ॐ श्री मार्कंडेय महादेवाय नमः

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्यवेत्।
सब सुखी हों । सभी निरोग हों । सब कल्याण को देखें । किसी को लेसमात्र दुःख न हो ।

Pandit Uday Prakash
Astrologer, Vastu Consultant, Spiritual & Alternative Healers
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मंगलवार, 7 मई 2024

padam kalsarp yog। पद्म कालसर्प योग

पद्म कालसर्प योग । padam kalsarp yog

जन्मकुण्डली में जब राहु पंचम व केतु एकादश भाव में हों तथा इस बीच सारे ग्रह हों तो पद्म नामक कालसर्प योग बनता है।

पद्म कालसर्प योग padam kaal sarp yog in hindi

इस योग के फल स्वरूप जातक को जल्दी संतान सुख नहीं मिलता। पुत्र संतान की चिंता रहती है। यदि संतान हो भी जाये तो बृद्धावस्था में अलग हो जाती है अथवा दूर चली जाती है।विद्याध्ययन में कुछ व्यवधान उपस्थित होता है। परंतु कालान्तर में वह व्यवधान समाप्त हो जाता है। जातक का स्वास्थ्य कभी-कभी असामान्य हो जाता है। इस योग के कारण दाम्पत्य जीवन सामान्य होते हुए भी कभी-कभी अधिक तनावपूर्ण हो जाता है। परिवार में जातक को अपयश मिलने का भी भय बना रहता है। जातक के मित्रगण स्वार्थी होते हैं और वे सब उसका पतन कराने में सहायक होते हैं। जातक को तनावग्रस्त जीवन व्यतीत करना पड़ता है। इस योग के प्रभाव से जातक के गुप्त शत्रू भी होते हैं। वे सब उसे नुकसान पहुंचाते हैं। उसके लाभ मार्ग में भी आंशिक बाधा उत्पन्न होती रहती है एवं चिंता के कारण जातक का जीवन संघर्षमय बना रहता है। जातक द्वारा अर्जित सम्पत्ति को प्राय: दूसरे लोग हड़प लेते हैं।प्रायः व्याधियों के कारण इलाज में अधिक धन खर्च हो जाने के कारण आर्थिक संकट उपस्थित हो जाता है। जातक वृध्दावस्था को लेकर अधिक चिंतित रहता है एवं कभी-कभी उसके मन में संन्यास ग्रहण करने की भावना भी जागृत हो जाती है। लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी एक समय ऐसा आता है कि यह जातक आर्थिक दृष्टि से बहुत मजबूत होता है, समाज में मान-सम्मान मिलता है और कारोबार भी ठीक रहता है यदि यह जातक अपना चाल-चलन ठीक रखें, मध्यपान न करें और अपने मित्र की सम्पत्ति को न हड़पे तो उपरोक्त कालसर्प प्रतिकूल प्रभाव लागू नहीं होते हैं।

पद्म कालसर्प योग का उपाय

* घर के शयनकक्ष में मोर पंख लगाएं तथा प्रतिदिन कम से कम एक बार मोर पंख अपने पुरे शारीर पे फिराऐं।

* किसी शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर चांदी का स्वस्तिक एवं दोनों ओर धातु से मिर्मित नाग चिपका दें।
* शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से व्रत प्रारंभ कर 18 शनिवारों तक व्रत करें और काला वस्त्र धारण कर 18 या 3 माला राहु के बीज मंत्र का जाप करें। फिर एक बर्तन में जल दुर्वा और कुश लेकर पीपल की जड़ में चढ़ाएं।
* भोजन में मीठा चूरमा, मीठी रोटी, समयानुसार रेवड़ी तिल के बने मीठे पदार्थ सेवन करें और यही वस्तुएं दान भी करें। रात में घी का दीपक जलाकर पीपल की जड़ में रख दें। नाग पंचमी का व्रत भी अवश्य करें।
* नित्य प्रति हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें और हर शनिवार को लाल कपड़े में आठ मुट्ठी भिंगोया चना व ग्यारह केले सामने रखकर हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और उन केलों को बंदरों को खिला दें और प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं और हनुमान जी की प्रतिमा पर चमेली के तेल में घुला सिंदूर चढ़ाएं और साथ ही श्री शनिदेव का तेलाभिषेक करें।
* श्रावण के महीने में प्रतिदिन स्नानोपरांत 11 माला ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जप करने के उपरांत शिवजी को बेलपत्र व गाय का दूध तथा गंगाजल चढ़ाएं तथा सोमवार का व्रत करें।

कालसर्प को लेकर पं. उदय प्रकाश शर्मा की अपनी बात

मुझे कुछ पाठकों ने मैसेज में लिखा की गुरु जी यह कालसर्प योग तो होता ही नहीं, इसका किसी शास्त्र में उल्लेख नहीं मिलता तो उन्हें मै इतना ही कहना चाहूँगा कि काफी समय से कालसर्प योग की सत्यता को लेकर गुरुजनों में मतभेद चल रहा है. कोई इसकी सत्यता पर ही सवाल उठा रहा है,कोई इसके पक्ष में खड़ा है.वास्तव में यह सही है की हमारे प्राचीन शास्त्रों में ऐसे किसी योग का उल्लेख नहीं मिलता, किन्तु ऐसे कई तथ्य हैं की जिन चीजों की जानकारी हमें पहले नहीं थी तथा उनकी खोज बाद में हुई, अब आप उन तथ्यों को यह कहकर नकार नहीं सकते की पहले के ग्रंथों में इनका उल्लेख नहीं मिलता, अब जैसे ब्लॉग पहले नहीं होता था, ईमेल पहले नहीं होती थी, लैपटॉप का पहले कहीं जिक्र नहीं मिलता, मगर आज यह मौजूद हैं उसी तरह युग युगांतर से हर विषय में शोध कार्य होता रहता है और जीवन में जो अनुभव में आता है, वह प्रतिपादित भी होता है तो उसे अपने अनुभव की कसौटी पर परखने के बाद हमें स्वीकार्य करना ही पड़ता है।

कहने का तात्पर्य यह है की यदि विद्वान् गुरुजनों ने किसी तथ्य की खोज बाद के काल में की है तो उस पर पूर्ण अध्ययन किये बिना उसे नकार देना हठधर्मिता ही कही जाएगी। कालसर्प योग पर अधिक ध्यान दिया जाना आवश्यक है. कई अवस्थाओं में यह योग कुंडली में मौजूद होते हुए भी निष्क्रिय होता है, कई बार इसके दुष्परिणाम भी दिखाई पड़ते हैं । इसे एकदम से नकार देना भी उचित न होगा।


यदि कालसर्प योग का प्रभाव किसी जातक के लिए अनिष्टकारी हो तो उसे दूर करने के उपाय भी किये जा सकते हैं। हमारे ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई उपायों का उल्लेख है, जिनके माध्यम से हर प्रकार की ग्रह-बाधाएं व पूर्वकृत अशुभ कर्मों का प्रायश्चित किया जा सकता है। यहाँ हम यह कहना चाहेंगे कि अपने जीवन में मिलने वाले सारे अच्छे या बुरे फल अपने निजकृत कर्मो के आधार पर ही है, इसलिए ग्रहों को इसका दोष नहीं देना चाहिए बल्कि अपने शुभ कर्मों को बढ़ाना चाहिये व अशुभ कर्मों में सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए तथा इश्वर पे भरोषा कर, हमेशा सकारात्मक विचार के साथ रहना चाहिये।

मित्रों यह निरंतर कार्य अनुभव के आधार पर लिखा आलेख है,ज्योतिष को लेकर समाज मे बहुत मत-मतांतर हैं अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, कुतर्क और बिना मतलब की बहस न करें। मेरा यह प्रयास, कालसर्प को लेकर अपना अनुभव और जानकारी साझा करना है। अगर इस विषय को लेकर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद।

रविवार, 10 जनवरी 2021

shankhpal kalsarp yog। शंखपाल कालसर्प योग और उपाय

शंखपाल कालसर्प योग और उपाय । shankhpal kalsarp yog

जन्मकुण्डली में जब राहु चौथे भाव में और केतु दशवें भाव में हो इनके बीच सारे ग्रह स्थित हों तो शंखपाल नामक कालसर्प योग बनता है।

                                       shankhpal kalsarp yog aur upay। शंखपाल कालसर्प योग और उपाय


जातक को घर, वाहन, माता का अपेक्षित सुख नहीं मिलता । कभी-कभी बेवजह चिंता घेर लेती है तथा विद्या प्राप्ति में भी उसे आंशिक रूप से तकलीफ उठानी पड़ती है। जातक को माता से कोई, न कोई किसी न किसी समय आंशिक रूप में तकलीफ मिलती है।अपने ही विश्वासघात करते हैं। सुख-संवृद्धि तथा चल-अचल संपत्ति संबंधी अनेक परेसानी उठानी पड़ती है। नौकरों की वजह से भी कोई न कोई कष्ट होता ही रहता है। इसमें उन्हें कुछ नुकसान भी उठाना पड़ता है। जातक का वैवाहिक जीवन सामान्य होते हुए भी वह कभी-कभी तनावग्रस्त हो जाता है। चंद्रमा के पीड़ित होने के कारण जातक समय-समय पर मानसिक संतुलन भी खोता रहता है। कार्य के क्षेत्रा में भी अनेक विघ्न आते हैं। पर वे सब विघ्न कालान्तर में स्वत: नष्ट हो जाते हैं। बहुत सारे कामों को एक साथ करने के कारण जातक का कोई भी काम प्राय: पूरा नहीं हो पाता है। इस योग के प्रभाव से जातक का आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है, जिस कारण आर्थिक संकट भी उपस्थित हो जाता है। लेकिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी जातक को व्यवसाय, नौकरी तथा राजनीति के क्षेत्रा में बहुत सफलताएं प्राप्त होती हैं एवं उसे सामाजिक पद प्रतिष्ठा भी मिलती है।


शंखपाल कालसर्प योग का उपाय 

* राहु का मन्त्र जाप करने तथा नागपंचमी का व्रत करने व सर्पों को दूध पिलाने से इस योग के बुरे फलों में कमी आती है।

* शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर चांदी का स्वस्तिक एवं दोनों ओर धातु से निर्मित नाग चिपका दें।

* शुभ मुहूर्त में सूखे नारियल के फल को जल में तीन बार प्रवाहित करें।

* 86 शनिवार का व्रत करें और राहु, केतु व शनि के साथ हनुमान की आराधना करें। और हनुमान जी को मंगलवार को चोला चढ़ायें और शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें।

* किसी शुभ मुहूर्त में एकाक्षी नारियल अपने ऊपर से सात बार उतारकर सात बुधवार को बहते जल में प्रवाहित करें।

* सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं।

* शुभ मुहूर्त में सर्वतोभद्रमण्डल यंत्रा को पूजित कर धारण करें।

* नित्य प्रति हनुमान चालीसा पढ़ें और रसोईं में बैठकर भोजन करें। हनुमान चालीसा का नित्य 11 पाठ करें।

* सवा महीने तक जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं और प्रत्येक शनिवार को चींटियों को शक्कर मिश्रित सत्ताू उनके बिलों पर डालें।

* किसी शुभ मुहूर्त में सूखे नारियल के फल को बहते जल में तीन बार प्रवाहित करें तथा किसी शुभ मुहूर्त में शनिवार के दिन बहते पानी में तीन बार कोयला भी प्रवाहित करें।


कालसर्प को लेकर पं. उदय प्रकाश शर्मा की अपनी बात 


मुझे कुछ पाठकों ने मैसेज में लिखा की गुरु जी यह कालसर्प योग तो होता ही नहीं, इसका किसी शास्त्र में उल्लेख नहीं मिलता तो उन्हें मै इतना ही कहना चाहूँगा कि काफी समय से कालसर्प योग की सत्यता को लेकर गुरुजनों में मतभेद चल रहा है. कोई इसकी सत्यता पर ही सवाल उठा रहा है,कोई इसके पक्ष में खड़ा है.वास्तव में यह सही है की हमारे प्राचीन शास्त्रों में ऐसे किसी योग का उल्लेख नहीं मिलता, किन्तु ऐसे कई तथ्य हैं की जिन चीजों की जानकारी हमें पहले नहीं थी तथा उनकी खोज बाद में हुई, अब आप उन तथ्यों को यह कहकर नकार नहीं सकते की पहले के ग्रंथों में इनका उल्लेख नहीं मिलता, अब जैसे ब्लॉग पहले नहीं होता था, ईमेल पहले नहीं होती थी, लैपटॉप का पहले कहीं जिक्र नहीं मिलता,  मगर आज यह मौजूद हैं उसी तरह युग युगांतर से हर विषय में शोध कार्य होता रहता है और जीवन में जो अनुभव में आता है, वह प्रतिपादित भी होता है तो उसे अपने अनुभव की कसौटी पर परखने के बाद हमें स्वीकार्य करना ही  पड़ता है।

कहने का तात्पर्य यह है की यदि विद्वान् गुरुजनों ने किसी तथ्य की खोज बाद के काल में की है तो उस पर पूर्ण अध्ययन किये बिना उसे नकार देना हठधर्मिता ही कही जाएगी। कालसर्प योग पर अधिक ध्यान दिया जाना आवश्यक है. कई अवस्थाओं में यह योग कुंडली में मौजूद होते हुए भी निष्क्रिय होता है, कई बार इसके दुष्परिणाम भी दिखाई पड़ते हैं । इसे एकदम से नकार देना भी उचित न होगा। 

यदि कालसर्प योग का प्रभाव किसी जातक के लिए अनिष्टकारी हो तो उसे दूर करने के उपाय भी किये जा सकते हैं। हमारे ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई उपायों का उल्लेख है, जिनके माध्यम से हर प्रकार की ग्रह-बाधाएं व पूर्वकृत अशुभ कर्मों का प्रायश्चित किया जा सकता है। यहाँ हम यह कहना चाहेंगे कि अपने जीवन में मिलने वाले सारे अच्छे या बुरे फल अपने निजकृत कर्मो के आधार पर ही है, इसलिए ग्रहों को इसका दोष नहीं देना चाहिए बल्कि अपने शुभ कर्मों को बढ़ाना चाहिये व अशुभ कर्मों में सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए तथा इश्वर पे भरोषा कर, हमेशा आशावान रहना चाहिये। 

काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, पं. उदय प्रकाश शर्मा 


मित्रों यह निरंतर कार्य अनुभव के आधार पर लिखा आलेख है,ज्योतिष को लेकर समाज मे बहुत मत-मतांतर हैं अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, कुतर्क और बिना मतलब की बहस न करें। मेरा यह प्रयास, कालसर्प को लेकर जिज्ञासु पाठकों के लिए अपना अनुभव और अपनी जानकारी साझा करना है। अगर इस विषय को लेकर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद।

                                                  ।। इति शुभम् ।।


 

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गुरुवार, 7 जनवरी 2021

mangalwar ko janme log । मंगलवार को जन्मे लोग

 mangalwar ko janme log । मंगलवार को जन्मे लोग 


अक्सर मुझे ऐसे लोग मिलते हैं जो कहते हैं पंडित जी मेरा फलां दिन का जन्म हुआ है मेरे बारे में कुछ बताइए, मुझे मेरी जन्म तिथि, दिनांक, सन, समय कुछ भी ज्ञात नहीं बस यही दिन पता है कि मेरा जन्म मंगलवार को हुआ है । तो यह आर्टिकल उन्हीं लोगों के लिए  है।


मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव । Tuesday Birth

मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति गर्म होती है। यह पराक्रमी, वीर, साहसी एवं संग्राम में  विजय प्राप्त करने वाले  होते है। इसकी बुद्धि विशेष अच्छी नहीं होती, इसी से यह बौद्धिक  कार्यों से अलग रहना पसंद करते है, परन्तु वीरता के कार्यों में आगे बढ़-चढ़ कर भाग लेने वाले होते है। प्रायः यह सांवले रंग के होते हैं पर इनमे आकर्षण शक्ति बहुत गजब की होती है जिसकी वजह से विपरीत लिंगी इनकी तरफ बहुत जल्दी आकर्षित होते हैं । 

यह लोग अपने शरीर को ही सब कुछ समझते हैं जैसे आज के समय में फ़िल्म अभिनेता, अभिनेत्री, जिम्नास्टिक आदि जो अपने शरीर को ही अपने कर्म का साधन बना लेते हैं, यह लोग रक्षा विभाग, पुलिस, आर्मी,  डाक्टरी शल्य चिकित्सा (surgery), खेल -कूद आदि में भी अग्रणी होते हैं। अपनी वाक्पटुता से यह लोगों को  सहज ही आकर्षित कर लेते हैं। इनको रक्त संबंधी रिश्तों जैसे- चाचा, बुआ, बहन आदि से विशेष सहयोग प्राप्त होता है। यह दुश्मनी, कर्जा, बीमारी, बदला आदि  को ज्यादा महत्त्व देते हैं और इनसे सामना करने हेतु अधिक धन इकठ्ठा करते हैं।

जमीनी संपत्ति भी यह लोग खड़ी करते हैं। यह अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं। यह स्कूल आदि में पुस्तकों से सिखने के बजाय जीवन में कार्य कर के सिखने में अधिक विश्वास  करते हैं। यह जवानी के दिनों में कामुक भी बहुत होते हैं, इनके लिए प्रायः प्यार-मुहब्बत करना अक्सर मुसीबत बन जाता है, यह शंकालु भी बहोत होते हैं, यह अपनी पत्नी का लोगों से ज्यादा मिलना जुलना पसंद नहीं करते, इनमे असुरक्षा की भावना भी अधिक होती है।

इन्हें  2, 32 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 74 वर्ष की होती है।

मंगलवार के दिन जन्म लेने वालों के लिए उपाय 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी मंगल होते हैं अतः अपने चहुमुखी कल्याण हेतु मंगल देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा संकट मोचन हनुमान जी व भगवान कार्तिकेय की पूजा-आराधना इन्हें करनी चाहिए साथ ही अपने छोटे भाई बहनों का उचित मार्गदर्शन, सहयोग व उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। उनके उदंडता पे क्रोधित न होकर छमाशीलता अपनाना चाहिए।

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

vashuki kalsarp yog। वासुकि कालसर्प योग और उपाय

 वासुकि कालसर्प योग और उपाय । vashuki kalsarp yog


जन्मकुण्डली में जब राहु तीसरे घर में और केतु नवम भाव में और इनके बीच सारे ग्रह स्थित हों तो वासुकी नामक कालसर्प योग बनता है।
vashuki kalsarp yog। वासुकि कालसर्प योग और उपाय


फल स्वरूप जातक को प्रायः अपने पारिवारिक सदस्यों और छोटे भाई-बहनो के कारण अनेक कष्ट और तनाव झेलने पड़ते हैं। रिश्तेदार एवं मित्रगण उसे प्राय: धोखा देते रहते हैं। घर में सुख-शांति का अभाव रहता है। जातक को समय-समय पर व्याधि ग्रसित करती रहती हैं जिसमें अधिक धन खर्च हो जाने के कारण उसकी आर्थिक स्थिति भी असामान्य हो जाती है। अर्थोपार्जन के लिए जातक को विशेष संघर्ष करना पड़ता है, फिर भी उसमें सफलता संदिग्धा रहती है। चंद्रमा के पीड़ित होने के कारण उसका जीवन मानसिक रूप से उद्विग्न रहता है। इस योग के कारण जातक को कानूनी मामलों में विशेष रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। राज्यपक्ष से प्रतिकूलता रहती है। पूजा-पाठ, धर्म-कर्म में रूचि नहीं होती। जातक को नौकरी या व्यवसाय आदि के क्षेत्रा में निलम्बन या नुकसान उठाना पड़ता है। यदि जातक अपने जन्म स्थान से दूर जाकर कार्य करें तो अधिक सफलता मिलती है। लेकिन सब कुछ होने के बाद भी जातक अपने जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करता है। विलम्ब से उत्ताम भाग्य का निर्माण भी होता है।

वाशुकी कालसर्प योग का उपाय 

* 7 बुधवार या शनिवार को एक पानी वाला नारियल बहते पानी में बहाएं।
* नव नाग स्तोत्रा का एक वर्ष तक प्रतिदिन पाठ करें।
* प्रत्येक बुधवार को काले वस्त्रों में उड़द या मूंग एक मुट्ठी डालकर, राहु का मंत्र जप कर भिक्षाटन करने वाले को दे दें। यदि दान लेने वाला कोई नहीं मिले तो बहते पानी में उस अन्न हो प्रवाहित करें। 72 बुधवार तक करने से अवश्य लाभ मिलता है।
* महामृत्युंजय मंत्रों का जाप प्रतिदिन 11 माला रोज करें, जब तक राहु केतु की दशा-अंर्तदशा रहे और हर शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें और मंगलवार को हनुमान जी को चोला चढ़ायें।
* किसी शुभ मुहूर्त में नाग यंत्र को अभिमंत्रित कर धारण करें।


कालसर्प को लेकर पं. उदय प्रकाश शर्मा की अपनी बात 


मुझे कुछ पाठकों ने मैसेज में लिखा की गुरु जी यह कालसर्प योग तो होता ही नहीं, इसका किसी शास्त्र में उल्लेख नहीं मिलता तो उन्हें मै इतना ही कहना चाहूँगा कि काफी समय से कालसर्प योग की सत्यता को लेकर गुरुजनों में मतभेद चल रहा है. कोई इसकी सत्यता पर ही सवाल उठा रहा है,कोई इसके पक्ष में खड़ा है.वास्तव में यह सही है की हमारे प्राचीन शास्त्रों में ऐसे किसी योग का उल्लेख नहीं मिलता, किन्तु ऐसे कई तथ्य हैं की जिन चीजों की जानकारी हमें पहले नहीं थी तथा उनकी खोज बाद में हुई, अब आप उन तथ्यों को यह कहकर नकार नहीं सकते की पहले के ग्रंथों में इनका उल्लेख नहीं मिलता, अब जैसे ब्लॉग पहले नहीं होता था, ईमेल पहले नहीं होती थी, लैपटॉप का पहले कहीं जिक्र नहीं मिलता,  मगर आज यह मौजूद हैं उसी तरह युग युगांतर से हर विषय में शोध कार्य होता रहता है और जीवन में जो अनुभव में आता है, वह प्रतिपादित भी होता है तो उसे अपने अनुभव की कसौटी पर परखने के बाद हमें स्वीकार्य करना ही  पड़ता है।

कहने का तात्पर्य यह है की यदि विद्वान् गुरुजनों ने किसी तथ्य की खोज बाद के काल में की है तो उस पर पूर्ण अध्ययन किये बिना उसे नकार देना हठधर्मिता ही कही जाएगी। कालसर्प योग पर अधिक ध्यान दिया जाना आवश्यक है. कई अवस्थाओं में यह योग कुंडली में मौजूद होते हुए भी निष्क्रिय होता है, कई बार इसके दुष्परिणाम भी दिखाई पड़ते हैं । इसे एकदम से नकार देना भी उचित न होगा। 

यदि कालसर्प योग का प्रभाव किसी जातक के लिए अनिष्टकारी हो तो उसे दूर करने के उपाय भी किये जा सकते हैं। हमारे ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई उपायों का उल्लेख है, जिनके माध्यम से हर प्रकार की ग्रह-बाधाएं व पूर्वकृत अशुभ कर्मों का प्रायश्चित किया जा सकता है। यहाँ हम यह कहना चाहेंगे कि अपने जीवन में मिलने वाले सारे अच्छे या बुरे फल अपने निजकृत कर्मो के आधार पर ही है, इसलिए ग्रहों को इसका दोष नहीं देना चाहिए बल्कि अपने शुभ कर्मों को बढ़ाना चाहिये व अशुभ कर्मों में सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए तथा इश्वर पे भरोषा कर, हमेशा आशावान रहना चाहिये।  

।। इति शुभम् ।।


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रविवार, 20 दिसंबर 2020

1 MUKHI RUDRAKSH KE LABH। एक मुखी रुद्राक्ष के लाभ

 

एक मुखी रुद्राक्ष के लाभ । 1 MUKHI RUDRAKSH

1 MUKHI RUDRAKSH KE LABH। एक मुखी रुद्राक्ष के लाभ


रुद्राक्ष में 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने का बहुत महत्व है । यह रुद्राक्ष भगवान शिव के बहुत करीब है। अतः इसके धारण मात्र से जातक आरोग्यता , प्रसन्नता, सफलता की तरफ अग्रसर हो जाता है, चुनाव में विजय, राज सत्ता से सुख, प्रतिस्पर्धा में सफलता आदि के लिए यह रुद्राक्ष रामबाण सबित होता है। यह व्यक्ति के गंभीर पापों से मुक्ति में सहायता भी करता है, यह मन की शांती भी प्रदान करता है, इसे धारण करने वाले की इन्द्रियां उसके वश में होकर ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति की तरफ ले जाती है। तथा जो व्यक्ति धन-दौलत और भौतिक चीजों की चाहत करते हैं उन्हें एक मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।

1 मुखी रुद्राक्ष साक्षात् शिव स्वरूप है, इसके प्रतिनिधि ग्रह सूर्य हैं, इससे धारण करने के लिए

शिव पंचाक्षरी मन्त्र   ॐ नमः शिवाय 

से अभिमंत्रित करना अनिवार्य है।

1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के 12 मुख्य फायदे

  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले के जीवन एवं घर में माता लक्ष्मी का आगमन होता है।
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के सभी अनिष्ट दूर हो जाते हैं
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले के शत्रु स्वयं परास्त हो जाते हैं
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से हृदय रोग समाप्त होता है तथा ह्रदयघात से रक्षा होती है
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक बिमारियों में लाभ मिलता है तथा मन को शांति प्राप्त होती है
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले की औरा (अभामंडल) मजबूत होता है
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि तथा व्यक्तित्व का विकास होता है
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति अपने क्रोध पर नियंत्रण पा लेता है 
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति आंख, रक्त विकार तथा  सिर दर्द की समस्या से छुटकारा पा लेता है 
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने  वाले व्यक्ति को समाज में सम्मान एवं आदर प्राप्त होता है 
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने  वाले व्यक्ति शरीर में उच्च रक्तचाप BP धीरे धीरे नियंत्रित होने लगता है और कम दवाई से ही BP शांत रहता है
  • 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शिक्षा में आ रही रुकावट दूर होती है
 

।। इति शुभम् ।।


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kulik kalsarp yog । कुलिक कालसर्प योग और उपाय

 कुलिक कालसर्प योग और उपाय । kulik kalsarp yog


जन्मकुण्डली में राहु दूसरे घर में हो और केतु अष्टम भाव में हो और सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के मध्य हों तो कुलिक नाम कालसर्प योग बनता है।
kulik kalsarp yog । कुलिक कालसर्प योग

इस योग के फल स्वरूप जातक को सदैव कोई न कोई रोग हुआ रहता है। प्रायः मुख व गुदा संबंधी रोग होते हैं। गले के ऊपर का अंग दोषपूर्ण होता है।अपयश का भी भागी बनना पड़ता है। इस योग की वजह से जातक की पढ़ाई-लिखाई सामान्य गति से चलती है तथा वह सदा भ्रम की स्थिति में रहता है। वैसे तो उसका वैवाहिक जीवन सामान्य रहता है परंतु आर्थिक परेशानियों की वजह से उसके वैवाहिक जीवन में भी जहर घुल जाता है। मित्रों द्वारा धोखा, संतान सुख में बाधा और व्यवसाय में संघर्ष कभी उसका पीछा नहीं छोड़ते। जातक का स्वभाव भी विकृत हो जाता है। मानसिक असंतुलन और शारीरिक व्याधियां झेलते-झेलते वह समय से पहले ही बूढ़ा हो जाता है। उसके उत्साह व पराक्रम में निरंतर गिरावट आती जाती है। उसका कठिन परिश्रमी स्वभाव उसे सफलता के शिखर पर भी पहुंचा देता है। परंतु इस फल को वह पूर्णतय: सुखपूर्वक भोग नहीं पाता है।

कुलिक कालसर्प योग का उपाय

* लग्न से सम्बंधित रत्न ज्योतिषीय सलाह लेकर धारण करें।
* विद्यार्थीजन सरस्वती जी के बीज मंत्रों का एक वर्ष तक जाप करें और विधिवत उपासना करें।
* शुभ मुहूर्त में बहते पानी में कोयला तीन बार प्रवाहित करें।
* हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें।
* श्रावण मास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें।
शनिवार और मंगलवार का व्रत रखें और शनि मंदिर में जाकर भगवान शनिदेव कर पूजन करें व तैलाभिषेक करें, इससे तुरंत कार्य सफलता प्राप्त होती है।
* सिद्ध कालसर्प योग शांति यंत्र पूजा घर में स्थापित करें।
* नाग की आकृति की चांदी की अंगूठी बनवाकर पहनें।

कालसर्प को लेकर पं. उदय प्रकाश शर्मा की अपनी बात 

मुझे कुछ पाठकों ने मैसेज में लिखा की गुरु जी यह कालसर्प योग तो होता ही नहीं, इसका किसी शास्त्र में उल्लेख नहीं मिलता तो उन्हें मै इतना ही कहना चाहूँगा कि काफी समय से कालसर्प योग की सत्यता को लेकर गुरुजनों में मतभेद चल रहा है. कोई इसकी सत्यता पर ही सवाल उठा रहा है,कोई इसके पक्ष में खड़ा है.वास्तव में यह सही है की हमारे प्राचीन शास्त्रों में ऐसे किसी योग का उल्लेख नहीं मिलता, किन्तु ऐसे कई तथ्य हैं की जिन चीजों की जानकारी हमें पहले नहीं थी तथा उनकी खोज बाद में हुई, अब आप उन तथ्यों को यह कहकर नकार नहीं सकते की पहले के ग्रंथों में इनका उल्लेख नहीं मिलता, अब जैसे ब्लॉग पहले नहीं होता था, ईमेल पहले नहीं होती थी, लैपटॉप का पहले कहीं जिक्र नहीं मिलता,  मगर आज यह मौजूद हैं उसी तरह युग युगांतर से हर विषय में शोध कार्य होता रहता है और जीवन में जो अनुभव में आता है, वह प्रतिपादित भी होता है तो उसे अपने अनुभव की कसौटी पर परखने के बाद हमें स्वीकार्य करना ही  पड़ता है।

कहने का तात्पर्य यह है की यदि विद्वान् गुरुजनों ने किसी तथ्य की खोज बाद के काल में की है तो उस पर पूर्ण अध्ययन किये बिना उसे नकार देना हठधर्मिता ही कही जाएगी। कालसर्प योग पर अधिक ध्यान दिया जाना आवश्यक है. कई अवस्थाओं में यह योग कुंडली में मौजूद होते हुए भी निष्क्रिय होता है, कई बार इसके दुष्परिणाम भी दिखाई पड़ते हैं । इसे एकदम से नकार देना भी उचित न होगा। 

 एक छोटे से उदाहरण से समझें तो जब किसी छात्र की कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर हो रहे हों व राहू केतु पंचम भाव को प्रभावित कर रहे हों तो अपनी 15-16 वर्ष की आयु के दौरान उस छात्र का ध्यान शिक्षा की और से डगमगाने लगता है, जबकि इस से पहले वह एक बेहतरीन छात्र के रूप में जाना जाता है। यह सत्य है की कालसर्प का योग का  प्रभाव जीवन पर  कहीं न कहीं पड़ता ही है। आप  कालसर्प योग के ऊपर अपने अनुभव को मुझसे साझा भी कर सकते हैं। 


।। इति शुभम् ।।

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गुरुवार, 14 मई 2020

janam din aur swbhav । जन्म दिन और स्वभाव

janam din aur swbhav । जन्म दिन और स्वभाव  

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janam din aur swbhav

अक्सर मुझे ऐसे लोग मिलते हैं जो कहते हैं पंडित जी मेरा फलां दिन का जन्म हुआ है मेरे बारे में कुछ बताइए, मुझे मेरी जन्म तिथि, दिनांक, सन, समय कुछ भी ज्ञात नहीं बस यही दिन पता है। तो ऐसे ही लोगों के लिए ही मैंने यह आर्टिकल लिखा है कि किस दिन को जन्म लेने वाले जातक का क्या स्वभाव, गुण, आदतें आदि होंगी।

रविवार  के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव  Sunday

रविवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति तेज होती है, इनमे थोड़ी बहुत अहम की भवना होती है, यह दिखावा करना भी पसंद करते हैं, यह अपने पिता के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले होते हैं, अपनी माता से इनकी थोड़ी कम बनती है, यह भाई बहनों के प्रति पिता तुल्य जोम्मेदारी समझते हैं, यह सरकरी नौकरी पाने के लिए प्रयत्नशील होते हैं। वैसे यह स्वतंत्र विचारों के होते हैं इसलिए यह किसी का दबाव बर्दास्त नहीं कर पाते हैं जिससे नौकरी में परेसनी भी बनी रहती है। यह ठेकेदारी से जुड़े कामों में अधिक सफल होते हैं। यह राज सत्ता के करीब रहने वाले और मान-सम्मान प्राप्त करने वाले होते हैं, पर पीठ पीछे इनके कार्यों की बुराई भी होती है, इन्हें आलोचनाओं को सहने की आदत रखनी चाहिए, सफल होने के लिए इन्हें जनता के बिच रहना पड़ता है सायद इसी लिए यह एक अच्छे राजनीतिज्ञ भी होते हैं। यह परिवार में बहन, बेटी तथा बुआ के लाडले होते हैं, वैसे तो यह किसी से डरते नहीं पर अपनी जीवन साथी से ही कुछ डर महसूस करते हैं और इनको जीवन में अपनी स्त्री को लेकर परेसान भी होना पड़ता है। यह लोगों की अपेक्षा पे खरे उतरने वाले चतुर, दान करने वाले, समूह का नेतृत्व करने वाले आदेशात्मक वाणी बोलने वाले होते है।
इन्हें प्रायः पित्त की बीमारी के रोग लगते है। इन्हें 1, 6 महीने में तथा 13, 23 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 50 वर्ष व उससे अधिक होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी सूर्य हैं- अतः इन्हें भगवान सूर्य देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिये इससे इनके चहुमुखी कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है तथा साथ ही  पिता और गुरुजन की सेवा और आज्ञा पालन से उतम सुख मिलता है।
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सोमवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव  Monday

सोमवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति शांत होती है पर साथ ही इनका मन परिवर्तनशील भी बहुत होता हैं।यह सुख-दुःख दोनों में सामान भाव से रहने वाले और सुन्दर होते हैं। प्रायः इस दिन जन्म लेने वाले स्त्री पुरुष सामान रूप से सौन्दय युक्त होते हैं मेरे अनुभव में मैंने देखा है कि ज्यादातर सुन्दर व्यक्ति का जन्म सोमवार को ही हुआ रहता है। इनिकी वाणी भी प्रायः मीठी होती है और यह अपने बोलने और व्यवहार कुशलता के लिए भी जाने जाते हैं। इनका तकनिकी ज्ञान बहुत उच्च स्तर का होता हैं। यह प्रायः बचपन में सर्दी-कफ से संबंधित बिमारियों से घिरे रहते हैं। वैसे यह अपने घर में बड़े होते ही होते हैं अगर ऐसा नहीं है तो भी यह अपने कर्मों द्वारा बड़े जैसा ही सम्मान पाते हैं। इन्हें फैशन की अच्छी समझ होती है और यह कपड़ों से संबंधित कार्य करना भी पसंद करते है। यह बैंक आदि में भी रूचि रखते हैं और धन कमाने के नए नए तरीको  को जानने वाले होते हैं। क्यूँ की इनमे संवेदना अधिक होती है जिससे यह प्यार में जल्दी पड जाते हैं अगर प्यार मिल गया तो अच्छा अगर नहीं मिला तो यह उस प्यार को लेकर दुखी हुआ करते हैं, प्रायः इनको जीवन साथी भी अहम् वाला ही मिलता है जिसकी वजह से वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण रहता है। इन्हें अपने घर को खूबसूरती से सजाकर रखना बहोत पसंद होता है प्रायः खुबसूरत और अच्छी डिजाईन वाले घरों के यह मालिक होते हैं। यह चतुर, बुद्धिमान तथा धैर्यवान होते है। प्रायः यह राजकीय नौकरी करने वाले होते है अर्थात राज्य कर्मचारी होते है।
इन्हें 8,11 वें महीने तथा 16, 27 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 84 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी चन्द्रमा होते हैं अतः अपने चहुमुखी कल्याण हेतु इन्हें चन्द्र देवता के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवान शिव की अभिषेक के साथ पूजा करनी चाहिए और साथ ही अपनी माता और माता तुल्य स्त्रियों की सेवा कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
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मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव   Tuesday

मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति गर्म होती है। यह पराक्रमी, वीर, साहसी एवं संग्राम में  विजय प्राप्त करने वाले  होते है। इसकी बुद्धि विशेष अच्छी नहीं होती, इसी से यह बौद्धिक  कार्यों से अलग रहना पसंद करते है, परन्तु वीरता के कार्यों में आगे बढ़-चढ़ कर भाग लेने वाले होते है। प्रायः यह सांवले रंग के होते हैं पर इनमे आकर्षण शक्ति बहुत गजब की होती है जिसकी वजह से विपरीत लिंगी इनकी तरफ बहुत जल्दी आकर्षित होते हैं । यह लोग अपने शरीर को ही सब कुछ समझते हैं जैसे आज के समय में फ़िल्म अभिनेता, अभिनेत्री, जिम्नास्टिक आदि जो अपने शरीर को ही अपने कर्म का साधन बना लेते हैं, यह लोग रक्षा विभाग, पुलिस, आर्मी,  डाक्टरी शल्य चिकित्सा (surgery), खेल -कूद आदि में भी अग्रणी होते हैं। अपनी वाक्पटुता से यह लोगों को  सहज ही आकर्षित कर लेते हैं। इनको रक्त संबंधी रिश्तों जैसे- चाचा, बुआ, बहन आदि से विशेष सहयोग प्राप्त होता है। यह दुश्मनी, कर्जा, बीमारी, बदला आदि  को ज्यादा महत्त्व देते हैं और इनसे सामना करने हेतु अधिक धन इकठ्ठा करते हैं, जमीनी संपत्ति भी यह लोग खड़ी करते हैं। यह अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं। यह स्कूल आदि में पुस्तकों से सिखने के बजाय जीवन में कार्य कर के सिखने में अधिक विश्वास  करते हैं । यह जवानी के दिनों में कामुक भी बहुत होते हैं, इनके लिए प्रायः प्यार-मुहब्बत करना अक्सर मुसीबत बन जाता है, यह शंकालु भी बहोत होते हैं, यह अपनी पत्नी का लोगों से ज्यादा मिलना जुलना पसंद नहीं करते, इनमे असुरक्षा की भावना भी अधिक होती है।
इन्हें  2, 32 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 74 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी मंगल होते हैं अतः अपने चहुमुखी कल्याण हेतु मंगल देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा संकट मोचन हनुमान जी व भगवान कार्तिकेय की पूजा-आराधना इन्हें करनी चाहिए साथ ही अपने छोटे भाई बहनों का उचित मार्गदर्शन, सहयोग व उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। उनके उदंडता पे क्रोधित न होकर छमाशीलता अपनाना चाहिए।
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बुधवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव   Wednesday

बुधवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति शांत होती है इनमे स्त्रियोचित गुण भी पाए जाते हैं। यह मीठा और ज्यादा बोलने वाले, ज्योतिषी, पंडित, धनी, बौद्धिक कार्य करने वाले, लेखक, कवि संपादक होते है, इनके पास किसी विषय विशेष के बारे में लिखने की अद्भुत कला होती है, यह अच्छे स्क्रिफ्ट राईटर, एडिटर, संवाद लेखक होते हैं। यह ज्यादा बोलने के साथ ही बिना मागी सलाह देने में ज्यादा आगे रहते हैं। यह लोगों को जल्दी ही अपना मित्र बना लेते हैं और उनसे काम होने के बाद उन्हें भूल भी जाते हैं। यह हर मुद्दे को व्यापारिक दृष्टिकोण से दखने वाले, हमेसा अपना फायदा सोचने वाले, कई भाषाओँ के जानकर होते हैं। यह भौतिक सुख साधनों का अत्यधिक शौक रखने वाले व वाहनादि का प्रदर्शन करने वाले होते हैं। यह बहुत मजाकिया स्वभाव व  मनोरंजन में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं जिससे इनको जानने वाले अधिक होते है जिनसे यह प्रायः अपना कार्य निकलवाते रहते हैं। यह शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहते हैं, आज के युग में कम्पूटर के अच्छे जानकर, साफ्वेयर, हार्डवेयर, एनिमेसन, डिजाईन, प्रिंट मिडिया, चित्रकारीता में भी अद्भुत गुण भी रखते हैं। कौन सा कार्य किस तरह करना है यह भली प्रकार जानते हैं, यह अच्छे सेल्समैन हो सकते हैं क्यूँ की लोगों को सीसे में उतरना इन्हें अच्छी तरह आता है। इन्हें जनता के बिच कार्य करने में विशेष रूचि होती है । यह जितने नरम स्वभाव के होते हैं उतने ही कठोर भी होते हैं, यह किसी भी बात को लम्बा खीचते हैं तथा नाराज भी जल्दी होते हैं पर इनकी नाराजगी टिकाऊ नहीं होती, इन्हीं कारणों से इनका पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है। यह प्रायः स्वस्थय होते हैं पर कभी कोई छोटी सी बामारी हुई नहीं की उसे मानसिक रूप ज्यादा सोचकर बड़ा बना लेते हैं। नीरस और बोझिल वातावरण इन्हें पसंद नहीं होता।
इन्हें 8 वे महीने या 8 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 64 वर्ष होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी बुध होते हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी कल्याण के लिए बुध ग्रह के मन्त्रों का जप करना चाहए तथा भगवती माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना करनी चाहिए  साथ ही बहन, बेटी, बुआ को सम्मान देना चाहिए व उन्हें उपहार देकर उन्हें खुश करना चाहिये।
बुध ग्रह के संपूर्ण मन्त्र एवं अचूक उपाय

गुरुवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव     Thursday

गुरुवार के दिन जन्म लेने वाला जातक शांत प्रकृति का होता है। यह चतुर, विद्वान, राजा का मंत्री या मंत्री का सलाहकार, प्रतिष्ठित नेता, वकील, जज एवं ग्रन्थ-लेखक होता है। यह भगवान को मानाने वाले धार्मिक प्रवित्ति के होते हैं, इनमे ज्ञान की अधिकता होती है, इनकी शिक्षा-दीक्षा कैसी भी हो पर इनमे ज्ञान की कमी नहीं होती पर साथ ही अपने ज्ञान को लेकर इनमे अहम् भी होता है, इनमे तर्क भी भरपूर होता है यह किसी भी बात को शास्त्रोक्त व तर्कपूर्ण  ढंग से ही लोगों के सामने रखते हैं, यह एक अच्छे कथाकार, अच्छे सलाहकार साबित होते हैं इनका परामर्श उच्च कोटि का होता है जीससे इनसे परामर्श पाने वाला लाभवन्तित होता है।  इनका माथा गोल और चौड़ा होता और शरीर पतला होता है तथा सर के बल जल्दी झड जाते हैं।  इन्हें सर्दी बहोत लगती है अर्थात यह शीत से जल्दी प्रभावित होते हैं जिससे यह सर्दी के मौसम में प्रायः कफ जनित बिमारियों से ग्रसित रहते हैं। यह रिश्तों में ससुराल पक्ष से बहोत प्रभावित रहते हैं, ससुराल से इन्हें सहायता भी प्राप्त होती है। यह वैसे तो सात्विक भोजन ही पसंद करते हैं पर अगर  संगत का असर हुआ तो यह तामसिक भोजन भी जल्द अपना लेते हैं और नशे की तरफ भी आकर्षित हो जाते हैं मेरे अनुभव के अनुसार इनका अच्छा समय तभी रहता है जब यह सात्विक होते हैं, जैसे ही यह अपने अंदर व्यसन को आने देते हैं इनके सभी कार्य बिगड़ने लगते हैं साथ ही मान-हानि के भी योग उठ खड़े होते हैं।
 इन्हें 7 वें महीने में तथा 13 व 16 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 84 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी  कल्याण के लिए देवगुरु वृहस्पति के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवन विष्णु की पूजा करनी चाहिए, साथ ही माता-पिता गुरुजनों की सेवा कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
वृहस्पति ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं उपाय 

शुक्रवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव    Friday

शुक्रवार के दिन जन्म लेने वाले जातक की प्रकृति कुछ गरम होती है। यह देवताओं में कम श्रद्धा रखने वाले, क्रोधी, चंचल चित्त वाले, बुद्धिमान, रूपवान तथा खेल में मस्त रहने वाले सौन्दय प्रेमी होते है। इसकी बोलने की शक्ति अच्छी होती है जिससे समाज में आदर प्राप्त करते है। यह स्वदिष्ट भोजन के शौक़ीन होते हैं तथा  इनको भूख बहोत लगती है लेकिन शरीर सामान्य ही रहता है, यह छरहरे और लंबे होते हैं, इनकी दृष्टि अच्छी होती है पर आगे चलकर आँखों से संबंधित परेशानी आती है। इनमे कला के सभी गुण भरे होते है, आज के समय में सिनेमा जगत में यह यह अभिनेता/अभिनेत्री हो सकते हैं, इनमे सौन्दर्य का बोध बहुत अधिक होता है, यह मनोरंजन के सौखीन होते हैं तथा रचनात्मक कार्य खुद करना और दूसरों को उसकी शिक्षा देना भी यह भली भांति जानते हैं जिस कारण यह नृत्यकला, ड्रामा, रंगमच, गायन के क्षेत्र में कार्य करने में उत्सुक रहते हैं, यह अपने जीवन में स्वयं के पराक्रम से धन-दौलत, घर, वाहन आदि बनाते हैं, यह अपने वाहन को खूब सजा-संवार कर रखते हैं और उसे चलाने के भी शौक़ीन होते हैं। यह मातृभक्त होते हैं और अपनी माँ की सेवा भी बहुत करते हैं, इनमे अहम् भी बहोत होता है, यह किसी पे कोई उपकार करें तो उसे बार बार याद भी दिलाते रहते हैं। इनका तकनिकी ज्ञान बहोत अच्छे स्तर का होता है, यह किसी भी चीज को बहुत बारीकी से समझते हैं जीससे यह उसी कार्य द्वारा अपनी जीविका बना लेते हैं। इनको पत्नी प्रायः धार्मिक स्वभाव वाली मिलती है जो अपने कुल की परंपरा का निर्वहन कर के जातक को अपने परिवार और समाज में उच्च दर्जा दिलाने में सहायक बनती है।
इनकी पूर्णायु 60 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वमी दैत्य गुरु शुक्राचार्य हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी कल्याण के लिए शुक्र देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भगवान विष्णु और माता दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। साथ ही पत्नी का सम्मान करना चाहिए इनके जीवन में पत्नी के भाग्य से ही सफलता और धन-धान्य होता है अतः पत्नी से सदा सम्बन्ध मधुर रखने में ही इनका कल्याण निहित होता है।
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शनिवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव    Saturday

शनिवार के दिन जन्म लेने वाला जातक तेज प्रकृति का होता है। यह दृढ-प्रतिज्ञ, कामी एवं साहसी होता है। शरीर की स्थिति विशेष अच्छी नहीं होती फिर भी इसका पराक्रम सराहनीय होता है, इनके बाल लंबे और खुबसूरत होते हैं। यह अपने आप में मस्त रहने वाला होता है, इनके जीवन में जब चुनौतियाँ आती है यह तब उसे पूर्ण हल करने हेतु अपने आप को तैयार करते हैं और पूर्ण होते ही फिर अपनी दुनियां में मस्त हो जाते हैं। यह स्वभाव से कंजूस होते हैं खर्चा करना इन्हें पसंद नहीं होता, सिर्फ यह खर्चा न हो इसके लिए जीवन के कई सुख से वंचित रह जाते हैं, यह तर्क बहुत करते हैं प्रायः अच्छी चीज को बुरा और बुरी चीज को अच्छा बताते हैं। यह अपने जन्म स्थान को छोड़कर कहीं दूर जाना नहीं चाहते जिससे इन्हें कैरिअर बनाने में मुश्किलें आती हैं। यह अपनी भावनाओं को लोगों के सामने नहीं रख पाते इस लिए लोग इन्हें रुखा या खडूस आदि की संज्ञा देते हैं, यह शारिरिक मेहनत के कार्य करना ज्यादा पसंद करते हैं इन्हें दिमाकी काम करना कम भाता है। यह स्वभाव से न्यायप्रिय होते हैं। इनकी पत्नी को इनसे हमेशा सिकायत रहती है, यह यह प्रेम के मानले में सामान्य बने रहते हैं, रिश्तों की गर्माहट व्यक्त नहीं करते, कम बोलना पसंद करते हैं, अगर इनका जन्म रात्रि में हुआ है तो इस तरह का व्यवहार ही अधिक दर्शाते हैं। प्रायः इनको कन्या संतति अधिक होती है। इनको जबतक पिता का सुख होता है तो यह भी सुखी होते हैं, पिता की मृत्यु के पश्च्यात इनको दुःख मिलता है, अपने कमाई से अगर यह घर बनाते हैं तो इन्हें उस घर में सुख मुश्किल से ही मिल पाता है ।
इन्हें 1 महीन में तथा 13 वें वर्ष में कष्ट होता है तथा पूर्णायु 100 वर्ष की होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन के स्वामी शनि देव होते हैं अतः इन्हें अपने चहुमुखी कल्याण के लिए शनि देव के मन्त्रों का जप करना चाहिए तथा भैरव व माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए साथ ही अपने अधिनस्त कर्मचारियों को सम्मान देना चाहिये, गरीब और असहाय लोगों की यथा संभव मदत करनी चाहिए जिससे इन्हें जीवन में उत्तम सुख की प्राप्ति होती है।
शनि ग्रह के सम्पूर्ण मन्त्र एवं उपाय 

विशेष नोट- यह फलादेश दिवश के गुण-धर्म के अनुसार सामान्य रूप से लिखा गया है, जातक की कुंडली में स्थित ग्रहों के बलाबल, उसके पारिवारिक परिवेश के अधार पे इन फलों में न्यूनाधिकता हो सकती है। यह लेख उन जातकों के लिए लाभकारी हो सकता है जिन्हें अपनी जन्म तारीख व समय न पता हो सिर्फ जन्म का दिवश ही पता हो। कृपया यह पोस्ट आप को कैसी लगी अपना बहुमूल्य विचार कमेन्ट में जरुर लिखें ।

।।इति शुभम्।।

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