ॐ श्री मार्कंडेय महादेवाय नमः

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्यवेत्।
सब सुखी हों । सभी निरोग हों । सब कल्याण को देखें । किसी को लेसमात्र दुःख न हो ।

Pandit Uday Prakash
Astrologer, Vastu Consultant, Spiritual & Alternative Healers

गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

vastu me gadda kahan hona chahiye

vastu me gadda kahan hona chahiye 


“सिर्फ एक गलत गड्ढा, और पूरा वास्तु बिगड़ सकता है!”

वास्तु शास्त्र में प्लॉट के भीतर बनाए जाने वाले गड्ढों का सीधा संबंध ऊर्जा के प्रवाह से होता है। चाहे वह पानी के लिए बनाया गया हो या अपशिष्ट (सेफ्टिक टैक), के लिए हो, इसलिए निर्माण के समय उसकी सही दिशा का चयन अत्यंत आवश्यक है।


यदि यह स्थान गलत हो जाए, तो इसका प्रभाव घर के आर्थिक, मानसिक और शारीरिक पक्ष पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। “गड्ढा छोटा होता है, लेकिन उसका असर बहुत बड़ा होता है।”

वास्तु के अनुसार प्लॉट मे अंडर ग्राउंड वाटर टैंक, बोरिंग, कुआं, तहखाना, के लिए गड्ढा कहाँ हों?? 


वास्तु सिद्धांतों के अनुसार ईशान कोण, अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा (North/East) जल तत्व का स्थान माना गया है। इस दिशा में केवल जल से संबंधित गड्ढे जैसे बोरिंग, कुआँ, अंडरग्राउंड वाटर टैंक आदि बनाए जाने चाहिए। इस स्थान पर जल स्रोत होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का संचार होता है। इस क्षेत्र को जितना अधिक स्वच्छ और हल्का रखा जाए, उतना ही बेहतर परिणाम प्राप्त होता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि N/E से एक सीधी रेखा S/W को खींची जाए तो यह अति मर्म स्थान होगा अतः इस रेखा का बोरिंग अथवा गड्ढे का निर्माण करने समय इसे छोड़ देना चाहिए, अगर निर्माण में बेसमेंट कि आवश्यकता है तो जितने स्थान को जल के लिए चिन्हित किया गया है उस स्थान में बेसमेंट निर्माण किया जा सकता है निम्नलिखित चित्र में इसे नीले रंग से दिखाया गया है।

वास्तु के अनुसार प्लॉट मे सेप्टिक टैंक, Sok Pit, लिफ्ट के लिए गड्ढा कहाँ हों??


वायव्य कोण, अर्थात उत्तर-पश्चिम दिशा (North/West) अपशिष्ट निष्कासन के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस स्थान पर सेप्टिक टैंक या सोख पिट का निर्माण किया जा सकता है। यह दिशा वायु तत्व से संबंधित है, जो अपशिष्ट को बाहर निकालने में सहायक होती है और घर के वातावरण को संतुलित बनाए रखती है। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि N/W में भी बिल्कुल कोने की जहां 90 अंस का कोण बनता हैं वहां यह गड्ढा नहीं होना चाहिए, इससे घर की स्त्रियां को स्वास्थ्य की समस्याएं रहती हैं, इस दोष की वजह से प्रायः परिवारिक जनों का साइको या मनोरोगी लोगों से निरंतर पाला पड़ता रहता है अतः वायव्य का एकदम कॉर्नर छोड़ देना उचित रहता है।

वास्तु के अनुसार प्लॉट मे कहाँ गड्ढा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए??


इसके विपरीत, दक्षिण, अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में किसी भी प्रकार का गड्ढा बनाना वास्तु के अनुसार अशुभ माना गया है। इन दिशाओं में गड्ढा होने से आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक तनाव और पारिवारिक अस्थिरता जैसी परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से नैऋत्य कोण में गड्ढा बनाना गंभीर वास्तु दोष माना जाता है, जो जीवन की स्थिरता को प्रभावित करता है, यह पृथ्वी तत्व की दिशा है जो मजबूती से खड़े रहने के लिए बहुत जिम्मेदार होती है जैसे गड्ढे वाली भुरभुरि मिट्टी युक्त जमीन मजबूत निर्माण के उपयुक्त नहीं होती क्यों कि वह मिट्टी बड़े निर्माण का भार सह नहीं पाएगी और मकान गिर सकता है अतः यह दिशा जितनी ठोस होगी उतना शुभ फल प्राप्त होगा।
आज के समय में कुछ महान वास्तुविद पूर्वी आग्नेय (E/S/E) में सेफ्टिक टैक रखने की सलाह देते हैं, यह स्थान वास्तु में सुबह 9 से 10 बजे का ऊर्जा स्थान है, यह वह समय होता है जब व्यक्ति एकदम फ्रेस होकर अपने कार्य के लिए अपने ऑफिस या फैक्ट्री, बच्चे स्कूल के लिए निकलते हैं, इस समय सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें घर को और व्यक्ति दोनों को ऊर्जा प्रदान करती हैं, मैने अनुभव में पाया है जिन घरों में सेफ्टिक टैक इस स्थान पर हैं उन घरों में सुबह सुबह कार्य हेतु घर से निकलते समय अत्यधिक जल्दबाजी, आलस्य की वजह से तैयार न हो पाना जिसकी वजह से नित्य किचकिच होना आम बात है। मेरा आशय किसी भी ज्ञानी को गलत कहना नहीं है बल्कि मैने अपने कार्य अनुभव में अपने बहुत से क्लाइंट के घर में देखा है।

वास्तु का मूल सिद्धांत संतुलन पर आधारित है। जहाँ जल का स्थान होता है, वहाँ जीवन और ऊर्जा का प्रवाह होता है, जबकि अपशिष्ट के लिए उचित दिशा का चयन आवश्यक होता है ताकि नकारात्मकता नियंत्रित रहे।

अंततः मै आप का वास्तुविद आचार्य. उदय प्रकाश शर्मा, वास्तुशास्त्र के ग्रंथों के अध्ययन और अपने अबतक के वास्तु यात्रा के निजी कार्य अनुभव के आधार पे आप से यही निवेदन करूंगा कि प्लॉट में गड्ढों का निर्माण ईशान कोण में जल स्रोत और वायव्य कोण में सेप्टिक टैंक के रूप में किया जाए तथा दक्षिण दिशा को इस प्रकार के निर्माण से मुक्त रखा जाए, तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वातावरण बना रहता है।

मित्रों यह निरंतर कार्य अनुभव के आधार पर लिखा आलेख है, वास्तु को लेकर बहुत मत-मतांतर हैं अतः पोस्ट को पढ़ें, समझें अनुभव करें, कुतर्क और बिना मतलब की बहस ना करें। मेरा यह प्रयास, समाज को वास्तु विषय कि सरल जानकारी साझा करना है, जिससे लोग वास्तु को लेकर भ्रम और डर से बाहर आकर खुद अपने घर को सुधार सकें। अगर आप के कुछ सुझाव हैं तो कृपया मर्यादित शब्दों में मुझे लिखें, कुछ भी अनाप-शनाप कमेंट करने से बचें, जिस विषय कि बात हो रही है उसी विषय पे रहें । पूरा आलेख ध्यान से पढ़ें। 

।। इति शुभम् ।।


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indian famous vastu consultant 

Acharya Uday Praksh Sharma

                                                                        
                                      Vedic Vastu and Jyotish Anusandhan Kendra, Varanasi
                                                  

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