ॐ श्री मार्कंडेय महादेवाय नमः

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्यवेत्।
सब सुखी हों । सभी निरोग हों । सब कल्याण को देखें । किसी को लेसमात्र दुःख न हो ।

Pandit Uday Prakash
Astrologer, Vastu Consultant, Spiritual & Alternative Healers

सोमवार, 4 मई 2026

Vastushastra aur Surya ka Sambandh वास्तुशास्त्र और सूर्य का संबंध क्या है?

वास्तुशास्त्र और सूर्य का संबंध क्या है?


 हर दिन सूर्य आपके घर से दिखता है सवाल ये है कि क्या वो आपके घर या जीवन में प्रवेश कर पा रहा है? 

vastu me surya ka mahatva


आइए जानते हैं.. 
जब हम किसी घर या प्लॉट को केवल ईंट-पत्थर का ढांचा मानते हैं, तब हम उसकी वास्तविक शक्ति को नजर अंदाज कर देते हैं। वास्तव में, घर एक जीवंत ऊर्जा का केंद्र होता है और इस ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य का दैनिक भ्रमण हि है। वास्तुशास्त्र इसी प्राकृतिक ऊर्जा प्रवाह को समझकर जीवन को संतुलित करने की एक गहन प्रणाली प्रस्तुत करता है। यदि एक प्लॉट को केंद्र में रखा जाए और उसमें रहने वाले व्यक्ति की ऊर्जा लगभग (उदाहरण- के लिए मान लें तो) 6.300 हर्ट्ज मानी जाए, तो सूर्य की दिनभर की गति केवल आकाशीय परिवर्तन नहीं बल्कि ऊर्जा के क्रमिक उतार-चढ़ाव का एक वैज्ञानिक आधार बन जाती है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य पूर्व दिशा (East) मे होता है

प्रातःकाल जब सूर्य पूर्व (East) दिशा में उदित होता है, उस समय उसकी ऊर्जा लगभग 4.100 हर्ट्ज होती है, जो मनुष्य की ऊर्जा से कम होती है। यही कारण है कि सुबह 6 am से 8 am के बीच सूर्य की किरणें कोमल, शांत और जीवनदायिनी प्रतीत होती हैं। इस समय व्यक्ति सूर्य को खुली आंखों से देख सकता है और उसकी ऊर्जा को सहज रूप से अनुभव कर सकता है। यह काल मानसिक शुद्धि, ध्यान और प्राणायाम के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। वास्तुशास्त्र में भी पूर्व दिशा को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख द्वार है। इसी लिए वास्तु में पूर्व दिशा को हल्का, साफ-सुथरा और मुख्य द्वार बहुत शुभ माना गया है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य अग्नि कोण (S/E) मे होता है

आगे जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से दक्षिण-पूर्व (S/E) अर्थात अग्नि कोण की ओर बढ़ता है, उसकी ऊर्जा में वृद्धि होने लगती है और वह अल्ट्रावायलेट किरणों के रूप में परिवर्तित होकर लगभग 6.300 हर्ट्ज तक पहुंच जाती है , जो मनुष्य की ऊर्जा के समांतर हो जाती है। यह समय 9 am से 11 am तक का होता है, इसी समय में व्यक्ति पूरी तरह सक्रिय, चुस्त-दुरुस्त, ताजगी से भरपूर होकर हर कार्य के लिए तैयार रहता है। सामान्यतः लोग इस समय में अपने दैनिक कार्यों की शुरुआत करते हैं, अपने ऑफिस अथवा व्यापार के लिए निकलते हैं, और जीवन में उत्साह तथा उत्पादकता का अनुभव करते हैं। वास्तु के अनुसार अग्नि कोण को ऊर्जा और क्रियाशीलता का क्षेत्र माना गया है, इसलिए इस दिशा में रसोई या अग्नि से संबंधित कार्यों का स्थान होना शुभ माना जाता है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य दक्षिण दिशा (South) मे होता है

दोपहर के समय 12 से 2 pm के बीच जब सूर्य दक्षिण दिशा में पहुंचता है, तब उसकी ऊर्जा अपने चरम पर होती है और लगभग 7.100 हर्ट्ज तक पहुंच जाती है, जो मनुष्य की ऊर्जा से बहुत अधिक होती है। यह अवस्था सूर्य के प्रचंड और प्रभावशाली रूप को दर्शाती है, और यह आसमान में एकदम से हमारे सर के ऊपर होता है, इसे हम एक पिता के समान गरिमापूर्ण, अनुशासनात्मक और प्रभाव शक्ति का प्रतीक मान सकते है। विशेषकर गर्मियों में इस तीव्र ऊर्जा के कारण लोग प्रचंड धूप से बचने का प्रयास करते है और अधिकतर समय घर के भीतर या छाँव मे रहना पसंद करते हैं। वास्तु के अनुसार शायद इसलिए ही दक्षिण दिशा को स्थिर और भारी और ऊंचा रखने के लिए कहा गया है, और दक्षिण दिशा मे ऊंचे पेड़ लगाने की बात वास्तु मे की जाती है, जिससे घर में सूर्य की इस प्रबल ऊर्जा को संतुलित किया जा सके।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य नैऋत्य दिशा (S/W) मे होता है

इसके पश्चात सूर्य 3 pm से 5 pm के मध्य, धीरे-धीरे नैऋत्य दिशा S/W, की ओर अग्रसर होता है, जहां उसकी ऊर्जा इन्फ्रारेड किरणों में परिवर्तित हो जाती है। जहां ताप वैसे ही रहता है पर प्रकाश धीरे धीरे कम हो रहा होता है, इस अवस्था में ऊर्जा की तीव्रता कम होकर स्थिरता की ओर बढ़ती है और इसका प्रभाव व्यक्ति के शरीर और मन पर थकान के रूप में दिखाई देता है। यह वही समय होता है जब व्यक्ति अपने दिनभर के कार्यों से निवृत्त होकर घर लौटने की तरफ और विश्राम की ओर अग्रसर होता है। वास्तुशास्त्र में नैऋत्य दिशा को स्थिरता, सुरक्षा और नियंत्रण का स्थान माना गया है, इसलिए यहां मास्टर बेडरूम का होना उपयुक्त समझा जाता है। इस दिशा को जितना अधिक भारी और ऊंचा किया जाता है, घर या अन्य निर्माण इस प्रकार की व्यवस्था की वजह से बहुत लाभ प्राप्त करता है।

वास्तु के अनुसार जब सूर्य पश्चिम दिशा (West) मे होता है

अब जब 6 बजे के आस-पास सूर्यास्त हो जाता है ( गर्मियों को छोड़कर क्योंकि अक्सर गर्मियों में सात या साढ़ेसात बजे तक सूर्यास्त होता है ) सो 7/8 बजे के बाद रात्रि होते ही धरती पर चंद्रमा की ऊर्जा सक्रिय हो जाती है, जो शीतल और शांत होती है, यह ऊर्जा मन और तन की शक्ति को पुनर्जीवित करने वाली होती है। अतः रात्रि में शयन के पश्चात यह शरीर और मन को पुनः संतुलित करने का अवसर प्रदान करती है, जिससे व्यक्ति अगले दिन सुबह फिर से ऊर्जावान होकर अपने कार्य-व्यापार में नई ताजगी के साथ पुनः प्रवेश करने के लिए तैयार हो सके। वास्तु के अनुसार शयनकक्ष की सही दिशा और व्यवस्था इस प्राकृतिक ऊर्जा को प्रभावी ढंग से ग्रहण करने में सहायक होती है।

इस प्रकार सूर्य का दैनिक भ्रमण यह स्पष्ट करता है कि वास्तुशास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं बल्कि ऊर्जा के संतुलन का विज्ञान है। जब घर या प्लॉट को इस प्राकृतिक ऊर्जा प्रवाह के अनुरूप बनाया जाता है, तब व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बना रहता है। यही वास्तु का मूल सिद्धांत है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके जीवन को अधिक संतुलित, स्वस्थ और समृद्ध बनाया जा सकता है।

प्रिय मित्रों मै आप का वास्तुमित्र आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा, मैने इस पोस्ट में संलग्न चित्र को केवल प्रतीकात्मक रूप में आप के सामने रखा है, जो सिर्फ यह दिखाता है कि किस प्रकार सूर्य अपने भ्रमण पथ से पृथ्वी पर अपना असर डालता है, अतः इस चित्र से यह विषय सरलता से समझने हेतु हि प्रयोग करें, इसे साइंस के मापदंडों पे न परखें।

प्रिय मित्रों मैने इस पोस्ट को निरंतर अध्ययन-अध्यापन, व अपने कार्य अनुभवों के आधार पर तैयार किया है, हम सभी जानते हैं कि वास्तुशास्त्र में बहुत मत-मतांतर हैं, अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, अपने व्यवहार में उतारें। कुतर्क और बिना मतलब की बहस न करें। यह मेरी अपनी इच्छा है कि वास्तु विषय को जिस सरल अंदाज से मै समझने का प्रयास करता हूं उसी सरल अंदाज में समाज से साझा करूँ, जिससे लोग वास्तु को लेकर भ्रम और डर में न पड़कर खुद अपने घर को सुधार सकें। अगर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने हेतु आप का धन्यवाद।  

मित्रों अगर आप को मेरी यह पोस्ट पसंद आई हो तो एक लाइक के साथ एक प्यारा सा कमेंट जरूर करें जिससे मुझे इसी प्रकार की और वास्तु की पोस्ट लिखने की प्रेरणा प्राप्त हो। 

।। इति शुभम् ।।


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Acharya Uday Praksh Sharma

                                                            
                                                  

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