ट भोजन के शौक़ीन होते हैं तथा  इनको भूख बहोत लगती है लेकिन शरीर सामान्य ही रहता है, यह छरहरे और लंबे होते हैं, इनकी दृष्टि अच्छी होती है पर आगे चलकर आँखों से संबंधित परेशानी आती है। इनमे कला के सभी गुण भरे होते है, आज के समय में सिनेमा जगत में यह यह अभिनेता/अभिनेत्री हो सकते हैं, इनमे सौन्दर्य का बोध बहुत अधिक होता है, यह मनोरंजन के सौखीन होते हैं तथा रचनात्मक कार्य खुद करना और दूसरों को उसकी शिक्षा देना भी यह भली भांति जानते हैं जिस कारण यह नृत्यकला, ड्रामा, रंगमच, गायन के क्षेत्र में कार्य करने में उत्सुक रहते हैं, यह अपने जीवन में स्वयं के पराक्रम से धन-दौलत, घर, वाहन आदि बनाते हैं, यह अपने वाहन को खूब सजा-संवार कर रखते हैं और उसे चलाने के भी शौक़ीन होते हैं। यह मातृभक्त होते हैं और अपनी माँ की सेवा भी बहुत करते हैं, इनमे अहम् भी बहोत होता है, यह किसी पे कोई उपकार करें तो उसे बार बार याद भी दिलाते रहते हैं। इनका तकनिकी ज्ञान बहोत अच्छे स्तर का होता है, यह किसी भी चीज को बहुत बारीकी से समझते हैं जीससे यह उसी कार्य द्वारा अपनी जीविका बना लेते हैं। इनको पत्नी प्रायः धार्मिक स्वभाव वाली मिलती है जो अपने कुल की परंपरा का निर्वहन कर के जातक को अपने परिवार और समाज में उच्च दर्जा दिलाने में सहायक बनती है।
इनकी पूर्णायु 60 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वमी दैत्य गुरु शुक्राचार्य हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी कल्याण के लिए शुक्र देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवान विष्णु और माता दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। साथ ही पत्नी का सम्मान करना चाहिए इनके जीवन में पत्नी के भाग्य से ही सफलता और धन-धान्य होता है अतः पत्नी से सदा सम्बन्ध मधुर रखने में ही इनका कल्याण निहित होता है।
शुक्र ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं उपाय 

शनिवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव    Saturday

शनिवार के दिन जन्म लेने वाला जातक तेज प्रकृति का होता है। यह दृढ-प्रतिज्ञ, कामी एवं साहसी होता है। शरीर की स्थिति विशेष अच्छी नहीं होती फिर भी इसका पराक्रम सराहनीय होता है, इनके बाल लंबे और खुबसूरत होते हैं। यह अपने आप में मस्त रहने वाला होता है, इनके जीवन में जब चुनौतियाँ आती है यह तब उसे पूर्ण हल करने हेतु अपने आप को तैयार करते हैं और पूर्ण होते ही फिर अपनी दुनियां में मस्त हो जाते हैं। यह स्वभाव से कंजूस होते हैं खर्चा करना इन्हें पसंद नहीं होता, सिर्फ यह खर्चा न हो इसके लिए जीवन के कई सुख से वंचित रह जाते हैं, यह तर्क बहुत करते हैं प्रायः अच्छी चीज को बुरा और बुरी चीज को अच्छा बताते हैं। यह अपने जन्म स्थान को छोड़कर कहीं दूर जाना नहीं चाहते जिससे इन्हें कैरिअर बनाने में मुश्किलें आती हैं। यह अपनी भावनाओं को लोगों के सामने नहीं रख पाते इस लिए लोग इन्हें रुखा या खडूस आदि की संज्ञा देते हैं, यह शारिरिक मेहनत के कार्य करना ज्यादा पसंद करते हैं इन्हें दिमाकी काम करना कम भाता है। यह स्वभाव से न्यायप्रिय होते हैं। इनकी पत्नी को इनसे हमेशा सिकायत रहती है, यह यह प्रेम के मानले में सामान्य बने रहते हैं, रिश्तों की गर्माहट व्यक्त नहीं करते, कम बोलना पसंद करते हैं, अगर इनका जन्म रात्रि में हुआ है तो इस तरह का व्यवहार ही अधिक दर्शाते हैं। प्रायः इनको कन्या संतति अधिक होती है। इनको जबतक पिता का सुख होता है तो यह भी सुखी होते हैं, पिता की मृत्यु के पश्च्यात इनको दुःख मिलता है, अपने कमाई से अगर यह घर बनाते हैं तो इन्हें उस घर में सुख मुश्किल से ही मिल पाता है ।
इन्हें 1 महीन में तथा 13 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 100 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी शनि देव होते हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी कल्याण के लिए शनि देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भैरव व माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए साथ ही अपने अधिनस्त कर्मचारियों को सम्मान देना चाहिये, गरीब और असहाय लोगों की यथा संभव मदत करनी चाहिए जिससे इन्हें जीवन में उत्तम सुख की प्राप्ति होती है।
शनि ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं उपाय 

विशेष नोट- यह फलादेश दिवश के गुण-धर्म के अनुसार सामान्य रूप से लिखा गया है, जातक की कुंडली में स्थित ग्रहों के बलाबल, उसके पारिवारिक परिवेश के अधार पे इन फलों में न्यूनाधिकता हो सकती है। यह लेख उन जातकों के लिए लाभकारी हो सकता है जिन्हें अपनी जन्म तारीख व समय न पता हो सिर्फ जन्म का दिवश ही पता हो। कृपया यह पोस्ट आप को कैसी लगी अपना बहुमूल्य विचार कमेन्ट में जरुर लिखें ।

।।इति शुभम्।।

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मंगलवार, 12 मई 2020

mesh rashi । मेष राशी और जीवन का फल

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मेष राशि भचक्र की पहली राशि होती है. भचक्र पर इसका विस्तार 0 से 30 अंशों तक का होता है. इस राशि के अंतर्गत अश्विनी नक्षत्र के चार चरण, भरणी नक्षत्र के चार चरण और कृत्तिका का प्रथम चरण आता है।
इसके नामाक्षर- चू, छे, चो, ला, लि, लू, ले, लो, अ हैं ।

इस राशि का प्रतीक चिन्ह मेढा होता है जिसे आम बोलचाल की भाषा में भेड़ा कहा जाता है। काल विधान के अनुसार आप लोक कल्याण की इच्छा रखने वाले होते हैं। साधारण मकान में भी स्वतन्त्र रहना, समता विहीन होना, समय की गति से परिचित रहना और परिग्रह का त्याग करना इस राशि वालों की विशेषता है।

आप उष्ण प्रकृति वाले, रक्तपित्त की अधिकता तथा तामसी खान-पान वाले होते हैं। दुबला-पतला शरीर, मध्यम ऊँचा कद, उग्रदृष्टि, विद्याध्ययन में सफल, सामान्य बुद्धि, बंधु पिता व जन्मभूमि से दूर रहते हुए सुखी रहने वाले, चंचल स्वभाव, कामकला में कुशल, एकांतवास में रूचि व सेवा सुश्रुषा करने में चतुर होते हैं। स्वल्प संतान सुख, घुटना कमजोर, गुप्त ढंग से काम करने की प्रवृत्ति, सर व मुख पर कोई चोट का निसान होना संभव होता है।
मंगल के राशिपति होने से आप में साहस, दूरदर्शिता व उत्तम सामर्थ्य शक्ति होती है।मंगल में इतनी अमोघ शक्ति व अद्भुत जादू विद्दमान है कि जरा भी अच्छा समय आने की आशा हो तो मरणासन्न अवस्था में भी आप में जीवित रहने की तिव्र अभिलाषा प्रगट होती है।इसके प्रभाव से आप सत्ता के अधिकारी भी हो सकते हैं। मेष राशि के जातकों में जन्म से नेतृत्व के गुण होते हैं।

राशिचक्र की आरंभिक राशि होने के कारण आप उत्तरोतर (आगे-आगे) ही जाना चाहते हैं। हारना आप बर्दाश्त नहीं कर सकते अत: आप अधिकतर सफ़लता ही हासिल करते हैं। आपका यह गुण जीवन के हर क्षेत्र में नजर आता हैं। जब आप के जीवन वृत्ति की बात आती हैं तो आप बेहतरीन कैरियर पाने के लिए अपना सारा कौशल लगा देते हैं। प्रत्येक कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेना आप को अच्छा लगता है। प्रायः सभी स्थानों में अग्रणीय रहना चाहते हैं।खेल कूद में भाग लेना आपको पसंद है इसी के साथ साथ आपको नए-नए परिधानों को पहनने का शौक भी हो सकता है।चुनौतियां स्वीकार करना आपको अच्छा लगता है और आप शारीरिक श्रम करने से पीछे नहीं हटते हैं। साहस, दृढ़ता, संकल्पशक्ति, उत्साह व आत्मविश्वास आपकी अन्य विशेषताएं होती हैं। आपमें क्रोध अधिक होता है जिसके कारन आप अपना कई बार नुक्सान कर बैठते हैं। आप के काम में भी बदलाव की प्रवृत्ति देखी जा सकती है. आप अचानक से और अनायास होने वाले फैसलों या बदलावों के लिए तैयार रहते हैं. कभी-कभी बिना विचार, मनन किए बिना भी शीघ्रता से आप कोई काम करना शुरू कर सकते हैं, मेष राशि एक चर अर्थात  चलायमान राशि है इसलिए आप अधिकतर समय गतिशील रहते हैं, आप में उत्सुकता का भाव भी अधिक होता है, हर किसी बात के विषय में जानने के लिए आप सदैव आतुर रहते हैं. आप प्रतिस्पर्धा से घबराते नहीं है।

मेष राशी और आप की शारीरिक संरचना

आप के तीखे नैन-नक्श होते हैं, उन्न्त ठोढ़ी,नाक और भरा हुआ उपरी ओंठ । आंखे दूरस्थ दुरी पर होती हैं भौंहे घनी होती हैं । आप का बोलने का ढंग भड़कीला होता हैं । आप चलने में तो तेज होते हैं पर सलीका बिल्कुल नहीं होता हैं। आप औसत ऊँचाई के होते हैं और आप का रंग दबा हुआ हो सकता हैं ।आप की उपस्थिति विवादपूर्ण भी हो सकती हैं। आप आमतौर पर भड़कीले या सनकी प्रतीत होते हैं। अक्सर प्रफूल्ल, ऊर्जावान और अपरिष्कृत दिखाई पड़ते हैं। आप लाल रंग पसंद करते हैं। दरअसल, आप विचारशीलता से ताल्लुक नहीं रखते हैं।

मेष राशी और आप का तत्व

मेष राशी का तत्व अग्नि है जो बहुत ताकतवर हैं। आपमें अग्नि की पूरी गर्माहट होती हैं। आपके अन्दर की भरपूर उर्जा में शायद ही कभी कमी आयेगी। आपमें सबसे अच्छी बात यह हैं कि आप जहां भी जायेंगे अपनी उर्जा का प्रकाश सब जगह फ़ैलायेंगे और सबको इसका समान फ़ायदा पंहुचेगा।आपमें जीवट शक्ति बहुत हैं अत: आप कठिनाईयों से आसानी से बाहर निकल आते हैं।

मेष राशी और आप के गुण

अगर आप के कुछ मित्र किसी परेसानी में, मायूस होकर बैठे हैं तो आप के आते ही उन सब में जान आ जाती है। आपकी सबसे बड़ी शक्ति आपका साहस हैं । आप जिन्दगी की चुनौतियों का बिना किसी भय के मुकाबला करतें हैं। स्वतंत्रता, उदारता, उत्साह, उमंग, आशावाद और धैर्य आपके सकारात्मक गुण हैं । (आप अक्सर कहते हैं कि कोई बात नहीं  सब हो जायेगा)

मेष राशी और आप की कमजोरियां

आप जिद्दी और हठी भी होतेहैं। आप अक्सर अपने लोगों की सलाह नहीं मानते हैं और आप जो सोचते हैं वही करना चाहते हैं।आप तुनकमिजाज हो जाते हैं खासकर जब आपको बाधाओं और आलोचनाओं का सामना करना पड़ता हैं। आप को जब भी कोई अपना सिख देने की कोशिश करता है आप प्रायः झल्ला उठते हैं।

मेष राशी और आप का स्वास्थ्य

आप उर्जा,शक्ति और ताकत से भरपूर होते हैं। आप को सिर,पेट और किडनी से सबंधित बिमारियां होने की संभावना रहती हैं।इसके लिए आप को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता हो सकती हैं अन्यथा माइग्रेन, अपच या किडनी में पथरी होने की संभावना बनी रहती हैं।यह सब बहुत अधिक तनाव होने या खान-पान की गलत आदतो की वजह से हो सकता हैं।आवेगी होने के कारण दुर्घटना की संभावना अधिक रहती हैं पर आप काफ़ी मजबूत होते हैं।

मेष राशी और आप का प्यार

आप के लिए प्यार एक जरुरत है जिसे पूरा किया जाना चाहिये। आप प्यार को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। प्यार में सब कुछ हासिल करने से झिझकते नहीं हैं। आप ऐसी जगह में भी जाने से नहीं हिचकते हैं जो कम लोकप्रिय हो पर आप की रुचि का हो। प्यार से विमुख होने पर आप मुरझा जाते है। प्यार में अवांछित प्रतिरोध आने से आप अवाक् हो जाते हैं और जीवन से डर जाते हैं। संबधो में आप को हर समय तव्वजो चाहिए रहती है। अनदेखा करना आप पसंद नहीं करते हैं। प्यार में अस्वीकृति को आप चुनौती के रुप में लेते हैं। और अपनी मंजिल मिलने तक उसके पीछे पड़े रहते हैं। आप अपने साथी की जरूरतों और मांगों का बड़ा ध्यान रखते हैं। आप अपने प्यार का बड़े प्यार और लाड़ दुलार से ख्याल रखते हैं।मेष राशि के लोग प्रभावी होते हैं इन्हे आज्ञाकारी साथी की जरुरत होती हैं। प्यार में खुश और संतुष्ट मेष राशि के जातक उदार, हंसमुख और साहसिक होते हैं।

मेष राशी और आप के लिए उपयुक्त कैरियर

इस राशि का स्वामी ग्रह मंगल है, यह एक अग्नि तत्व राशि है। मंगल से प्रभावित होने पर इस राशि में क्रूरता का भाव भी निहीत होता है। इस राशि के प्रभाव स्वरूप आपका व्यवसाय भी इससे प्रभावित रह सकता है। आप में बाहुबल का प्रदर्शन करने की प्रवृत्ति देखी जा सकती है। मेष राशि के होने से आप सेना, पुलिस, जासूसी, सुरक्षाबल, कमांडो, बम निरोधक दस्ते, खेल-कूद, सर्जन अथवा धातु से संबंधित कार्य कर सकते हैं। प्रशासनिक विभाग में कार्य करने वाला, वन्य विभाग में कार्यरत, सर्जरी, चिकित्सा में अथवा आई.ए.एस या नेता के रूप में कार्यरत हो सकते हैं। खेलकूद में, नौसेना रक्षक, संवादक या उपदेशक, नेता, फाईनेंस में, होटल, रेस्तरां, चिकित्सा, कृषि और बिजली के उपकरणों के क्षेत्र में भी कार्य कर सकते हैं।अर्थात आप हर वह कार्य कर सकते हैं जिसमे हिम्मत व बहादुरी की आवश्यकता होती है।

मेष राशी के इष्ट देवता और मन्त्र 

मेष राशी के इष्टदेवता  सूर्य देव व शिव जी हैं। मन्त्र ॐ घृणि: सूर्याय नमः  या  ॐ नमः शिवाय । आप को अपने चहुमुखी कल्याण के लिए सूर्य देव व भगवान शिव की आराधना, पूजा और अधिक से अधिक मन्त्र जप करना चाहिए ।


।।इति शुभम्।।

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