क्या आपका वास्तु शास्त्री आपको 'समाधान' दे रहा है या 'मौत' का डर??
“वास्तु के नाम पर समाधान मिल रहा है… या डर बेचकर खेल खेला जा रहा है?”
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| vastu ka dar |
सोशल मीडिया के 'रील-गुरुओं" द्वारा वास्तुशास्त्र जैसा महान ज्ञान आज मजाक बनकर रह गया है।आजकल वास्तु शास्त्र का अर्थ 'सुख-शांति' नहीं, बल्कि 'खौफ' बन गया है। आप सोशल मीडिया Reels. shorts स्क्रॉल करते हैं, और अचानक एक 'रिल गुरु' प्रकट होकर चीखता है अगर यहाँ टायलेट है तो कैंसर हो जाएगा। कोने का मकान है तो 3 साल में मौत हो जाएगी। लाल रंग यहाँ है तो पैसा आना बंद हो जाएगा। साउथ वेस्ट में छत पर पानी की टंकी है तो हार्टअटैक आ जाएगा!"
आप ठहरिए! और गहरी सांस लीजिए। यह वास्तु शास्त्र नहीं है। यह एक सोची-समझी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी" है, जिसका मकसद आपकी जेब काटना है। अतः आप सब खुद इस हकीकत को तर्क Logic की कसौटी पर परखें। लकीर का फकीर होना ठीक नहीं है।
क्या वास्तु के नाम पर मेडिकली डराने का खेल नहीं है, हम सभी जानते हैं कि इंसान सबसे ज्यादा अपनी और परिवार की सेहत से डरता है कि उसे कोई भयानक रोग न लग जाए। इसीलिए ये वास्तु के नियमों को बीमारिओं से जोड़ देते हैं। कहीं कैंसर का डर, तो कहीं हार्ट अटैक की भविष्यवाणी। कहीं किडनी फेल होने की चेतावनी, तो कहीं एक्सीडेंट का खौफ।
सच्चाई यह है कि घर की दिशाओं में कुछ बदलाव करने से कैंसर ठीक नहीं होता और न ही केवल एक टॉयलेट की वजह से किसी को हार्ट अटैक आता है। यह "नीम-हकीम खतरा-ए-जान" वाली बात है। इनका मकसद आपको डिप्रेशन में डालना है ताकि आप घबराहट में इनके महंगे और बेतुके उपाय (Remedies) खरीद लें।
वास्तु मे सबसे बड़ा झूठ
सबसे बड़ा गप्प तो 'कोने का मकान' और 'मौत' का झूठ है, आजकल बहुत से "रिल गुरु" हर दूसरी वीडियो में दावा करते है— "कोने अर्थात कॉर्नर के मकान में रहने वाले की 3 साल में मृत्यु निश्चित है।" आप खुद सोचिए अगर कोने का मकान वाकई 'काल' होता, तो संसार के हर गली मुहल्ले में कॉर्नर के मकान होते हैं और उनमें हजारों लोग सुख से रह रहे हैं, और यह तथाकथित बहुत से वास्तुविद/"रिल गुरु" कॉर्नर के मकान के नाम पर आपको अपना घर बेचने या तुड़वाने पर मजबूर करते है। यह 3 दिनों का वास्तु कोर्स कर के तोते की तरह यही सब रटा-रटाया झूठ बोलते रहते हैं।घर को 'कबाड़' बनाने का षड्यंत्र- ये लोग आपके सुंदर घर को ब्रास की मूर्तियां, तांबे की तारों, रंग-बिरंगी टेप, चमकीली रेडियम की पट्टियों से भर देते हैं। उत्तर और पूर्व North/East जैसी पवित्र दिशाओं में ये तांबे की तार और कीलें ठोक देते हैं, जिससे घर के ईशान्य दिशा से सकारात्मक (Positve Enaergy) ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। जो घर आपको सुकून देने के लिए था, उसे ये 'डर का म्यूजियम' बना देते हैं पढ़े-लिखे लोग भी इनकी चकाचौंध एडिटिंग, डायलॉग और आत्मविश्वास देखकर भ्रमित हो जाते हैं और अपने हाथों अपने घर का वास्तु खराब कर लेते हैं।
जागो और इनसे तर्क करो, हर बात को सर हिलाकर मानना बंद करो, किसी भी रेमेडी अथवा उपाय का तार्किक कारण पूछो।
वास्तु का अनुभव
अतः अपने लंबे वास्तु अनुभवों के आधार पर मैं वास्तु आचार्य उदय प्रकाश शर्मा आप से यही कहना चाहूंगा कि वास्तुशस्त्र जीवन को बेहतर बनाने का विज्ञान है, डराने का नहीं। वास्तु दोष है, तो उसका तार्किक समाधान भी होता है, न कि कैंसर या हार्ट अटैक की धमकी। रील्स Reels देखकर खुद से वास्तु समाधान करना बंद करें, कोई भी वास्तु रेमेडी यूं ही खरीदकर घर न लाएं।अगर सचमुच घर या कार्यालय में कुछ वास्तु समस्याएं हैं तो किसी योग्य वास्तुशास्त्री से संपर्क करें, इन "रिल गुरुओं" की 60 सेकंड की वास्तु वीडियो देखकर अपने घर में तोड़-फोड़ न करें। अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करें। ऐसे 'डर के सौदागरों' को अपने जीवन और सोशल मीडिया से आज ही ब्लॉक करें। इनसे फ्री के सवाल करना बंद करें, यह आप का समाधान तो क्या करेंगे, उल्टा आप को और भयभीत कर देंगे। आप अपने नजदीकी अपने क्षेत्र/सिटी के किसी जानकार वास्तुविद को अपने घर वास्तु विज़िट के लिए आमंत्रित करें, अपने घर का वास्तु निरीक्षण कराएं, और उनके बताए उपाय को अजमाएं आप अवश्य लाभवन्तित होंगे। फ्री की चीजें हमेशा दुख देती हैं।
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