ॐ श्री मार्कंडेय महादेवाय नमः

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्यवेत्।
सब सुखी हों । सभी निरोग हों । सब कल्याण को देखें । किसी को लेसमात्र दुःख न हो ।

Pandit Uday Prakash
Astrologer, Vastu Consultant, Spiritual & Alternative Healers
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सोमवार, 18 मई 2026

Ghar Ki Unchai Vastu मकान की दिशा नहीं, उसकी ऊँचाई तय करती है वास्तु का संतुलन

 मकान की दिशा नहीं, उसकी ऊँचाई तय करती है वास्तु का संतुलन


                 South West Direction Height Benefits


क्या केवल प्लॉट की दिशा ही वास्तु तय करती है?

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि यदि प्लॉट पूर्वमुखी है तो मकान का ऊँचा भाग भी पूर्व दिशा में होना चाहिए, या यदि प्लॉट पश्चिममुखी है तो पश्चिम दिशा को अधिक ऊँचा बना देना चाहिए।
लेकिन वास्तुशास्त्र का सिद्धांत इससे बिल्कुल अलग है।

वास्तु के अनुसार प्लॉट किसी भी दिशा का क्यों न हो, भवन का सबसे स्थिर, भारी और ऊँचा भाग सदैव नैऋत्य दिशा (South-West / S/W) में होना चाहिए। यही दिशा भवन को स्थिरता, मजबूती और ऊर्जा संतुलन प्रदान करती है।


आधुनिक घरों में सबसे बड़ी भूल

आज के समय में लोग घर बनाते समय डिज़ाइन, फ्रंट एलिवेशन, कलर कॉम्बिनेशन और आधुनिक सुविधाओं पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं।
लेकिन भवन की ऊर्जा संरचना को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

जबकि वास्तुशास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं, बल्कि प्रकृति और ऊर्जा संतुलन का विज्ञान है।

किसी भवन का प्रभाव केवल उसके लुक, पोर्च की भव्यता या मुख्य द्वार से तय नहीं होता, बल्कि उसकी ऊँचाई, भार, ढाल (Slope) और वेंटिलेशन अर्थात खुले स्थानों से निर्धारित होता है।


क्यों महत्वपूर्ण है नैऋत्य (S/W) दिशा?

वास्तुशास्त्र में नैऋत्य दिशा को पृथ्वी तत्व की दिशा माना गया है।
पृथ्वी का स्वभाव स्थिरता, धारण शक्ति और मजबूती है।

इसी कारण वास्तु में घर का भारी निर्माण, मोटी दीवारें, ऊँचा स्तर या भारयुक्त भाग इस दिशा में रखना शुभ माना गया है।

जब भवन का भारी और ऊँचा भाग S/W दिशा में होता है, तब घर की ऊर्जा नियंत्रित और संतुलित रहती है। ऊर्जा बिखरती नहीं, बल्कि स्थिर होकर सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करती है।

इसीलिए वास्तु में नैऋत्य को घर की शक्ति और स्थिरता का केंद्र कहा गया है।


यदि S/W में ऊँचाई देना संभव न हो तो क्या करें?

कई बार प्लॉट की स्थिति, डिज़ाइन या अन्य व्यावहारिक कारणों से नैऋत्य दिशा में पूर्ण ऊँचाई देना संभव नहीं होता।
ऐसी स्थिति में दक्षिण या पश्चिम दिशा में ऊँचाई दी जा सकती है।

  • यदि पश्चिम दिशा ऊँची होगी, तो भवन का ढाल स्वाभाविक रूप से पूर्व दिशा की ओर बनेगा।

  • यदि दक्षिण दिशा ऊँची होगी, तो ढाल उत्तर दिशा की ओर रहेगा।

वास्तु का उद्देश्य केवल भार निर्धारित करना नहीं, बल्कि ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित रखना भी है। और यह संतुलन भवन की ऊँचाई और ढाल से स्वतः निर्मित होता है।


प्रकृति भी यही सिद्धांत सिखाती है

यदि हम प्रकृति को ध्यान से देखें, तो वास्तु के सिद्धांत स्वयं स्पष्ट हो जाते हैं।

पर्वत सदैव स्थिर और ऊँचे होते हैं, जबकि नदियाँ ढाल की ओर बहती हैं।
ठीक उसी प्रकार भवन में भी एक दिशा स्थिरता का केंद्र बनती है और दूसरी दिशा ऊर्जा प्रवाह का मार्ग।

जब यह संतुलन सही होता है, तब घर केवल रहने का स्थान नहीं रहता, बल्कि मानसिक शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है।


वास्तु का वास्तविक संदेश

वास्तु का मूल संदेश यह नहीं कि केवल प्लॉट की दिशा शुभ या अशुभ है।
बल्कि वास्तविक महत्व भवन के ऊर्जा संतुलन का है।

प्लॉट की दिशा कुछ भी हो सकती है, लेकिन स्थिरता और ऊर्जा प्रवाह का सिद्धांत नहीं बदलता।

इसीलिए वास्तु में कहा गया है कि घर किसी भी दिशा का हो, उसका भार और ऊँचाई नैऋत्य (S/W) दिशा में ही श्रेष्ठ मानी जाती है।


अंत में एक आवश्यक बात

मित्रों, हम सभी जानते हैं कि वास्तुशास्त्र में अनेक मत-मतांतर हैं।
अतः किसी भी विषय को पढ़ें, समझें, अनुभव करें और फिर अपने व्यवहार में उतारें।

कृपया कुतर्क और अनावश्यक बहस से बचें। यदि आपके कुछ सुझाव हों तो मर्यादित शब्दों में अवश्य लिखें।
सोशल मीडिया पर मर्यादा बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

पूरा आलेख ध्यानपूर्वक पढ़ने हेतु आपका हृदय से धन्यवाद।

यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो एक लाइक और प्यारा सा कमेंट अवश्य करें, जिससे मुझे इसी प्रकार की और वास्तु संबंधी पोस्ट लिखने की प्रेरणा मिलती रहे।

।। इति शुभम् ।।

रविवार, 10 जनवरी 2021

toilet ki disha vastu ke anusar । वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा

 toilet ki disha vastu ke anusar । वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा 

​"लाख कोशिशों के बाद भी घर में पैसा नहीं टिक रहा या कोई न कोई बीमार रहता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, इसका कारण आपके शौचालय की गलत स्थिति हो सकती है। जानिए कौन सी दिशा आपके लिए वरदान है और कौन सी अभिशाप।"

आज के समय में बन रहे ज्यादातर घरों में स्थान की कमी अथवा शहरी संस्कृति और शास्त्रों की अनभिज्ञता के कारण शौचालय का निर्माण गलत दिशा में हो जाता है जिससे उस घर मे रहने वाले परिवार को स्वास्थ्य और धन संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अतः जब भी घर में शौचालय का निर्माण कराया जाए तो उसे वास्तु के अनुसार ही करना चाहिए, नहीं तो ये घर में यही शौचालय negative energy नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का कारण बनते हैं। इनकी गलत दिशा के कारण परिवार के लोगों का स्वास्थ्य खराब बना रह सकता है। तो आइए मित्रों जानते हैं कि शौचालय निर्माण में किन मुख्य बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है?


शौचालय के उपयुक्त दिशा 

सर्वप्रथम वस्तुशात्र के अनुसार घर में शौचालय के लिए सबसे अच्छा स्थान SSW अथवा WNW एवं ESE का होता है। घर के मध्य में शौचालय नहीं बनाया जाना चाहिए यह घर (भवन) का ब्रह्म स्थल होता है यहां वास्तु पुरुष की नाभि होती है, यहां बना शौचालय स्वास्थ्य के साथ जीवन में संघर्ष की शक्ति को समाप्त करता है। ईशान अथवा नैऋत्य कोण में शौचालय का निर्माण निषिद्ध किया गया है। ईशान कोण में शौचालय होने से गृह-क्लेश में वृद्धि होती है साथ ही कैंसर जैसा भयंकर रोग होने कि संभावना रहिती है, घर के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, नए और शुभ विचार नहीं आते, घर को आर्थिक संकटों का सामना निरंतर करना पड़ता है तथा सारे घर में negative energy अपवित्रता का वातावरण हमेशा बना रहता है। वहीं नैऋत्य कोण में शौचालय बनाने से मानसिक अस्थिरता, संबंधों में खटास, प्रगति में बाधा, नजर दोष तथा शारीरिक कष्टों में वृद्धि होती है।

शौचालय के अंदर की व्यवस्था 

यदि शौचालय कमरे के साथ ही बनाना हो तो इसे कमरे के वायव्य कोण में बनाना चाहिए। नैऋत्य कोण में शौचालय निर्माण सर्वथा निषिद्ध है। शौचालय में ताजी हवा तथा प्रकाश के आगमन की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। शौचालय का दरवाजा पूर्व अथवा अग्नि कोण में होना चाहिए तथा टॉयलेट सीट इस प्रकार फिट होनी चाहिए कि सीट पर बैठते समय व्यक्ति का मुख दक्षिण अथवा उत्तर दिशा की ओर रहे, भूलकर भी मुख पूर्व अथवा पश्चिम दिशा की ओर नहीं करना चाहिए।

शौचालय में पानी की व्यवस्था पूर्व अथवा उत्तर दिशा में होनी चाहिए, अगर वाशबेसिन भी शौचालय में लगाए जाने हैं तो वह भी पूर्व अथवा उत्तर दिशा में ही लगाने चाहिए। वैसे शौचालय में दर्पण का प्रयोग वर्जित है फिर भी अगर लगाना है तो उसे भी उत्तरी और पूर्वी दीवाल पर ही लगाएं। 

वेंटिलेशन, एग्जॉस्ट एवं ड्रेनेज की व्यवस्था 

शौचालय में शुद्ध वायु के आवागमन के लिए खिड़की या वेंटिलेशन उत्तर या पूर्व दिशा में होना उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इन दिशाओं से प्राकृतिक प्रकाश एवं शुद्ध वायु का प्रवेश होता है।

एग्जॉस्ट फैन लगाने के लिए वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि यह दिशा वायु तत्व की होती है और दूषित वायु को बाहर निकालने में सहायक होती है। वैकल्पिक रूप में, यदि वायव्य कोण उपलब्ध न हो, तो एग्जॉस्ट फैन उत्तर या पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है।

जल निकासी (ड्रेनेज) का ढाल इस प्रकार रखा जाए कि पानी का प्रवाह उत्तर, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रहे। इससे जल का उचित प्रवाह बना रहता है तथा स्थान स्वच्छ बना रहता है।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश 

शौचालय कभी भी रसोई घर के सामने ना बनाएं अगर शौचालय एवं स्नानघर इकट्ठा बनाना है तो यह पश्चिम वायव्य अथवा पूर्व आग्नेय दिशा में होना चाहिए इसमें लगे शावर व नल आदि ईशान कोण में तथा टॉयलेट की सीट वायव्य कोण में होनी चाहिए यह पश्चिम दिशा में भी सुविधा अनुसार रखी जा सकती है वाशबेसिन की स्थिति पश्चिम में होनी चाहिए।

शौचालय के लिए वास्तु टिप्स toilet vastu remedies

अगर किसी कारण वश शौचालय का निर्माण गलत हुआ है तो निम्नलिखित कुछ उपाय करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा को आने से रोका जा सकता है।

*अगर पूर्व दिशा और दक्षिण दिशा के मध्य स्थान तक शौचालय की खिड़की खुलती हो तो उस खिड़की में 3 क्रिस्टल की बॉल लाल रिबन में बांधकर लटका दें जब सूर्य की रश्मियां उस क्रिस्टल बॉल से टकराकर शौचालय में पड़ेंगी तो वहां की नकारात्मक ऊर्जा जल जाएगी।

* शौचालय की दुर्गंध घर में बिल्कुल न फैले इसका विशेष ध्यान रखें, इसके लिए सुगंधित चीजों का छिड़काव आदि करें।

* शौचालय में किसी सूखे स्थान पर समुद्री नमक किसी कांच की कटोरी आदि में भरकर रखे और सप्ताह में एक बार उसी कमोड में डालकर फ्लश कर दें तथा वापस नया नमक रख दें।

नोट- इस तरह के कुछ उपाय करने से बहोत हद तक सकारात्मक लाभ उठाया जा सकता है, अधिक जानकारी के लिए अपने वास्तु सलाहकार की मदत लें।


मित्रों यह निरंतर कार्य अनुभव के आधार पर लिखा आलेख है, वास्तु को लेकर बहुत मत-मतांतर हैं अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, कुतर्क और बिना मतलब की बहस ना करें। मेरा यह प्रयास, समाज को वास्तु विषय कि सरल जानकारी साझा करना है, जिससे लोग वास्तु को लेकर भ्रम और डर से बाहर आकर खुद अपने घर को सुधार सकें। अगर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद 

नोट — उक्त उपाय करने से बहुत हद तक सकारात्मक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए अपने वास्तु सलाहकार का मार्गदर्शन प्राप्त करें।

रविवार, 27 दिसंबर 2020

paschim disha vastu shastra । पश्चिम दिशा वास्तु शास्त्र

पश्चिम दिशा वास्तु शास्त्र । paschim disha

पश्चिम दिशा के स्वामी ग्रह शनि हैं तथा देवता वरुण है। यह दिशा वायु तत्व को प्रभावित करती है। शनि को ज्योतिष में भगवान शंकर द्वारा न्यायाधीश की पदवी प्राप्त हुई है। यह हमारे कर्मो के आधार पर फला-फल की न्यायोचित व्यवस्था करते हैं। 

paschim disha vastu shastra ।  पश्चिम दिशा वास्तु शास्त्र



क्यों की आज कलयुग में बुरे कर्मों का बोलबाला है, सो अधिकांश लोग शनि देव को लेकर भय एवं भ्रम की स्थिति में रहते हैं। वास्तु में इस दिशा को कारोबार, गौरव, स्थायित्व, यश और सौभाग्य के लीये जाना जाता है।

इस दिशा में सूर्यास्त होता है, वहीँ आम जनमानस में डूबते हुए सूर्य को देखना शुभ नहीं माना जाता क्यों की सूर्य की ढलती हुई किरणे हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं इसलिए आवश्यक है कि हम भवन में पश्चिम दिशा में भारी और ऊँचा निर्माण करें। 

वास्तु अनुसार इस दिशा में डाइनिग रूम बनवाना शुभ होता है। यहाँ शयनकक्ष भी बनाना शुभ होता है।  वास्तु आचार्य उदय प्रकाश शर्मा के अनुभव के अनुसार इस दिशा में बच्चों के लिए उनके पढ़ने का कमरा बनवाना उत्तम होता है क्यों की शनि ग्रह किसी भी विषय की गहराई में जाने की शक्ति प्रदान करते हैं सो यहाँ बच्चों में गंभीरता आती हैं और वह बुद्धिजीवी होते हैं। 

यह दिशा जल के देवता वरुण की है इसलिए यहाँ रसोईघर अच्छा नहीं माना गया है। रसोई में अग्नि की प्रधानता होती है और अग्नि एवं जल आपस में शत्रु होते हैं। वैसे इसके अलावां इस दिशा में लगभग सभी निर्माण किये जा सकते हैं।

।। इति शुभम् ।।


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गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

वास्तु अनुसार फैक्ट्री में तैयार माल कहाँ रखें । taiyar mal factory me kahn rakhen

 वास्तु अनुसार फैक्ट्री में तैयार माल कहाँ रखें ?


फैक्ट्री निर्माण में वास्तु सिद्धांतों व उनके सूत्रों का पालन करना चाहिए जिससे उस स्थान पे पंच तत्वों का ठीक से समन्वय हो और उस फैक्ट्री में जिस भी किसी चीज का निर्माण हो रहा है वह सही तथा फिट हो और जब वह वहां से निर्मित होकर बाजार में पहुंचे तो अपनी गुणवत्ता से उपभोक्ताओं का दिल जीत सके जिससे मालिक को उसका अच्छा मूल्य प्राप्त हो और वह लाभवन्तित हो सके।

वास्तु अनुसार फैक्ट्री में तैयार माल कहाँ रखें । taiyar mal factory me kahn rakhen


पाठकों मै वास्तु आचार्य उदय प्रकाश शर्मा अपने अनेकों फैक्ट्री के वास्तु विजिट में पाया है की उस फैक्ट्री में अच्छी गुणवत्ता वाले तैयार सामान के आर्डर बिलकुल न के बराबर होते हैं, जिसका मुख्य कारण होता है वहां तैयार माल का गलत जोंन में रखा होना। हम सभी जानते हैं कि ज्यादातर फैक्ट्री ही सभी व्यवसाय का आधार होती है, जिनसे मालिक के साथ-साथ मैनेजमेंट टीम, तकनीशियन, लेबर, ट्रांसपोर्ट आदि सीधे जुड़े होते हैं और कंपनी में निर्माण होने वाली वस्तु और उसके लाभ से प्रभावित होते हैं। अब अगर फैक्ट्री में तैयार माल मार्किट में जायेगा ही नहीं अर्थात उस माल का आर्डर ही नहीं आयेगा तो फैक्ट्री मालिक के साथ-साथ फैक्ट्री से जुडा हर व्यक्ति इससे प्रभावित होगा, तो आइये जानते हैं कि इसके लिए फैक्ट्री का कौन सा जोंन वास्तु अनुसार अच्छा माना गया है।


चाहे किसी भी चीज का फैक्ट्री में निर्माण होता हो वहां तैयार सामान (finished goods) को हमेसा वायव्य कोण ( north weast) में रखना चाहिए। यह दिशा वायु प्रधान होने से वहां रखे तैयार सामान को जल्दी से जल्दी बिकने में सहायता करेगी अर्थात उस सामान का आर्डर डिस्ट्रीब्यूटर की तरफ से जल्दी आयेगा। वायव्य कोण चन्द्रमा की दिशा है और चंद्रमा का स्वभाव चंचलता भरा होता है उसकी इसी चंचलता के फल स्वरूप तैयार माल वहां टिककर रहता नहीं बल्कि वायु के वेग से अपने सही स्थान (मार्किट और ग्राहक) तक पहुंच जाता है, और नए आर्डर का श्रोत निरंतर खुला रहता है। अगर गलती से भी तैयार माल नैरित्य कोण अर्थात पृथ्वी दिशा में रखा गया है तो वह स्टेबल जोंन में आ जायेगा जिससे उसका आर्डर बिलकुल न के बराबर ही रहेगा, तथा मिला हुआ आर्डर भी बार-बार कैंसिल होने की सम्भावना बनेगी अतः फैक्ट्री मालिक को फैक्ट्री का निर्माण करते समय अवश्य ध्यान रखना चाहिए।

अगर पहले से ही फैक्ट्री  स्थापित है जिसमे इस तरह की अथवा अन्य अनचाही अड़चने आ रही हैं तो मित्रों मैं आप का अपना /वास्तु सलाहकार/ पं. उदयप्रकाश शर्मा आप से इतना ही कहना चाहूंगा कि अपने किस्मत को कोसने के बजाय हमे यह समझना चाहिए कि इस युग में मृत्यु को छोड़कर हर समस्या का समाधान होता है, बात है जागरूकता की। मैंने अपने वर्षों के अनुभव में छोटे बड़े कई उद्योगों का सफलता पूर्वक उपचार किया है जिससे बड़े अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। 

आज विज्ञान का युग हैं। आज आधुनिक रूप से आधुनिक यंत्रो द्वारा सटीक रूप से Positive - Negative ऊर्जाओं का सोधन कर पाना संभव हुआ है अगर संबंधित स्थान पे नकारात्मक ऊर्जा है अथवा ऊर्जा का अभाव है अर्थात वहां शून्य ऊर्जा है तो वहां प्राण ऊर्जा का सामंजस्य स्थापित करने हेतु धरती के चुम्बकीय क्षेत्र उत्तरी ध्रुव- दक्षिणी ध्रुव व अंतरिक्ष की शुभ ऊर्जाओं को आकर्षित करना पड़ता है जिसके लिए आवस्यकता अनुसार वैज्ञानिक यंत्र, पिरामिड, ऊर्जा प्लेट, क्रिस्टल एवं रत्न-उपरत्नों के कोणीय प्रभाव, तथा धातुवों से बनी विभिन्न कोणीय आकृतियों का प्रयोग करना होता है। कोई नकारात्मक दोष वहां पर है तो पूजा-हवन भी करवाना पड़ता है I अतः आप के औद्योगिक परिसर में फैक्ट्री-कारखाने में कोई वास्तु दोष हो तो निःसंकोच आप को किसी कुशल वास्तुशास्त्री से संपर्क कर उनसे परामर्श लेना चाहिए और संबंधित स्थान का पूरे वैज्ञानिक विधि से जांच करवानी चाहिए मित्रों अगर वहां ऐसा कुछ भी हो जिससे अनचाही पीड़ा और उद्योग में असफलता मिल रही हो तो अपने इष्टदेव को प्रणाम कर उनसे आज्ञा ले उस समस्या का उचित उपाय करवाना चाहिए। और अपने औद्योगिक विकाश को गति देनी चाहिए।

।। इति शुभम् ।।

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गुरुवार, 20 अगस्त 2020

कंपास से घर की सही दिशा कैसे जाने? Compass se ghar ki sahi disha kaise jane?

कम्पास से घर की सही दिशा कैसे जानें? 

कम्पास से घर की सही दिशा कैसे रही है?  कंपास से घर की बात क्या है?



किसी भी घर प्लॉट शॉप फैक्ट्री की सही दिशा को कंपास के माध्यम से कैसे जाने जिससे हम निश्चिंत हो जाएं कि हमारे घर की दिशा क्या है।

रविवार, 10 मई 2020

aroma vastu । अरोमा वास्तु और सुगंध चिकित्सा

aroma vastu । अरोमा वास्तु और सुगंध चिकित्सा

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aroma vastu

Essential Oils

सुगंध के हम सब दीवाने होते हैं, सुगंध जहां हमारे मन को सुकून देती है वहीं यह हमारे आस-पास के वातावरण को महका कर वहां की नकारत्मक उर्जा को भी समाप्त करती है। यह एक ऐसी चीज है जो पलक झपकते ही हमारे मूड तथा नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक असर डालती है और हम भीनी-भीनी सुगंध में खो कर अपने तनाव को भूल कर प्रसन्न हो जाते हैं।

सौभाग्य से हमारे देश की मिट्टी में सुगंधित फल-फूल तथा औषधीय जड़ी-बूटियों की सम्पन्नता सदा से रही है जिसका हमारे पूर्वजों ने हमेसा विभिन्न रूपों में जैसे विविध प्राकृतिक फूल, फल, पत्ती, पौधों की जड़ उनके तने अथवा बीज के अर्क या तेल से निकलने वाली विशिष्ट सुगंधों का विशिष्ट प्रयोग तथा देवताओं की प्रसन्नता के लिए सुगंधित धूप व विभिन्न फूलों जैसे केवड़ा, चमेली, मोगरा, गुलाब आदि के इत्र, का प्रयोग सदियों पूर्व से ही किया है।

एसेंशियल ऑयल सुगंधित और काफी आरामदायक होते हैं। ये हमे मानसिक सुकून देते हैं व हमारे दिमाग को ताजा रखते हैं। कुछ एसेंशियल ऑयल हैं जिन्हें शरीर पर लगाने से शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। वहीं ये दिमाग को आराम पहुंचाने के साथ चिंता की भावना को भी कम करते है। एसेंशियल ऑयल जैसे लैवेंडर ऑयल, लाइम ऑयल, ग्रेपफ्रूट ऑयल आदि हमें तनाव से छुटकारा दिलाने और दिमाग को शांत करने में हमारी मदद करते हैं। शोध में भी यह पाया गया है कि Essential Oils का दिमाग और शरीर पर जबरदस्त प्रभाव होता है। ज्यादातर एसेंशियल ऑयल रक्तचाप को नियंत्रित करने में हमारी मदद करते हैं और तनाव को कम करते हैं।

आजकल मार्किट में कई अलग-अलग फ्लेवर के एसेंशियल ऑयल मिलते हैं जिनमे कुछ प्रमुख ऑयल हैं जैसे- लेवेंडर, लेमनग्रास, रोज, ऑरेंज, पिपरमिंट आदि.. जिनकी सुगंध से हम सभी परिचित है।

वहीँ आज आज के समय में इन्हें ज्यादातर वास्तु विशेषज्ञ, ज्योतिषी, रेकी मास्टर अपने-अपनेे ज्ञान तथा अनुभव के अनुसार इनका मिश्रित प्रयोग कर के चमत्कारी प्रभाव प्राप्त कर रहे हैं। मेरे प्रिय पाठकों आइये जानते हैं की इन अलग-अलग फ्लेवर्स के

लैवेंडर ऑयल Lavender Oil

लैवेंडर ऑयल हमारे दिमाग पर सूदिंग इफेक्ट डालता है। यह रिलैक्स करने और मानसिक शांति प्राप्त करने में हमारी मदद करता है। यह दिल की धड़कन को शांत करने में मदद करता है और तनाव से भी हमे राहत देता है। सिर दर्द को कम करने के लिए हम माथे पर लैवेंडर एसेंशियल ऑयल लगा सकते हैं।

रोज ऑयल Rose Oil

रोज़ एसेंशियल ऑयल दिल को हील करने और चिंता से छुटकारा पाने में हमारी मदद करता है। इसकी खुशबू से तनाव कम होता है और पैनिक अटैक की संभावनाएं कम होती हैं। हम रोज़ एसेंशियल ऑयल को सांस के साथ इन्हेल करके अथवा डिफ्यूजर के द्वारा इसकी सुगन्धित खुशबू अपने घर में महसूस कर सकते हैं इससे हमे बहोत आराम मिलता है।

लैमन ग्रास ऑयल Lemongrass Oil

लेमनग्रास एसेंशियल ऑयल में कुछ ख़ास औषधीय गुण होते हैं और यह प्रभावी ढंग से हमारे तनाव को कम करता है। इसके खुशबूदार गुण चिंता और तनाव को दूर करने में हमारी मदद करते हैं। यह दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करता है। हम इसे सीधे से सूँघ सकते हैं। इसके अलावा, हम लंबे समय तक राहत पाने के लिए घर व ऑफिस में इसे फ्रेशनर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑरेंज ऑयल Orange Oil

ऑरेंज एक सिट्रस फ्रूट है जो हमारी तंत्रिकाओं को शांत करने में हमारी मदद करता है। ऑरेंज एसेंशियल ऑयल का प्रयोग करने से चिंता और तनाव से छुटकारा पा सकते है। हम अपने दिल-दिमगा को शांत करने के लिए सीधे इसे सूंघ सकते हैं। अथवा इसे रुम फ्रेसनर के रूप में भी इस्तेमाल सकते हैं।

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पिपरमिंट ऑयल Peppermint Oil

पिपरमिंट एसेंशियल ऑयल तनाव और चिंता से छुटकारा पाने के लिए बेहद उपयोगी है। इसमें मेन्थॉल मौजूद होता है जो मन को शीतल करता है। यह हमको सचेत रखने में हमारी मदद करता है और मन की बेचैनी को कम करता है। हम इसे भी रुम फ्रेशनर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा इसे अपने कंधे, कलाई और गर्दन पर भी इसे लगा सकते हैं।

ऐसे अनेक फ्लेवर मौजूद हैं जिनका बहुताय प्रयोग होता है। इन प्राकृतिक सुगंधों के द्वारा जहां हमारे मन को  सुकून प्राप्त होता है वहीँ  हमारे शरीर के सातों ऊर्जा चक्रों मूलाधार, स्वाधिष्ठाना.... आदि कि चिकित्सा (संतुलन) संभव है साथ ही हमारे रहने के स्थान ( हमारे भवन ) की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर वहां पर वास्तुरूपक सकारात्मक ऊर्जा का सृजन भी इन अरोमा पद्धति द्वारा किया जा सकता हैं।

अरोमा ऑइल को उपयोग करने के विभिन्न तरीके हैं जैसे- इन्हें सूंघ कर (Inhale), सीधे अथवा जैतून के तेल में मिक्स कर असंतुलित चक्र से संबंधित स्थान पर त्वचा पे लगा कर, स्प्रे की बॉटल में डालकर पानी के साथ कमरे में स्प्रे ( छिड़काव ) कर के तथा डिफ्यूजर अथवा वेपोराइजर में डालकर भाँप ( Steam ) ले कर किया जा सकता है ।

घर मे अत्यधिक मात्रा में नेगेटिव ऊर्जा होने पर एक कांच की कटोरी में अक्खा नमक की डली में कुछ बूंदें उस ऑइल की जिनको वास्तु दोष अथवा नकारात्मक ऊर्जा को प्रायः दूर करने के लिए वास्तु शास्त्री प्रयोग में लाते हैं डालकर घर के मुख्य दरवाजे पर रखने से घर की कैसी भी नकारात्मक ऊर्जा वहां से गायब हो जाती है।

।।इति शुभम्।।

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शनिवार, 2 मई 2020

uday prakash sharma । आचार्य उदय प्रकाश शर्मा

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रिसर्च एस्ट्रो इंडिया के सौजन्यसे 


वैदिक वास्तु एवं ज्योतिष के क्षेत्र में आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा ने अपने अनुभव और ज्ञान से देश भर मे अपनी एक अलग पहचान बनाई है। करीब 17 वर्षों से भी ज्यादा अनुभव रखने वाले उदय प्रकाश शर्मा को ज्योतिष एवं वास्तु शात्र का ज्ञान विरासत में अपने पिता पं. श्री राम कृपाल शर्मा से प्राप्त हुआ। आगे चलकर अपनी  शिक्षा पूरी करने के बाद आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा ने ज्योतिष एवं वास्तुशात्र  के दुर्लभ एवं गूढ़ रहस्य अपने पूज्य गुरुदेव डॉक्टर नागेन्द्र पांडे जी ( पूर्व. कुलपति संपूर्णानद संस्कृत विश्वविद्यालय / अध्यक्ष. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास/ अध्यक्ष.  ज्योतिष विज्ञान समिति वाराणसी ) से प्राप्त किया, आप को गुरुदेव की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त रहा। साथ ही आप ने  आध्यात्मिक-चक्र,  मेडीटेशन एवं प्राणिक हीलिंग की शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही गुरु के सानिध्य मे उनका प्रयोगात्मक ज्ञान भी ग्रहण कीया। 


आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा के उपलब्धियों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। क्यूँ की आप ने मुंबई महाराष्ट्र मे अपने जीवन का  बहुत समय बिताया हैं, अतः आप ने गुरुदेव की कृपा और आशीर्वाद से मुंबई घाटकोपर महाराष्ट्र राज्य में स्थित के. जे सोमैया कॉलेज ऑफआर्ट्स एंड कॉमर्स मे कला एवं संस्कृत विभाग से ज्योतिष पाठ्यक्रम एवं पारंपरिक व वैदिक वास्तु शात्र की शिक्षा ली तथा वहा भी इन विषयो का गहन अध्ययन किया। साथ ही विश्व प्रसिद्ध GEO VASTU के संस्थापक एवं इंडस्ट्रियल वास्तु मे महारत रखने वाले, वास्तुविद. डॉ. राजेन्द्र के. जैन द्वारा वास्तु मे भूमि एनर्जी, भूगर्भ विज्ञान, जिओपैथिक ऊर्जा, एवं औरा स्कैन व डाउजिग का आधुनिक ज्ञान प्राप्त किया, व उनके साथ लंबे समय तक वास्तु विजिट एवं वास्तु समाधान के अंतर्गत  कार्य करके आधुनिक वास्तु की प्रयोगात्मक विधि का अनुभव भी प्राप्त किया। 


साथ ही आप ने लंबे समय तक मुंबई महारष्ट्र के ही एक प्रसिद्ध ज्योतिष शिक्षण संस्थान (ब्रह्मांड ज्योतिष संस्थान) मे भी इन्ही विषयों की शिक्षा ली और और अपने वरिष्ठ आचार्यों द्वारा प्रेरित करने पर ईसी  संस्थान  में लंबे समय तक ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के विद्यार्थियों को ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की शिक्षा भी प्रदान की। आप ज्योतिष, वास्तुशास्त्र  एवं आध्यात्मिक चक्र और मेडीटेशन के विषय पर निरंतर शोध परख आलेख लिखते रहते हैं। जो देश की कई प्रमुख  पत्र-पत्रिकओं में छपते रहते हैं। आप अपने आलेख/ब्लॉग udayvastu.com पे प्रकाशित भी करते रहते  है।


आचार्य उदय प्रकाश जी कहते हैं कि आज विज्ञान के  युग में  भी वास्तु और ज्योतिष शास्त्र का हमारे जीवन पर बहुत ही गहरा और महत्वपूर्ण प्रभाव है। ये दोनों शास्त्र हमें जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने के लिए हर क्षण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह पृथ्वी के मूलभूत पञ्चतत्व, सूर्य रश्मि, पृथ्वी के  घूर्णन बल और गति, तथा ग्रह पिंडों के पड़ने वाले प्रभाव का क्या असर मनुष्य एवं जड़-चेतन पर पड़ता है उसको दर्शाते हैं, और किस तरह से मनुष्य इन प्रकृतिक ऊर्जाओं के साथ समन्वय स्थापित कर के अपना जीवन सरल बनाए उसको प्रतिपादित करते हैं। 


अगर हम वास्तु शास्त्र की बात करें तो यह  शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो हमें बताता है कि कैसे हमारे आसपास के वातावरण को संतुलित और सकारात्मक बनाया जा सकता है। यह शास्त्र हमें प्लॉट, घर, ऑफिस, फैक्ट्री, दुकान अथवा किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जिससे हमें सुख, समृद्धि और शांति मिल सके।  वहीं अगर हम ज्योतिष शास्त्र को जाने तो यह भी एक  प्राचीन ज्ञान है जो हमें ग्रह, नक्षत्रों और तारों की चाल के माध्यम से जीवन को दिशा देने का प्रयास करता है। यह शास्त्र हमें हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि शिक्षा, कैरियर, संबंध, स्वास्थ्य और धन, के बारे में जानकारी प्रदान करता है। अतः हमारे लिए इन दोनों शास्त्रों का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने जीवन को पूरी तरह से इनके अनुसार चलाना चाहिए। हमें इन शास्त्रों को एक मार्गदर्शक के रूप में लेना चाहिए और अपने जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने के लिए इनका उपयोग करना चाहिए। 


जब आवश्यक लगे तब अपनी जन्म कुंडली  अपने घर, प्लॉट/फैक्ट्री/ऑफिस/दुकान आदि की किसी कुशल आचार्य (जो इन विषयों को ठीक से जाननने  वाला और अनुभवी  हो) से जांच करवाकर उनके निर्देश अनुसार बदलाव करना चाहिए, जैसे कि घर के मुख्य द्वार की दिशा को जानकर उसका वास्तुसम्मत ध्यान रखना, घर में पौधे लगाना, रगों द्वारा ऊर्जा को बढ़ाना, निर्माण से पूर्व भूमि/प्लॉट की जिओपैथिक ऊर्जा की जांच करवाना, जन्मकुंडली के अनुसार अपने ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने हेतु रत्न-रुद्राक्ष  और क्रिस्टल का प्रयोग करना , भूमि की ऊर्जा बढ़ाने के लिए ब्रह्मनाभी का निर्माण करना, पूजा-मंत्र-जप एवं हवन करके अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध एवं साफ रखना, हमें बहुत ही सकारात्मक परिणाम दे सकता हैं ।


आज देश-विदेश से हजारों लोग आचार्य उदय प्रकाश शर्मा जी द्वारा बताये गए ज्योतिषीय एवं वास्तु उपायों से लाभवंतित हो रहे हैं। इनकी साधारण भाषाशैली की वजह से लोग इनकी बाते आसानी से समझ पाते हैं। यही वजह है कि आज विश्व भर से हजारों लोग,जो अपनी जिन्दगी से निराश हो चुके है, वो उदय प्रकाश शर्मा जी से संपर्क करते हैं, और उनके परामर्श द्वारा अपने जीवन में खुशहाली ला रहे हैं। लोगो की सेवाओं को लेकर आचार्य जी ज़्यादातर देश के कई शहरो के भ्रमण/विजिट  पर रहते हैं। फोन के माध्यम से देश-विदेश के लोग भी आचार्य जी से अपनी जिज्ञासा का समाधान जानते रहते हैं। आप का मोबाईल नंबर +91 9867909898 है। आचार्य उदय प्रकाश शर्मा से आप विभिन्न सेवाओ के लिये विशेष रूप से संपर्क कर सकते है-


वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली का अध्ययन, घर/ऑफिस/फैक्ट्री/दुकान/शोरूम/प्लॉट-भूमि आदि के लिए वास्तु सलाह, प्रश्नकुंडली , मुहूर्त-विचार, वर-वधु कुंडली मेलापक, रुद्राक्ष एवं रत्न सलाह, चक्र एवं प्रणिक उपचार।

आप को औद्योगिक इकाइयों अर्थात इंडस्ट्रीयल वास्तु मे विशेष महारत प्राप्त है




Astrologer & Vastu Consultant, Geopaithic Expert, Numerologist,
Proficient Vedic Architectural Science, Gemstone and Crystal Advisor, Trainer for Aura Scanning, Healing and Balancing Chakras, Meditational Spiritual & Alternative Healers, Vastu Urja, Vastu Enargy, Vastu Consultant, Best Vastu Consultant In India, Best Vastu Consultant In Varanasi Uttar Pradesh, Best Vastu Consultant In Mumbai Maharashtra 


आप ने चक्र साधना के ऊपर एक ई-बुक भी लिखी है । जिसे देखने के लिए आप इस लिक पे जाये 
सात चक्रों का रहस्य एक परिचय

Uday Prakash Sharma


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बुधवार, 8 जनवरी 2020

ghar me negative energy I घर में नेगेटिव एनर्जी

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अगर हम कहीं अपने घर से दूर होंते हैं तो हमें हमारा घर याद अता है। कैसे भी काम से बाहर हों उसे पूरा कर के जल्दी ही अपने घर लौटना चाहते हैंI इस दुनियां में जो सुकून हमें अपने घर-परिवार में प्राप्त होता है सायद ही वैसा सुकून कहीं और मिले, हम सभी अपने परिवार के साथ चाहे कैसी भी स्थिति में रहते हों, कुछ नोक-झोक के साथ प्रायः खुश ही रहते हैं । 

पर मुश्किल तब हो जाती है जब उसी घर में अचानक से तमाम तरह की मुश्किलें उत्पन्न हो जाती हैंI कहीं बीमारियाँ परिवार को अपने चपेट में ले लेती हैं, कहीं परिवार,पडोसी,सगे सम्बन्धियों से बिना बात के आचानक लड़ाई- झगड़े होने लगते हैं, मन में अंजाना सा भय व्याप्त हो जाता है, घर में ऐसी अजीब-अजीब सी चीजें होने लगती हैं जिससे हम घबरा उठते हैं और सोचते हैं कि ऐसा अचानक से क्या हो गया हमारे घर में, घर को किसकी नजर लग गयी है। 

तो पाठकगण वास्तुशास्त्र में ऐसे कई कारण कहे गए हैं जिनके होने से हमारे घर में नकारात्मक ऊर्जा Negative energy का वाश हो जाता है जिसके सिकार होकर हम अजीब-अजीब सी समस्याओं में घिर जाते हैं I तो आइये आप अपने इस वास्तु मित्र पं. उदय प्रकाश शर्मा से जाने कि इसका कारण क्या होता है और इससे कौन-कौन सी परेसनियाँ उत्पन्न होती हैं I
घर का वास्तु व पारिवारिक रिश्ते 

ऐसा है तो घर में नेगेटिव एनर्जी है ?

- घर मे प्रवेश करते ही आप को उदासी महसूस हो,- घर मे रहते हुए हर पल आलस्य आता हो और घर से बाहर निकलते ही आप स्फूर्ति महसूस करें,

- कुछ अच्छा न लगता हो, अक्सर बिना किसी बड़ी बात के भी घर मे चिड़चिड़ का माहौल बन जाये,

- संध्या समय भय महसूस हो,

- किचन में अक्सर बर्तन गिरे और उनकी कर्कश आवाज हो,

- घर की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं जल्दी-जल्दी खराब हो जाएं,

- तुलसी का या अन्य कोई पौधा आप घर मे लगाएं और वह बार-बार सूख जाए,

- घर मे अजीब जी महक आती हो और ढूंढने पर उसका सोर्स न मालूम पड़े,

- घर में होनेपर नेगेटिव सोच ज्यादा आये, घर मे ज्यादा समय बिताने वाले को अत्यधिक गुस्सा आये,

- पूजा-पाठ में मन न लगना,

- अक्सर मूड खराब रहना,

- घर मे लगातार किसी न किसी का बीमार होते रहना,

- रात्रि को नींद न आना,

- घर मे कोई चीज अचानक गुम हो जाये फिर कितना भी ढूंढने से न मिले अचानक से दूसरे दिन मिल जाये, इस तरह की चीजें अगर लगातार हो रही हों तो यह निश्चित है कि आप के घर में नेगेटिव ऊर्जा है।

हम सभी जानते हैं कि दो तरह की ऊर्जा होती है सकारात्मक व नकारात्मक। हमारे जीवन को यही ऊर्जाएं सुख और दुख देने के लिए जिम्मेदार होती हैं इनका हमारे ऊपर बहोत ही गहरा प्रभाव होता है।

हमारे घर में नकारत्मक ऊर्जा होने के कई कारण होते हैं? 

- जैसे- घर में वास्तु दोष का होना,

- ग्रहदेव बृहस्पति का प्रभाव न्यून होना,

- घर मे फालतू के समान जिनका उपयोग न हो पड़े रहना,

- बिना धोए हुए कपड़े, गंदे बिस्तर बदबूदार तकिये होना,

- दरवाजे पे जुते-चप्पल का ढेर होना खासकर ऐसे जुते-चप्पल जिनका प्रयोग हम नहीं करते,

- घर के ज्यादातर मेंबर्स की कुंडली में अशुभ राहु की दशा एक साथ चलना,

- घर मे प्रेत बाधा अथवा आत्माओं का साया होना,

- घर में बंद घड़ियां पड़ी होना,

- कई-कई महीने किचन की सफाई नहीं होना, रात भर सिंक में जूठे बर्तनों का रहना,

- फ्रिज में गुथा हुआ आँटा रात्रि में रखना (जो एक पिंड के रूप में होता है जिसे आत्माए अपना आहार समझ घर में आने लगती हैं ),

- घर मे फ्रिज में लम्बे समय तक मिठाई का रखना ( मिठाइयों के पीछे भी बुरी शक्तियां घर में आती हैं ) मिठाई को जल्दी खाकर खतम कर देना चाहिए ,

- घर मे बिल्ली पाली हुई होना,

ऐसे अनेक कारण हो सकते हैं घर मे नकारात्मक ऊर्जा होंने के


घर मे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएसन से नुकसान

घर से नेगेटिव एनर्जी भगाने के कुछ उपाय ?

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घर में नकारात्मक ऊर्जा भगाने के उपाय

अगर आप को ऐसा लगे कि आप का घर नेगेटिव ऊर्जा के चपेट में आ गया है तो नीचे लिखे कुछ उपाय करें आप को राहत जरूर मिलेगी, किसी अच्छे वास्तुशास्त्री से संपर्क करें, उनकी सलाह लें और बताए हुए उपाय पे अमल करें आप को पॉजिटिव परिवर्तन महसूस होगा।

- घर मे नित्य 21 दिन समुद्री नमक का पोंछा लगाएं गुरुवार को छोड़कर। शाम के समय घर के सभी कोनो में नमक बिखरा दें और सुबह उस नमक को बाहर फेंक दें।

- नित्य सुगंधित जड़ी-बूटियों की धूप जलाएं ऐसा करने से घर मे पैर पसारे नकारात्मक ऊर्जा को जाना होगा।

- घर के सारे समान को व्यवस्थित करें जो जरूरत का सामान न हो उसे कबाड़ में बेच दें या फेक दें।

- घर के जाले समय-समय पर साफ करें।

-  एक कटोरी में जल लेकर उसे तिन चार घंटे के लिए सूर्य की रोशनी में रख दें और फिर उसे भगवान का स्मरण करते हुवे पुरे घर में आम या अशोक के पत्ते अथवा दूर्वा से छिडक दें इसके लिय आप गौ मूत्र या गंगाजल का भी प्रयोग कर सकते है।

- घर के जो फर्नीचर जगह से खिसकाए जा सकें उन्हें महीने में एक बार जगह से एक सेंटीमीटर इधर-उधर खिसका दें।

-  घर की सभी खिडकियों को हर रोज कम से कम आधे घंटे के लिए अवशय खोल दें ।

- कांच के गिलास में पानी भरकर उसमे एक नींबू डालें और उत्तर दिशा में रख दें, और हर शनिवार पानी और नीबूं बदल दें।

- घर के मुख्य जगहों पर लाल रंग का स्वस्तिक बनाएं।

- संध्या समय पूजा के संमय आरती करें और जोर-जोर से ताली बजाएं।

- घर के खिडकियों पे फिटकरी के कुछ टुकड़े रक्खें ।

- घर मे तुलसी का पौधा लगाए व तुलशी के अर्क अथवा तेल को पानी की बोतल में कुछ बूंद डालकर घर में छिड़कें।

-  शंख की ध्वनी भी इस कार्य के लिय उत्तम मानी जाती है और शंख से घर में जल भी छिडक सकते है।
-हर दिन घर में भगवान बजरंगबली को धुप दिखाकर श्रद्धा पूर्वक बजरंग बाण का पाठ करें और उनसे अपनी समस्या से उबरने की प्रार्थना करें। 

-रात्रि में जब सभी लोग भोजन कर के सोने जाएँ तब कपुरदानी में कपूर जलाकर हर कमरे में उसकी लौ को दिखाएँ और फिर घर के मध्य में लाकर रख दें और उसे सुबह ही उठायें। 

इस तरह के बहोत उपाय हैं जो नकारात्मक ऊर्जा को भगाने में सहायक हैं आप पूरे विश्वास के साथ इन्हें अपनाएं इनसे बहोत ही उत्साहवर्धक परिणाम मिलेगा ।

।। इति शुभम् ।।

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